Nalasopara Gangrape: नालासोपारा में 14 वर्षीय नाबालिग से गैंगरेप, मामले में पुलिस ने दो किशोर को हिरासत में लिया

महाराष्ट्र के पालघर जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है. नालासोपारा इलाके में 14 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म करने और वीडियो वायरल करने के आरोप में दो 17 वर्षीय किशोरों को हिरासत में लिया गया है

Nalasopara Gangrape:  महाराष्ट्र के पालघर जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है. नालासोपारा इलाके में 14 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म करने और वीडियो वायरल करने के आरोप में दो 17 वर्षीय किशोरों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने इंस्टाग्राम के जरिए पीड़िता से संपर्क साधा था और साजिश के तहत इस वारदात को अंजाम दिया.

झांसा देकर बुलाया और बनाया ब्लैकमेलिंग का वीडियो

घटना पिछले महीने की है. पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, 11 जुलाई को एक आरोपी ने पीड़िता को जरूरी काम का बहाना बनाकर मिलने बुलाया. पीड़िता जब बताई गई जगह पहुंची, तो आरोपी उसे एक चाल के कमरे में ले गया जहां दूसरा आरोपी पहले से मौजूद था. दोनों ने मिलकर नाबालिग के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया और इस कृत्य का वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया.

वीडियो वायरल करने और भाई को मारने की दी धमकी

वारदात के बाद आरोपियों ने पीड़िता को धमकी दी कि यदि उसने किसी को कुछ बताया, तो वीडियो इंटरनेट पर साझा कर दिया जाएगा और उसके भाई की हत्या कर दी जाएगी. डर के कारण पीड़िता कुछ समय तक शांत रही. हालांकि, बाद में आरोपियों ने वह आपत्तिजनक वीडियो पीड़िता के मामा को भेज दिया. वीडियो मिलने पर परिजनों ने पीड़िता से पूछताछ की, जिसके बाद पूरी घटना का खुलासा हुआ.

विभिन्न संगीन धाराओं में मामला दर्ज

परिजनों के सहयोग से पीड़िता ने थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70(2), 65(1), 351(2), और 351(3), सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66(E) और पॉक्सो (POCSO) कानून की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर दोनों किशोरों को हिरासत में ले लिया है.

पालघर में एक और घटना, पुलिस पर ढिलाई का आरोप

एक अन्य अलग घटना में, पालघर के एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने वाली 10 वर्षीय छात्रा ने अपने 50 वर्षीय रिश्तेदार पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. पीड़िता के माता-पिता का आरोप है कि बार-बार प्रयास करने के बावजूद स्थानीय पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की और उल्टा परिवार को डराने का प्रयास किया.

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