पीपल, प्लैनेट एंड प्रोग्रेस: एआई के भविष्य पर भारत में चर्चा
16 से 20 फरवरी के बीच भारत में विश्व का चौथा एआई इम्पैक्ट समिट आयोजित हो रहा है.
16 से 20 फरवरी के बीच भारत में विश्व का चौथा एआई इम्पैक्ट समिट आयोजित हो रहा है. इससे भारत के लिए वैश्विक निवेश और तकनीकी साझेदारी के नए अवसर खुलने की उम्मीद है.16 से 20 फरवरी के बीच भारत में विश्व का चौथा एआई इम्पैक्ट समिट आयोजित हो रहा है. इससे भारत के लिए वैश्विक निवेश और तकनीकी साझेदारी के नए अवसर खुलने की उम्मीद है.
भारत की राजधानी दिल्ली में सोमवार से ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' की शुरुआत होने जा रही है. इस सम्मेलन में विश्वभर से नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शोधकर्ता, स्टार्टअप और शिक्षाविद् हिस्सा लेंगे.
इस बार फोकस ‘पीपल, प्लैनेट एंड प्रोग्रेस' के सिद्धांत पर रहेगा. भारत एआई पर वैश्विक चर्चा को आगे बढ़ाकर इसके प्रभाव, समावेशन और विकास की दिशा में ले जाएगा. सम्मेलन के दौरान मानव संसाधन विकास, सुरक्षित व भरोसेमंद एआई, इनोवेशन, एआई संसाधनों की लोकतांत्रिक पहुंच और आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा होगी.
सम्मेलन 16 से 20 फरवरी को भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है. हालांकि मुख्य औपचारिक शुरुआत 19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ होगी. इसके अलावा सुषमा स्वराज भवन और अंबेडकर भवन में भी पैनल डिस्कशन होंगे. इंडिया एआई मिशन के तहत आयोजित हो रहे इस सम्मलेन में सौ से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग लेने वाले हैं. आयोजन की जिम्मेदारी इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय संभाल रहा है. इसका लोगो अशोक चक्र से प्रेरित है. कुछ खास कार्यक्रम जैसे एआई पिच फेस्ट (उडान), 'ग्लोबल इनोवेशन चैलेंज', 'युवा एआई चैलेंज' और 'एआई फॉर हर' मुख्य आकर्षण होंगे.
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नीति पर चर्चाओं के साथ एआई इम्पैक्ट एक्सपो भी आयोजित किया जा रहा है. यहां स्टार्टअप्स, शोध संस्थान और तकनीकी कंपनियों के लागू किए जा सकने वाले एआई समाधानों को दिखाया जाएगा. साथ ही एयरोस्पेस, स्वास्थ्य, कृषि, वित्त, साइबर सुरक्षा, शिक्षा और पब्लिक सेक्टर में एआई के प्रयोग पर प्रदर्शनी होगी.
टेक जगत की टॉप हस्तियों की हिस्सेदारी
सम्मेलन में दुनिया के कुछ सबसे प्रमुख एआई और तकनीक का नेतृत्व करने वाले व्यक्तियों के शामिल होने की उम्मीद है. इसमें गूगल के सीईओ सुंदर पिचई, ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन, मेटा के प्रमुख एआई अधिकारी एलेक्सेंडर वैंग, बायोकॉन ग्रुप की चेयरपर्सन किरन मजूमदार-शॉ और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के प्रेसिडेंट-सीईओ बोर्गे ब्रेंडे अपनी बात रखेंगे.
साथ ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा जैसे शीर्ष अंतरराष्ट्रीय नेता भी सम्मिलित होने वाले हैं. इस इवेंट में भारत को एआई के अलावा सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, बायोटेक, एग्रीफूड और ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश मिल सकता है.
जर्मनी के प्रतिनिधि भी कई महत्वपूर्ण सत्रों और पैनलों में भाग ले रहे हैं. जर्मन फेडरल मिनिस्ट्री फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट के डिप्टी हेड ऑफ डिविजन वोल्फगर बुनगार्टेन और भारत में जर्मन दूतावास से फोल्कर क्लीमा रहेंगे. वे ‘एआई इन पॉलिसीमेकिंग' और कृषि क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल पर चर्चा में शामिल होंगे. एआई इम्पैक्ट समिट से पहले अक्टूबर 2025 से इस साल जनवरी के बीच गुजरात, ओडिशा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और केरल समेत आठ राज्यों में रीजनल एआई कॉन्फ्रेंस भी आयोजित हुए हैं.
इसके पहले कहां हुआ आयोजन और क्या रहा उसका हासिल?
पिछले कुछ सालों में एआई इंपैक्ट समिट दुनिया के प्रमुख अंतरार्ष्ट्रीय मंचों ब्रिटेन (यूके), दक्षिण कोरिया और फ्रांस में आयोजित किया जा चुका है. इसके अगले संस्करण की मेजबानी के लिए कई देशों ने रुचि दिखाई है. जिनमें स्विट्जरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.
साल 2023 में इस सम्मलेन को ब्रिटेन के ब्लेचली पार्क में आयोजित किया गया. यहां एआई सुरक्षा और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा हुई. पहली बार एआई सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर ध्यान दिया गया और 28 देशों ने ब्लेचली घोषणा पर हस्ताक्षर किए. इसका मकसद एआई जोखिम को समझना और सुरक्षित नियम बनाना था. भारत ने भी इस समझौते को मंजूरी दी थी. साथ ही ओपनएआई, गूगल डीपमाइंड और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों ने सहमति दी कि वे सुरक्षा परीक्षण (सेफ्टी टेस्टिंग) की जानकारी सरकारों के साथ साझा करेंगी.
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साल 2024 में इसका दूसरा चरण दक्षिण कोरिया के सियोल में हुआ. इस बार सरकारों के अलावा प्राइवेट सेक्टर, शोध संस्थान और गैर‑सरकारी संगठन के लोग भी शामिल हुए. यहां सियोल एआई घोषणा को अपनाया गया. यह एआई सुरक्षा, जोखिम मूल्यांकन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर देता है. भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया समेत कुल 27 देशों ने इसे स्वीकार किया और हस्ताक्षर किए.
वहीं पिछले साल फ्रांस में इस समारोह का आयोजन हुआ था. पीएम नरेंद्र मोदी ने भी पैरिस जाकर इसमें हिस्सा लिया था.
इस बार भारत में होने वाले सम्मेलन से कुछ ही दिन पहले इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आईटी नियमों (2021) में संशोधन कर एआई-जनित सामग्री और डीपफेक को नियंत्रित करने के लिए नए नियम बनाए हैं. अब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एआई से बनाई गई सामग्री पर नियम लागू होंगे. एआई-जनित वीडियो, फोटो, ऑडियो या टेक्स्ट को स्पष्ट रूप से लेबल करना होगा. साथ ही इन प्लेटफॉर्म पर हानिकारक, भ्रामक या बिना अनुमति की एआई सामग्री को दो से तीन घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा. उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.