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UP Assembly Elections 2022: अखिलेश यादव ने रचा योगी आदित्यनाथ के लिए चक्रव्यूह, BJP के कई पुराने साथी भी दे रहे है साथ

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी एक बार फिर से गठबंधन के फॉर्मूले को अपना कर सत्ता पाने की कवायद में जुट गयी है. सपा मुखिया अखिलेश यादव लगातार छोटे दलों से गठबंधन करके अपने को बड़ा पेश करने में लगे हुए हैं. हालांकि सपा के पुराने अनुभवों में गठबंधन उनके लिए ज्यादा मुफीद नहीं रहा है.

UP Assembly Elections 2022: अखिलेश यादव ने रचा योगी आदित्यनाथ के लिए चक्रव्यूह, BJP के कई पुराने साथी भी दे रहे है साथ
अखिलेश यादव (Photo Credits: ANI)

लखनऊ, 26 नवंबर: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) एक बार फिर से गठबंधन के फॉर्मूले को अपना कर सत्ता पाने की कवायद में जुट गयी है. सपा मुखिया अखिलेश यादव लगातार छोटे दलों से गठबंधन करके अपने को बड़ा पेश करने में लगे हुए हैं. हालांकि सपा के पुराने अनुभवों में गठबंधन उनके लिए ज्यादा मुफीद नहीं रहा है. UP: अखिलेश यादव का तंज, कहा- यह कैसी सरकार है, एक तरफ तो हवाई अड्डे बेच रही है तो दूसरी तरफ नया बना रही है

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जातीय और क्षेत्रीय समीकरण दुरूस्त रखने के लिए पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक के दलों से गठबंधन की गांठों को मजबूत करने में जुटे हैं. वह पूर्वांचल में ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी(सुभासपा) से हांथ मिला चुके हैं. उनके साथ गाजीपुर में रैली कर उनकी ताकत को भी अखिलेश देख चुके हैं.

तीन नए कृषि कानून के विरोध से सुर्खियों में आए राष्ट्रीय लोकदल के साथ भी उनकी पार्टी कंधे से कंधा मिलाने की तैयारी कर रही है. बताया जा रहा है. फॉर्मूला तय हो गया है. एलान भी जल्द होने की संभावना है. लेकिन सरकार द्वारा कानून वापस होने के बाद माहौल कितना बदला है. यह किसान आंदोलन की दशा और दिशा पर निर्भर करेगा.

दिल्ली की सत्ता में काबिज आम आदमी पार्टी ने यूपी में फ्री बिजली का मुद्दा उछाल कर बढ़त लेने का प्रयास जरूर किया था। लेकिन वह इन दिनों सपा के सहयोगी बनने की राह पर दिख रहे हैं. कुर्मी वोटों में सेंधमारी के लिए अपना दल कमेरावादी की अध्यक्ष कृष्णा पटेल भी सपा के पाले में ही है. इससे अपना दल अनुप्रिया गुट को चुनौती देने में आसानी होगी.

राजनीतिक पंडित कहते हैं कि सपा की नजर इस बार गैर यादव वोटों पर है. उनका मानना है कि छोटे दलों के साथ तालमेल बैठाकर जातीय गणित सेट करके ज्यादा से ज्यादा इनका प्रतिशत अपने पाले में लेने का प्रयास हो रहा है. इसी कारण सोनभद्र और मिर्जापुर में प्रभाव रखने वाली गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ भी तालमेल हो गया है.

राजनीतिक जानकार कहते हैं कि सपा अगर गठबंधन के जरिए अच्छा प्रदर्षन नहीं कर पाती तो उसके लिए काफी मुश्किल होगी. छोटे दल भाजपा के पाले में जा सकते हैं. इस कारण सपा के अच्छे प्रदर्शन पर गठबंधन को मजबूती मिलेगी. कई दशकों से उत्तर प्रदेश की राजनीति में गहरी पैठ रखने वाले राजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि गठबंधन के दो बड़े प्रयोग सपा पहले भी कर चुकी है. 2017 में सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था. लेकिन न कांग्रेस का वोट सपा को ट्रान्सफर हुआ. न उनका इन्हें मिला. 2019 के लोकसभा चुनाव में 29 साल बाद सपा बसपा ने गठबंधन किया.

सपा का वोट मायावती को ट्रान्सफर नहीं हुआ. न मायावती का वोट सपा को ट्रान्सफर हुआ. अगर होता तो बड़ी सफलता मिलती है. अभी जो गठबंधन है उसमें वोट एक दूसरे को ट्रांसफर होंगे यह सवाल हैं. अभी सपा ने ओमप्रकाश राजभर और जयंत चौधरी के साथ गठबंधन किया है.पश्चिम में सपा का वोट बेस मुस्लिम समुदाय में है. क्या जाट मुस्लिम के साथ वाली पार्टी को वोट देंगे. क्योंकि 2013 में मुजफ्फरनगर के दंगे हुए थे. वह जाट बनाम मुस्लिम हुए थे. ऐसे में देखना है कि मुस्लिम वोट क्या जाट के साथ आएंगे. इसी प्रकार पूरब में भी राजभर के वोट क्या यादव के साथ जाएंगे.

कई दशकों से यूपी की राजनीति पर खास नजर रखने वाले वीरेन्द्र भट्ट कहते हैं कि गैर यादव पिछड़ी जातियों को अपनी पार्टी में समेटना मुलायम सिंह यादव के समय से चुनौतीपूर्ण रहा है. यादव वर्ग किसी और दूसरी अन्य जाति को स्वीकार नहीं करते जैसे औरैया, इटावा, फरूर्खाबाद में शाक्यों की बहुलता है लेकिन इन्हे आज तक उचित भागीदारी सपा में नहीं मिली. अन्य जातियों के साथ हो रहे गठबंधन को लेकर यादव वर्ग में बेचैनी है. उनको लगता है गठजोड़ से उनके वर्ग के टिकट कम होंगे.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 26, 2021 03:02 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).