Kerala Shigella Outbreak: केरल में 'शिगेला' बैक्टीरिया का कोहराम; मासूम बच्चे की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया हाई अलर्ट
केरल में शिगेला बैक्टीरियल इन्फेक्शन के मामलों में अचानक आई तेजी के बाद राज्य सरकार ने युद्ध स्तर पर नियंत्रण उपाय शुरू कर दिए हैं. कोझिकोड में एक चार वर्षीय बच्चे की मौत के बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने हाई अलर्ट जारी किया है. स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन के अनुसार, संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए रैपिड रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है, और राज्य भर के जल स्रोतों व खाद्य प्रतिष्ठानों की सघन जांच के आदेश दिए गए हैं.
तिरुवनंतपुरम, 9 जून: केरल (Kerala) में शिगेला (Shigella) बैक्टीरियल इन्फेक्शन (Bacterial Infection) के मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज किए जाने के बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा पब्लिक हेल्थ अलर्ट (Public Health Alert) जारी किया है. सरकार ने संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए युद्ध स्तर पर निवारक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. यह प्रशासनिक मुस्तैदी कोझिकोड (Kozhikode) जिले में एक चार वर्षीय मासूम बच्चे की शिगेला संक्रमण के कारण हुई दुखद मौत के बाद देखने को मिली है, जो इस हालिया आउटब्रेक में राज्य की पहली मौत है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने घोषणा की है कि सरकार ने रैपिड रिस्पांस टीमों (Rapid Response Teams) को सक्रिय कर दिया है, व्यापक स्वच्छता अभियान शुरू किए हैं, और पानी के स्रोतों तथा होटलों की तत्काल विधिक जांच के कड़े निर्देश दिए हैं. यह भी पढ़ें: Ebola Cases in India: बेंगलुरु में इबोला का अलर्ट टला, युगांडा से आई महिला की टेस्ट रिपोर्ट आई नेगेटिव; देश में अब तक कोई मामला नहीं
क्या है शिगेलोसिस? कैसे फैलता है यह घातक संक्रमण?
चिकित्सकीय भाषा में इस बीमारी को शिगेलोसिस (Shigellosis) कहा जाता है. यह एक अत्यधिक संक्रामक आंतों का रोग है, जो 'शिगेला' नामक बैक्टीरिया के समूह के कारण फैलता है. यह मुख्य रूप से मानव के पाचन तंत्र (Digestive Tract) पर हमला करता है और उसमें गंभीर सूजन पैदा कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप 'बैसिलरी पेचिश' (Bacillary Dysentery) यानी खूनी दस्त की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है. यह संक्रमण अपनी तीव्र प्रसार क्षमता के लिए जाना जाता है; इस बैक्टीरिया की बेहद मामूली मात्रा के संपर्क में आना भी किसी स्वस्थ व्यक्ति को गंभीर रूप से बीमार करने के लिए पर्याप्त है.
यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से 'फेकल-ओरल' (मल-मुंह) मार्ग के जरिए फैलता है, जो अक्सर निम्नलिखित कारणों से होता है:
- दूषित पेयजल या बिना उबले/अस्वच्छ पेय पदार्थों का सेवन करना.
- अस्वच्छ पानी से धोए गए कच्चे फल-सब्जियां या अधपका भोजन खाना.
- खराब हैंड हाइजीन (हाथ न धोना) के कारण संक्रमित सतहों को छूना या किसी संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आना.
शिगेला इन्फेक्शन के मुख्य लक्षण और उच्च जोखिम वाले समूह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस बैक्टीरिया के संपर्क में आने के एक से तीन दिनों के भीतर मरीज में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. इसके सामान्य लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, पेट में मरोड़ और असहनीय दर्द, जी मिचलाना, उल्टी होना और गंभीर दस्त शामिल हैं, जिसमें बलगम या खून भी आ सकता है.
