संसद मार्च पर आमादा 'कॉकरोच', पुलिस ने बंद किए रास्ते
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है.
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है. इसके अलावा वे परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक मामलों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं.नई दिल्ली में सोमवार को युवा नेतृत्व वाले कॉकरोच जनता पार्टी आंदोलन के सैकड़ों समर्थक संसद मार्च के लिए जुटे. हालांकि दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति देने से इनकार कर दिया. जंतर मंतर पर सुबह से ही भारी पुलिस बल तैनात है और पूरे इलाके को बैरिकेड्स से घेर दिया गया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं के खिलाफ अपनी आवाज संसद तक पहुंचाना चाहते हैं. संसद से कुछ ही किलोमीटर दूर मौजूद प्रदर्शन स्थल पर तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच टकराव की आशंका भी जताई जा रही है.
क्या सीजेपी की देखादेखी युवाओं के मुद्दे उठा रही है कांग्रेस
कॉकरोच जनता पार्टी मई में उस समय चर्चा में आई, जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच' से की. आंदोलन के समर्थकों ने इस टिप्पणी को विरोध के प्रतीक में बदल दिया और इसे व्यंग्यात्मक जन अभियान का रूप दे दिया. देखते ही देखते यह अभियान सोशल मीडिया पर फैल गया और लाखों युवा इससे जुड़ गए. इसके बाद यह आंदोलन केवल ऑनलाइन अभियान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़कों पर भी दिखाई देने लगा.
सोनम वांगचुक को जबरन हटाने से बढ़ी चर्चा
हाल के महीनों में भारत में मेडिकल कॉलेज प्रवेश परीक्षा नीट और सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं के बीच गहरा असंतोष पैदा किया है. आंदोलन इसी मुद्दे पर केंद्रित है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली की खामियों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है. उनका कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से मेहनत करने वाले स्टूडेंट्स का भरोसा कमजोर हुआ है.
पिछले एक महीने से खुद को ‘कॉकरोच' कहने वाले प्रदर्शनकारी जंतर मंतर पर डेरा डाले हुए हैं. कई छात्र संगठनों के सदस्य भी आंदोलन से जुड़ चुके हैं. स्टूडेंट्स के साथ सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर हैं. शनिवार को पुलिस ने सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से जबरन उठा लिया और अस्पताल ले गई. इस घटना ने प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा दिलाई.
प्रदर्शनकारियों की ज्यादातर मांगें स्टूडेंट्स से जुड़ी
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है. इसके अलावा वे परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पेपर लीक मामलों की जवाबदेही तय करने और पेपर लीक से जुड़े तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि केवल जांच से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि संस्थागत बदलाव जरूरी हैं. आंदोलनकारी शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग पर जोर दे रहे हैं.
मार्च से पहले सोनम वांगचुक ने कहा कि वह अपनी लगभग तीन सप्ताह से जारी भूख हड़ताल तभी समाप्त करेंगे, जब सरकार शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक मामलों में जिम्मेदारी स्वीकार करे. उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों को संसद तक जाने की अनुमति दी जाती है और सांसद दोनों सदनों में यह मुद्दा उठाने का आश्वासन देते हैं, तब वह अपनी भूख हड़ताल खत्म कर सकते हैं. उनके बयान को आंदोलनकारियों ने सरकार के सामने अंतिम राजनीतिक संदेश के रूप में पेश किया है.
उधर दिल्ली पुलिस ने कहा कि संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए मार्च की अनुमति नहीं दी जा सकती. पुलिस का कहना है कि संसद परिसर के आसपास कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंध आवश्यक हैं. दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी लोकतांत्रिक आवाज को दबाया जा रहा है.
यह प्रदर्शन नरेन्द्र मोदी की सरकार के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है. इसे देश की विपक्षी पार्टियों के अलावा, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कुछ बॉलीवुड सिलेब्रिटीज का समर्थन भी मिल रहा है. मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने प्रदर्शनकारियों को लेकर कड़ी टिप्पणियां की हैं. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रदर्शनकारियों पर देश के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 20, 2026 11:00 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

