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केरल की नर्स निमिषा प्रिया की फांसी पर अटकी सांसें; जानें क्या है 'दिया' और 'किसास’ जिससे होगा जिंदगी और मौत का फैसला

निमिषा प्रिया एक भारतीय (केरल) नर्स हैं जो यमन में एक हत्या के मामले में मौत की सजा पा चुकी हैं. 2017 में उन्होंने अपने बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी को बेहोश करने की कोशिश की थी ताकि वह जबरदस्ती रोके गए अपने पासपोर्ट को वापस ले सकें.

केरल की नर्स निमिषा प्रिया की फांसी पर अटकी सांसें; जानें क्या है 'दिया' और 'किसास’ जिससे होगा जिंदगी और मौत का फैसला
Nimisha Priya | X

निमिषा प्रिया एक भारतीय (केरल) नर्स हैं जो यमन में एक हत्या के मामले में मौत की सजा पा चुकी हैं. 2017 में उन्होंने अपने बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी को बेहोश करने की कोशिश की थी ताकि वह जबरदस्ती रोके गए अपने पासपोर्ट को वापस ले सकें. लेकिन अत्यधिक मात्रा में दवा देने के कारण उसकी मौत हो गई. यह घटना अब उन्हें मौत की सजा के मुहाने तक ले आई है.

निमिषा प्रिया की फांसी की सजा होगी माफ? राहत की उम्मीदों को झटका; पीड़ित परिवार ने मांगा किसास.

मामले की सबसे अहम बात यही है क्या निमिषा ने जानबूझकर हत्या की या यह सिर्फ एक गलती थी? रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने तलाल को बेहोश करना चाहा, लेकिन वह ओवरडोज़ से मर गया. परंतु तलाल के भाई अब्देलफत्ताह महदी का मानना है कि यह हत्या जानबूझकर की गई थी. इसलिए वे 'दिया' के जरिए समझौते को सिरे से नकार रहे हैं.

क्या है ‘किसास’ और ‘दिया’?

‘किसास’ एक इस्लामिक न्याय व्यवस्था में "बदले की न्याय" प्रणाली है, जिसका मतलब है “आंख के बदले आंख”. अगर हत्या जानबूझकर की गई हो तो पीड़ित का परिवार ‘किसास’ की मांग कर सकता है. यानी हत्यारे को मौत की सजा दी जाए.

‘दिया’ या "ब्लड मनी" एक दूसरा विकल्प है. अगर हत्या गलती से हुई हो, तो पीड़ित का परिवार आर्थिक मुआवजे के बदले आरोपी को माफ कर सकता है. यह एक तरह का समझौता होता है.

भाई की जिद: “हमें सिर्फ किसास चाहिए”

तलाल के भाई अब्देलफत्ताह महदी ने एक फेसबुक पोस्ट में स्पष्ट किया कि वे किसी भी पैसे के बदले समझौते को नहीं मानते. उन्होंने कहा, “हमारा एक ही मकसद है — बदला (किसास). कुछ और नहीं.” यह बयान तब आया जब हौथी प्रशासन ने भारतीय हस्तक्षेप के बाद 16 जुलाई को होने वाली फांसी को टाल दिया. इसमें भारत सरकार और केरल के मशहूर मुस्लिम धर्मगुरु कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार की कोशिशें थीं. लेकिन परिवार इस देरी से असंतुष्ट है.

भारत की कोशिशें और 1 मिलियन डॉलर का प्रस्ताव

निमिषा की मां और प्रवासी भारतीयों के एक समूह ने बीते पांच वर्षों से लगातार सुलह कराने की कोशिश की है. यहां तक कि 1 मिलियन डॉलर तक की ‘दिया’ राशि की पेशकश भी की गई, लेकिन महदी परिवार ने साफ इंकार कर दिया.

निमिषा प्रिया की किस्मत अब सिर्फ यमन की अदालत या महदी परिवार के फैसले पर टिकी है. अगर परिवार ‘किसास’ पर अड़ा रहता है, तो फांसी टालना मुश्किल हो सकता है. लेकिन अगर 'दिया' स्वीकार कर ली जाती है, तो उनकी जान बच सकती है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 17, 2025 04:32 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).