कांग्रेस का दावा- मध्य प्रदेश में मौजूद हैं 60 लाख फर्जी मतदाता, दर्ज कराई शिकायत
मध्य प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में फर्जी मतदाता बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. इसे लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग के यहां शिकायत दर्ज कराई है.
भोपाल: मध्य प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में फर्जी मतदाता बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. इसे लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग के यहां शिकायत दर्ज कराई है. कांग्रेस ने 60 लाख फर्जी मतदाता होने का दावा किया है. फर्जी मतदाताओं का सबसे पहला और बड़ा खुलासा तो इसी साल के फरवरी माह में शिवपुरी के कोलारस और अशोकनगर के मुंगावली में हुए विधानसभा उपचुनाव के दौरान हुआ था. आगामी चुनाव में राजनीतिक दल और उनके कार्यकर्ता सजग व सर्तक रहे तो चुनाव के नतीजों में बड़े बदलाव की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है.
पिछले माह की नौ मई को आईएएनएस ने सिर्फ शिवपुरी जिले में 60 हजार फर्जी मतदाताओं का खुलासा किया था. इनमें से 21,000 मतदाता ऐसे थे, जिनकी वषरें पहले मौत हो चुकी थी.
इस सूची में 28,067 मतदाता ऐसे हैं, जो दूसरी जगह चले गए, फिर भी सूची में उनके नाम हैं. जिले में अपने स्थान पर अनुपस्थित पाए गए मतदाताओं की संख्या 5,633, और एक से ज्यादा स्थानों पर 5,031 मतदाताओं के नाम पाए गए थे.
गौरतलब है कि फरवरी माह में कोलारस विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी यह बात सामने आई थी कि 5,537 मृत मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में मौजूद थे. शिकायत के बाद शिवपुरी के तत्कालीन जिलाधिकारी तरुण राठी को इस मामले में चुनाव आयोग ने लापरवाही का दोषी पाया था.
आयोग ने जांच में पाया था कि जिलाधिकारी तरुण राठी ने सूची में गड़बड़ी पर सही मॉनिटरिंग नहीं की. इसके बाद निर्वाचन आयोग ने मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह को पत्र भी लिखा था. बाद में राठी का तबादला कर दिया गया.
ऐसे में सवाल उठा कि जब शिवपुरी जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में 60,000 फर्जी मतदाता अर्थात औसतन एक विधानसभा में 12,000 फर्जी मतदाता हो सकते हैं, तो प्रदेश के 230 विधानसभा क्षेत्रों का क्या हाल होगा. इसी आधार पर कांग्रेस ने विधानसभा की 100 सीटों पर मतदाताओं की स्थिति का पता लगाया, जिसमें औसत तौर पर एक बात सामने आई कि राज्य में 6000,000 फर्जी मतदाता हैं. एक मतदाता की 10 से 20 मतदान केंद्रों की सूची में नाम और तस्वीरें हैं.
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा अन्य नेताओं ने चुनाव आयोग को शिकायत की, जिस पर जांच भी शुरू हो गई है. आयोग ने एक जांच दल भोपाल भी भेजे हैं.
राज्य की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सलीना सिंह का कहना है, "जो हुआ है वह नहीं होना चाहिए. इसमें सुधार के लिए हमारी ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. जिला स्तर पर ऐसा सिस्टम बनाने की कोशिश हो रही है, जिसके जरिए एक ही तस्वीर कई स्थानों पर पाए जाने पर उन्हें हटाया जाए. हमारी सबसे मजबूत कड़ी ब्लॉक स्तर का अधिकारी होता है, वह अच्छा काम करेगा, कलेक्टर उस पर निगरानी अच्छे से रखेंगे तो तस्वीरों का दोहराव नहीं होगा."
राज्य सरकार के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, "मतदाता सूची में गड़बड़ी है तो उसमें सुधार होना चाहिए, मगर एक सवाल यह भी उठता है कि मतदाता सूची ब्रेक कैसे हुई। ऐसा कौन सा सॉफ्टवेयर आ गया, यह भी जांच का विषय है. इतना तय है कि इससे सरकार या उससे जुड़े लोगों का कोई लेना-देना नहीं है."
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह चौहान ने पिछले दिनों चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि भोपाल जिले के नरेला विधानसभा क्षेत्र में कई मकान ऐसे हैं, जिनका आकार 1550 से 2000 वर्ग फुट है और वहां 100 से 150 तक मतदाता होना बताया गया है.
राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव में फर्जी मतदाता का मसला काफी अहम रहने वाला है, क्योंकि 230 विधानसभा क्षेत्रों में लगभग 50 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां जीत हार का अंतर अधिकतम 5,000 रहता है. इस स्थिति में अगर फर्जी मतदाताओं के नाम काट दिए गए और उनके स्थान पर कोई वोट नहीं डाल पाया तो नतीजे चुनावी तस्वीर बदलने वाले साबित हो सकते हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 04, 2018 03:42 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

