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निमिषा प्रिया की फांसी की सजा होगी माफ? राहत की उम्मीदों को झटका; पीड़ित परिवार ने मांगा किसास

बीबीसी अरबी से बातचीत में महदी के भाई अब्दुलफत्ताह महदी ने कहा, “हम सुलह की किसी भी कोशिश को नहीं मानते. हम केवल ‘क़िसास’ यानी हत्या के बदले हत्या चाहते हैं.”

निमिषा प्रिया की फांसी की सजा होगी माफ? राहत की उम्मीदों को झटका; पीड़ित परिवार ने मांगा किसास
Nimisha Priya | X

केरल की नर्स निमिषा प्रिया को यमन की अदालत ने 2020 में एक यमनी नागरिक तालाल अब्दो महदी की हत्या के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी. यह मामला 2017 का है, जब दोनों एक व्यावसायिक साझेदारी में थे और आपसी विवाद के बाद निमिषा ने कथित तौर पर महदी की हत्या कर दी. उसे 16 जुलाई 2025 को फांसी दी जानी थी, लेकिन आखिरी वक्त में फांसी अस्थायी रूप से टाल दी गई.

हालांकि फांसी को टालने की खबर ने भारत में एक राहत की लहर फैलाई, लेकिन अब महदी के परिवार ने 'ईश्वर का न्याय - किसास' की मांग कर मामले को फिर गंभीर बना दिया है. बीबीसी अरबी से बातचीत में महदी के भाई अब्दुलफत्ताह महदी ने कहा, “हम सुलह की किसी भी कोशिश को नहीं मानते. हम केवल ‘क़िसास’ यानी हत्या के बदले हत्या चाहते हैं.”

क्या होता है 'किसास'?

इस्लामिक शरीया कानून के तहत 'किसास' का अर्थ होता है "जैसे को तैसा". यानी अगर कोई हत्या करता है, तो उसे भी उसी तरह सज़ा मिलनी चाहिए — मौत के बदले मौत. यह शरीया का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसे 'ईश्वर का न्याय' (God’s Law) माना जाता है.

हालांकि इस कानून में 'दिया' यानी खूनबहा (Blood Money) की भी व्यवस्था है — जिसमें पीड़ित का परिवार अपराधी को क्षमा कर सकता है, अगर उचित आर्थिक मुआवज़ा दिया जाए.

क्या ब्लड मनी से बच सकती हैं निमिषा?

नहीं. निमिषा प्रिया के परिजनों ने पीड़ित परिवार को ' ब्लड मनी' के तहत मुआवजा देने की पेशकश की थी, लेकिन महदी के परिवार ने यह पेशकश ठुकरा दी. उनका कहना है कि यह केवल एक 'निर्दयी अपराध' नहीं था, बल्कि लंबी कानूनी प्रक्रिया ने भी उन्हें मानसिक रूप से बहुत कष्ट पहुंचाया.

अब निमिषा के पास क्या विकल्प बचे हैं?

फिलहाल फांसी को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है, जो कि एक सकारात्मक संकेत हो सकता है. भारत के ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने यमन के मौलवियों से संपर्क कर मध्यस्थता की है, लेकिन पीड़ित परिवार अब भी अडिग है. यदि भविष्य में महदी का परिवार मन बदलता है और ' ब्लड मनी' स्वीकार करता है, तो निमिषा की जान बच सकती है.

इस समय निमिषा प्रिया की जिंदगी एक कठिन मोड़ पर खड़ी है. एक तरफ 'किसास' का कठोर कानून है, तो दूसरी ओर भारत और यमन के धार्मिक और कूटनीतिक प्रयास. अगर महदी का परिवार अपना रुख नरम करता है, तो शायद निमिषा को माफ किया जा सकता है, वरना उनकी फांसी की तलवार अब भी लटकी हुई है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 16, 2025 04:48 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).