देशव्यापी केमिस्ट हड़ताल: 20 मई को बंद रहेंगी देश की 8 लाख दवा दुकानें, जानें क्या है वजह और क्या मिलेंगी इमरजेंसी सेवाएं

ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवा प्लेटफॉर्म्स के अनियंत्रित विस्तार के विरोध में 20 मई को भारत भर के करीब 8 लाख मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे. ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने इस देशव्यापी बंद का आह्वान किया है, हालांकि इस दौरान अस्पताल के पास की दुकानें और आपातकालीन सेवाएं खुली रहेंगी.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली, 18 मई: यदि आप आगामी 20 मई को अपने नजदीकी मेडिकल स्टोर (Medical Store) से दवाइयां (Medicines) खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपको दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. ऑनलाइन दवा प्लेटफॉर्म्स और ई-फार्मेसी (Online Medicine Platforms and E-Pharmacies) के अनियंत्रित विकास के विरोध में उस दिन देश भर की लगभग 7 से 8 लाख दवा दुकानें (फार्मेसी) बंद रहने की संभावना है. दवा विक्रेताओं के संगठनों ने इस दिन देशव्यापी 'बंद' (Nationwide 'Shutdown') (शटडाउन) का आह्वान किया है. हालांकि, मरीजों की सहूलियत के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं इस हड़ताल के दायरे से बाहर रहेंगी. यह भी पढ़ें: Bank Strike: देशभर में 27 जनवरी से लगातार 4 दिन बंद रहेंगे बैंक; जानें क्या हैं कर्मचारियों की मांगें

इतिहास की सबसे बड़ी समन्वित हड़तालों में से एक

लगभग 12.5 लाख सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन 'ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स' (AIOCD) ने इस देशव्यापी बंद की घोषणा की है. इस आंदोलन को 'रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन केमिस्ट एलायंस' (RDCA) दिल्ली ने भी अपना पूरा समर्थन दिया है. इसके चलते यह भारत के खुदरा दवा क्षेत्र (Retail Pharmacy Sector) के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी समन्वित हड़तालों में से एक बनने जा रही है.

मुख्य विवाद: महामारी के दौर का अस्थायी नियम

दवा विक्रेताओं के इस विरोध के केंद्र में नीतिगत (Policy) खामियां हैं, जो कोविड-19 महामारी के समय से बनी हुई हैं. केमिस्ट संगठनों का तर्क है कि स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान ऑनलाइन दवा बेचने वाले प्लेटफॉर्म्स को अस्थायी रूप से संचालन की अनुमति दी गई थी. महामारी खत्म होने के बाद भी इस अनुमति को कभी भी औपचारिक रूप से समाप्त नहीं किया गया, जिससे ई-फार्मेसियों को बिना किसी कड़े नियमन (Adequate Regulation) के अपना कारोबार जारी रखने की छूट मिल गई.

RDCA दिल्ली के अध्यक्ष संदीप नांगिया ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा, 'खुदरा दवा विक्रेता समुदाय कोई टकराव नहीं चाहता, बल्कि एक बेहद असमान व्यावसायिक माहौल में अपने अस्तित्व की लड़ाई (Survival) लड़ रहा है.'

सुरक्षा और व्यापारिक अस्तित्व का संकट

पारंपरिक दवा विक्रेताओं का आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी डिस्काउंट और तेजी से होम डिलीवरी की पेशकश कर रहे हैं, जिससे छोटे मेडिकल स्टोर मालिकों के लिए बाजार में टिके रहना असंभव हो गया है. इसके अलावा, संगठनों ने सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं उठाई हैं. उनका कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना उचित निगरानी, पंजीकृत फार्मासिस्ट की देखरेख या वैध डॉक्टर के पर्चे (Prescription) के दवाइयां बेची जा रही हैं.

संदीप नांगिया ने जोर देकर कहा, 'दवा कोई सामान्य डिलीवरी आइटम नहीं है, यह स्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर जिम्मेदारी है. दवाओं का वितरण केवल उचित कानूनी व्यवस्था, पंजीकृत फार्मासिस्ट की देखरेख और वैध पर्चे के आधार पर ही होना चाहिए.' यह भी पढ़ें: Gig Workers Strike Today: पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ यूनियन का आज 5 घंटे देशव्यापी हड़ताल का ऐलान, जानें उनकी प्रमुख मांगें

आर्थिक मंदी की कगार पर छोटे केमिस्ट

बढ़ते किराये, बिजली के बिल, कर्मचारियों के वेतन और कानूनी अनुपालन (Compliance) की बढ़ती लागत ने छोटे फार्मेसी मालिकों के मुनाफे को बेहद कम कर दिया है, विशेष रूप से स्थानीय बाजारों और छोटे शहरों में. कई दुकानदारों का कहना है कि वे बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं.

इसके बावजूद, भारतीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में पड़ोस के ये केमिस्ट बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. नांगिया के अनुसार, स्वतंत्र फार्मेसियां आज भी देश के हर कस्बे, हर आपातकालीन स्थिति और हर मरीज की पहली जरूरत हैं और वे करोड़ों लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचने का प्राथमिक जरिया हैं.

इमरजेंसी सेवाएं रहेंगी बहाल

हड़ताल के दौरान आम जनता को होने वाली भारी असुविधा को रोकने के लिए व्यापारिक संगठनों ने आवश्यक कदम उठाए हैं. अस्पतालों के अंदर और उनके ठीक आसपास स्थित मेडिकल स्टोर 20 मई को खुले रहेंगे, ताकि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को जीवन रक्षक दवाएं मिलने में कोई रुकावट न आए.

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