'अब और देरी बर्दाश्त नहीं'...1965 युद्ध के जवानों का बकाया पेंशन तुरंत चुकाने का आदेश! केंद्र की लापरवाही पर HC ने लगाई फटकार

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार को 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के एक वीर चक्र विजेता की पेंशन बकाया राशि को एक महीने के भीतर चुकाने का आदेश दिया है. यह आदेश सशस्त्र बल ट्रिब्यूनल (AFT) के 2018 के फैसले के अनुसार है. हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर इस आदेश का पालन नहीं किया गया, तो बकाया राशि पर 15% अतिरिक्त ब्याज लगेगा.

हाईकोर्ट की पीठ, जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मीनाक्षी आई. मेहता ने केंद्र सरकार की इस देरी पर नाराजगी जताई. यह देरी 2018 में AFT के फैसले के बावजूद 7 साल तक चली. पीठ ने कहा कि AFT के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाएं बार-बार दायर की जा रही हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के पराशोतम दास मामले में दिए गए फैसले के आधार पर हो रही हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के अपने फैसले (यूनियन ऑफ इंडिया बनाम मेजर जनरल श्रीकांत शर्मा) को पलट दिया था, जिसमें कहा गया था कि हाईकोर्ट AFT के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई नहीं कर सकते. हालांकि, पराशोतम दास मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को बदल दिया.

हाईकोर्ट ने कहा, "हम देख रहे हैं कि AFT के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाएं बार-बार दायर की जा रही हैं. हम केंद्र सरकार को एक महीने के भीतर AFT के आदेश को लागू करने का निर्देश देते हैं. अगर ऐसा नहीं होता है, तो बकाया राशि पर 15% अतिरिक्त ब्याज लगेगा, जो जिम्मेदार अधिकारियों से वसूला जाएगा."

क्या है मामला

यह मामला सेवानिवृत्त कैप्टन रीत एमपी सिंह से जुड़ा है, जो एक सम्मानित सेना अधिकारी हैं और 1965 के युद्ध में उन्होंने वीरता दिखाई थी. युद्ध के दौरान उन्हें चोट लगी, जिसके कारण वे विकलांग हो गए. उन्हें प्रतिष्ठित 'वीर चक्र' से सम्मानित किया गया. इसके बाद उन्हें विकलांगता पेंशन मिलनी शुरू हुई, लेकिन इसे 100% के बजाय 80% पर तय किया गया.

2014 में, सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन ऑफ इंडिया बनाम राम अवतर मामले में फैसला सुनाया कि ऐसे मामलों में विकलांगता पेंशन 100% दी जानी चाहिए. इस फैसले के आधार पर, कैप्टन रीत एमपी सिंह ने अपनी पेंशन को संशोधित करने की मांग की.

23 अगस्त 2018 को, AFT ने आदेश दिया कि कैप्टन सिंह की विकलांगता पेंशन 100% कर दी जाए. हालांकि, इस आदेश के बावजूद, अधिकारियों ने इसे लागू नहीं किया, जिसके कारण यह मामला फिर से कोर्ट पहुंचा.

हाईकोर्ट का कड़ा रुख

केंद्र सरकार ने AFT के फैसले को चुनौती देते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की. 22 जनवरी के अपने आदेश में, हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की इस देरी पर नाराजगी जताई और एक महीने के भीतर बकाया राशि चुकाने का आदेश दिया.

यह मामला उन बहादुर सैनिकों के प्रति सरकारी उदासीनता को उजागर करता है, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया. हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल कैप्टन रीत एमपी सिंह के लिए न्याय सुनिश्चित करता है, बल्कि यह सरकारी अधिकारियों के लिए एक सबक भी है कि वे देश के जवानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लें.