यद्यपि स्वस्थ वयस्कों में यह बीमारी अक्सर खुद ब खुद सीमित (Self-limiting) होती है और वे एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं, लेकिन पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunocompromised) वाले व्यक्तियों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकती है. इन उच्च जोखिम वाले समूहों में, शरीर से तरल पदार्थों के तेजी से बाहर निकलने के कारण गंभीर डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) हो जाता है, जो समय पर इलाज न मिलने पर अंगों के फेल होने (Organ Dysfunction) का कारण बन सकता है.
फूड सेफ्टी ड्राइव तेज; दूषित बर्फ के इस्तेमाल पर शून्य-सहनशीलता
महामारी के रूप में उभरते इस खतरे को देखते हुए, केरल सरकार ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (Food Safety Officials) को रेस्तरां, होटलों और सड़क किनारे लगने वाले खान-पान के स्टालों (थट्टुकाडा) पर औचक व कड़े निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं. स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन ने स्पष्ट किया है कि अस्वच्छ परिस्थितियों में काम करने वाले किसी भी व्यावसायिक खाद्य प्रतिष्ठान को तुरंत बंद करने का विधिक नोटिस दिया जाएगा.
स्वास्थ्य विभाग ने उन गंभीर रिपोर्टों पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिनमें खुलासा हुआ है कि मछलियों को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होने वाली औद्योगिक बर्फ (Industrial Ice) का उपयोग कुछ होटलों द्वारा पेय पदार्थों और खाद्य पदार्थों में धड़ल्ले से किया जा रहा था. स्थानीय स्वशासन संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी शेफ और फूड हैंडलर्स की निगरानी करें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके पास वैध मेडिकल सर्टिफिकेट हैं और उनमें संक्रमण के कोई लक्षण नहीं हैं, क्योंकि भोजन बनाने वाले व्यक्ति का संक्रमित होना स्थानीय स्तर पर इस बीमारी को सुपर-स्प्रेडर बना सकता है.
इन चार जिलों में सबसे ज्यादा निगरानी; स्कूलों में विशेष अलर्ट
भले ही इसके छिटपुट मामले पूरे राज्य में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की विशेष निगरानी मुख्य रूप से कोझिकोड, वायनाड, अलापुझा और पथनमथिट्टा जिलों पर केंद्रित है, जहाँ पिछले कुछ हफ्तों के दौरान दर्जनों पुष्ट और संभावित मामले सामने आए हैं.
वायनाड में, सार्वजनिक स्वास्थ्य अतिरिक्त निदेशक के नेतृत्व में चिकित्सा टीमों को तैनात किया गया है. सुलतान बाथरी के शैक्षणिक संस्थानों में १६० से अधिक छात्रों द्वारा पेट दर्द और उल्टी की शिकायत किए जाने के बाद, अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर कुओं और बोरवेल के पानी की जांच शुरू कर दी है. हालांकि प्रारंभिक रिपोर्टों से पता चलता है कि वे विशिष्ट मामले सीधे शिगेला से जुड़े नहीं हो सकते हैं, लेकिन वायनाड के एक अलग स्कूल में दो छात्रों के आधिकारिक तौर पर पॉजिटिव पाए जाने के बाद जमीनी स्तर की टीमें हाई अलर्ट पर हैं.
पेयजल का क्लोरीनीकरण और अस्पतालों की तैयारी
संक्रमण के मुख्य वाहक यानी पानी को सुरक्षित बनाने के लिए, सरकार ने सार्वजनिक जल स्रोतों, कुओं और ट्यूबवेलों के नियमित और सख्त क्लोरीनीकरण (Chlorination Protocols) को प्राथमिकता दी है. सरकार ने साफ किया है कि उपचारित पानी के स्वाद या गंध में बदलाव को लेकर जनता की शिकायतों के बावजूद क्लोरीनीकरण की प्रक्रिया को रोका नहीं जाएगा.
इसके साथ ही, सभी सरकारी अस्पतालों को अपने यहाँ आइसोलेशन वार्डों की तैयारी सुनिश्चित करने, समर्पित बेड आवंटित करने और ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) व आवश्यक एंटीबायोटिक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने का निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके.