Nashik Shocker: नाशिक में स्वास्थ्य शिविर में वैक्सीन लगने के कुछ ही मिनट बाद 17 वर्षीय छात्रा की मौत; परिजनों का आरोप, उच्च स्तरीय जांच के आदेश
महाराष्ट्र के नाशिक शहर में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां नाशिक महानगरपालिका द्वारा आयोजित एक नियमित स्वास्थ्य शिविर में टिटनेस-डिप्थीरिया का टीका लगवाने के कुछ ही मिनटों बाद 17 वर्षीय छात्रा श्रावणी अनिल पाटील की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है.
नाशिक: महाराष्ट्र (Maharashtra) के नाशिक शहर से एक बेहद दुखद और हैरान करने वाली घटना सामने आई है. यहां सिडको (CIDCO) के खुटवडनगर इलाके में महानगरपालिका द्वारा आयोजित एक नियमित स्वास्थ्य और टीकाकरण शिविर में टीका लगवाने के महज कुछ ही मिनटों बाद 17 वर्षीय एक छात्रा की अचानक मौत हो गई. मृतका की पहचान श्रावणी अनिल पाटील के रूप में हुई है. छात्रा के पिता ने आरोप लगाया है कि यह आकस्मिक मौत टीकाकरण के रिएक्शन के कारण हुई है. इस घटना के बाद स्थानीय इलाके में भारी तनाव फैल गया, जिसके बाद नाशिक महानगरपालिका (NMC) ने इस पूरे मामले की व्यापक और उच्च स्तरीय चिकित्सा जांच (Comprehensive Inquiry) के आदेश दिए हैं. यह भी पढ़ें: NEET UG 2026: महाराष्ट्र में नीट अभ्यर्थी ने कुएं में कूदकर की खुदकुशी, कदम उठाने से पहले मां के लिए रिकॉर्ड किया भावुक वीडियो
टीका लगवाने के बाद रास्ते पर ही आ गई चक्कर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नाशिक महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग की ओर से खुटवडनगर के संकटमोचन हनुमान मंदिर परिसर में एक नियमित टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा था, जहां मुख्य रूप से टिटनेस और डिप्थीरिया (धनुर्वात और घटसर्प) रोधी टीके दिए जा रहे थे। 17 वर्षीय श्रावणी पाटील अपने पिता के साथ इस शिविर में टीका लगवाने आई थी.
शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीका लगवाने के बाद जैसे ही श्रावणी अपने पिता के साथ केंद्र से बाहर निकली और पास के ही एक मेडिकल स्टोर की तरफ बढ़ने लगी, उसे अचानक तेज चक्कर आ गया. वह सड़क पर ही अचेत होकर गिर पड़ी, जिससे उसके सिर में भी चोट आई. कुछ चश्मदीदों के अनुसार, गिरने के बाद उसके नाक से खून भी बहने लगा था.
अस्पताल पहुंचने से पहले ही तोड़ दिया दम
बेहद गंभीर स्थिति में श्रावणी के पिता और स्थानीय नागरिकों ने उसे तुरंत इलाज के लिए नाशिक जिला सरकारी अस्पताल (Nashik District Government Hospital) पहुंचाया. हालांकि, वहां तैनात मुख्य चिकित्सा अधिकारियों ने गहन परीक्षण के बाद उसे दाखिल करने से पहले ही मृत घोषित (Dead on Arrival) कर दिया.
इस दुखद खबर के फैलते ही अस्पताल परिसर और खुटवडनगर इलाके में मृतक के परिजनों और नागरिकों की भारी भीड़ जमा हो गई. आक्रोशित परिजनों ने तत्काल जवाबदेही तय करने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर हंगामा किया. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. स्थानीय पुलिस ने फिलहाल आकस्मिक मृत्यु (Accidental Death Report) का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
मेडिकल पैनल करेगा 'AEFI' के तहत जांच
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नाशिक महानगरपालिका के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया, "हमने इस पूरी घटना की सघन और विस्तृत जांच शुरू कर दी है. मौत के वास्तविक और सटीक कारणों का पता पोस्टमार्टम (Post-Mortem) और फॉरेंसिक विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा. डॉक्टरों का एक विशेष पैनल इस मामले की हर कोण से समीक्षा कर रहा है."
विशेषज्ञों की यह टीम मुख्य रूप से 'टीकाकरण के बाद होने वाले प्रतिकूल प्रभाव' यानी AEFI (Adverse Events Following Immunization) के मानकों के तहत जांच करेगी. इसके तहत उस समय इस्तेमाल किए गए वैक्सीन के विशेष बैच, उसके कोल्ड-चेन स्टोरेज (रखरखाव के तापमान), दवा की एक्सपायरी डेट और मृतका के पिछले मेडिकल इतिहास की बारीकी से पड़ताल की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय जनता से अपील की है कि वे जब तक अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक धैर्य बनाए रखें और नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों को लेकर सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की भ्रामक अफवाहों को बढ़ावा न दें.