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'मालेगांव ब्लास्ट केस में ATS ने योगी आदित्यनाथ का नाम लेने के लिए मजबूर किया', गवाह का बड़ा दावा

मालेगांव ब्लास्ट केस के एक गवाह ने ATS पर सीएम योगी आदित्यनाथ का नाम लेने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है. अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. एक पूर्व अधिकारी ने भी RSS प्रमुख को फंसाने की साजिश का दावा किया, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.

'मालेगांव ब्लास्ट केस में ATS ने योगी आदित्यनाथ का नाम लेने के लिए मजबूर किया', गवाह का बड़ा दावा
(Photo Credits ANI)

2008 के मालेगांव बम धमाके मामले में एक गवाह ने अदालत में सनसनीखेज दावा किया है. गवाह, जो बाद में अपने बयान से पलट गया, ने कहा कि उस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े चार अन्य लोगों का नाम लेने के लिए दबाव बनाया गया था.

गवाह ने अदालत में क्या कहा?

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की स्पेशल कोर्ट को गवाह मिलिंद जोशी राव ने बताया कि महाराष्ट्र की एंटी-टेरर स्क्वॉड (ATS) ने उन्हें परेशान किया था. ATS चाहती थी कि वह इस केस में योगी आदित्यनाथ, RSS सदस्य इंद्रेश कुमार, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, स्वामी असीमानंद और प्रोफेसर देवधर का नाम झूठा फंसा दें.

राव ने यह भी आरोप लगाया कि ATS ने उन्हें एक हफ्ते तक गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा. उनसे कहा गया कि अगर वह इन पांच लोगों का नाम लेंगे, तभी उन्हें रिहा किया जाएगा.

क्या था मालेगांव ब्लास्ट मामला?

29 सितंबर, 2008 को मुंबई से करीब 300 किलोमीटर दूर मालेगांव के एक व्यस्त बाजार में एक मोटरसाइकिल में लगे बम से धमाका हुआ था. इस धमाके में छह लोगों की जान चली गई थी. पहले इस मामले की जांच महाराष्ट्र ATS कर रही थी, लेकिन बाद में इसे देश की सबसे बड़ी एंटी-टेरर एजेंसी NIA को सौंप दिया गया.

हाल ही में, अदालत ने साध्वी प्रज्ञा समेत सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया. कोर्ट का कहना था कि आरोपियों के खिलाफ "कोई भरोसेमंद और पुख्ता सबूत" नहीं मिले.

एक पूर्व अधिकारी का भी बड़ा आरोप

शुक्रवार को, मामले की जांच करने वाले एक पूर्व अधिकारी ने भी चौंकाने वाला दावा किया. ATS टीम का हिस्सा रहे महबूब मुजावर ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का आदेश था. उन्होंने कहा कि जांच को "गलत दिशा" में ले जाने की कोशिश की गई और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन पर झूठे केस दर्ज कर दिए गए.

मुजावर ने कहा, "इसे भगवा आतंकवाद का केस दिखाने के लिए मोहन भागवत को इसमें शामिल किया जाना था."

हालांकि, NIA कोर्ट ने इन दावों को खारिज कर दिया है.

कोर्ट ने क्या पाया?

स्पेशल कोर्ट ने माना कि बम धमाका तो हुआ था, लेकिन अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि बम उसी मोटरसाइकिल पर लगाया गया था जो आरोपियों से जुड़ी थी. इस मामले में कुल 323 गवाह पेश किए गए, जिनमें से 37 अपने बयान से पलट गए.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 02, 2025 10:10 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).