नई दिल्ली: देश की तेजी से उभरती ई-कॉमर्स कंपनी Meesho ने IPO से पहले अपना रजिस्ट्रेशन भारत में ट्रांसफर कर लिया है. पहले यह कंपनी अमेरिका में रजिस्टर्ड थी, लेकिन अब उसने "रिवर्स फ्लिप" प्रक्रिया पूरी कर ली है और पूरी तरह से भारतीय कंपनी बन गई है. यह जानकारी कंपनी द्वारा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के पास फाइल किए गए दस्तावेजों से सामने आई है. आज जब कई स्टार्टअप्स अब भी विदेशी पंजीकरण के तहत चल रहे हैं, Meesho का भारत लौट आना एक सकारात्मक संकेत है. इससे कंपनी को भारतीय निवेशकों का भरोसा मिलेगा. IPO में स्थानीय भागीदारी बढ़ेगी. भारत के डिजिटल ईकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी.
पहले अमेरिका में क्यों थी Meesho?
Meesho को Y Combinator से फंडिंग मिली थी, और जैसे कई अन्य स्टार्टअप्स (जैसे Groww और Razorpay), Meesho ने भी शुरुआती दौर में ग्लोबल इनवेस्टमेंट आसानी से हासिल करने के लिए अमेरिका में रजिस्ट्रेशन कराया था. लेकिन अब जब Meesho भारतीय शेयर बाजार में लिस्टिंग की तैयारी कर रही है, तो उसने भारत में रजिस्ट्रेशन करवा लिया है. कंपनी ने जनवरी 2025 में NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) में रिवर्स मर्जर की मंजूरी के लिए आवेदन दिया था, जिसे अब मंजूरी मिल चुकी है.
IPO की तैयारी में Meesho
अब जब कंपनी पूरी तरह से भारतीय बन चुकी है, Meesho अगले 2-3 हफ्तों में अपना IPO दाखिल कर सकती है. इससे पहले ही निवेशकों का ध्यान Meesho की तेज ग्रोथ पर है.
ऑर्डर और यूजर ग्रोथ के आंकड़े
Meesho ने मार्च 2025 में अपनी रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि एप्रिल से दिसंबर 2024 के बीच ऑर्डर में 34 फीसदी की सालाना वृद्धि हुई. इस अवधि में कंपनी ने 1.3 बिलियन ऑर्डर दर्ज किए, जो कि पिछले पूरे साल के बराबर है. 187 मिलियन यूनिक ट्रांजैक्टिंग यूज़र थे, जो कि पिछले साल से 26 फीसदी अधिक है.
GMV में भी जबरदस्त प्रदर्शन
CLSA की रिपोर्ट के मुताबिक Meesho का GMV रन रेट 6.2 बिलियन डॉलर पर पहुंच चुका है. रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले 6 सालों में इसका CAGR यानी सालाना ग्रोथ रेट 26 फीसदी रहने का अनुमान है. ऑर्डर वॉल्यूम के हिसाब से Meesho की मार्केट शेयर 37 फीसदी है. लेकिन GMV के आधार पर यह शेयर करीब 8.5 फीसदी है, यानी कम कीमत के ज्यादा प्रोडक्ट्स बिक रहे हैं.













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