Piyush Goyal On Trump Tariff: ट्रंप के 25% टैरिफ पर आज शाम 4 बजे संसद में जवाब देंगे पीयूष गोयल

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में एक बड़ा मोड़ आ गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर 25% का भारी-भरकम टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का ऐलान किया है. यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि पहले ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि यह टैरिफ 20% से कम रहेगा.

यही नहीं, ट्रंप प्रशासन ने रूस के साथ व्यापारिक संबंध रखने पर भारत पर जुर्माना लगाने की भी बात कही है. इस दोहरे झटके के बाद भारत सरकार हरकत में आ गई है और उम्मीद है कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल आज शाम 4 बजे लोकसभा में इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखेंगे.

इस पूरे मामले पर भारत सरकार की नजर बनी हुई है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल आज शाम 4 बजे लोकसभा को संबोधित कर सकते हैं. उम्मीद है कि वे इस संबोधन में बताएंगे कि:

  • सरकार इस फैसले को किस तरह देखती है.
  • भारतीय व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे.
  • क्या अमेरिका से इस बारे में आगे और बातचीत की जाएगी.

क्या है पूरा मामला?

पिछले कुछ समय से भारत और अमेरिका के बीच एक नई ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही थी. ऐसा माना जा रहा था कि दोनों देश आपसी सहमति से व्यापार की नई शर्तें तय कर लेंगे. डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भी ऐसे संकेत मिल रहे थे कि भारत पर लगने वाला टैरिफ ज्यादा नहीं होगा, लेकिन अब उनके इस ऐलान ने सबको हैरान कर दिया है. 25% का टैरिफ एक बहुत बड़ी रकम है, जिसका सीधा असर भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर पड़ेगा.

टैरिफ एक तरह का टैक्स होता है. जब भारत अपना कोई सामान अमेरिका में बेचने के लिए भेजेगा, तो उस पर अमेरिका 25% का अतिरिक्त शुल्क लगाएगा. इससे भारतीय सामान अमेरिका में महंगा हो जाएगा और उसकी मांग कम हो सकती है. इसका सीधा नुकसान भारतीय व्यापारियों और कंपनियों को होगा.

रूस वाला एंगल क्या है?

अमेरिका ने सिर्फ टैरिफ ही नहीं बढ़ाया है, बल्कि भारत को एक और मुश्किल में डाल दिया है. अमेरिका ने कहा है कि अगर भारत रूस के साथ कारोबार करता है, तो उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है. यह भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है क्योंकि रूस भारत का पुराना और भरोसेमंद सहयोगी रहा है, खासकर रक्षा सौदों के मामले में.

कुल मिलाकर, ट्रंप का यह फैसला भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक और कूटनीतिक चुनौती है. अब देखना यह होगा कि भारत सरकार इस स्थिति से कैसे निपटती है और दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते भविष्य में क्या मोड़ लेते हैं.