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WhatsApp Chat Dismissal: प्राइवेट व्हाट्सएप ग्रुप की बातचीत को नहीं मान सकते 'सार्वजनिक आलोचना'; हिमाचल हाईकोर्ट ने रद्द किया एचआरटीसी कंडक्टर का निष्कासन

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के अभिव्यक्ति के अधिकार और निजता को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने हिमाचल पथ परिवहन निगम के एक अनुबंधित कंडक्टर की सेवा समाप्ति के आदेश को पूरी तरह खारिज करते हुए उसे बहाल करने का निर्देश दिया है. कंडक्टर को सहकर्मियों के एक निजी व्हाट्सएप ग्रुप में निगम के नए नियमों पर चर्चा करते हुए दो संदेश पोस्ट करने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था.

WhatsApp Chat Dismissal: प्राइवेट व्हाट्सएप ग्रुप की बातचीत को नहीं मान सकते 'सार्वजनिक आलोचना'; हिमाचल हाईकोर्ट ने रद्द किया एचआरटीसी कंडक्टर का निष्कासन
Private WhatsApp Messages Cannot Be Treated as Public Criticism (File Image)

शिमला: डिजिटल युग में सोशल मीडिया दिशानिर्देशों और कर्मचारियों के व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के अधिकार के बीच हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बेहद स्पष्ट और अहम कानूनी लकीर खींच दी है। रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) द्वारा अपने एक अनुबंध आधारित कंडक्टर को नौकरी से निकालने के आदेश को रद्द कर दिया है.

कर्मचारी पर आरोप था कि उसने कंडक्टरों के एक निजी व्हाट्सएप ग्रुप में नए नियमों के संभावित नफा-नुकसान पर दो संदेश पोस्ट किए थे. अदालत ने 10 अक्टूबर 2023 के निष्कासन आदेश को अवैध ठहराते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को निरंतर सेवा में माना जाए और उसे कानून के अनुसार सभी परिणामी सेवा लाभ (Consequential Benefits) प्रदान किए जाएं.

दो व्हाट्सएप संदेशों के कारण गंवाई थी नौकरी

रिपोर्केट के अनुसार, मामला वर्ष 2021 में अनुबंध के आधार पर नियुक्त हुए कंडक्टर सुनील कुमार से जुड़ा है:

  • ग्रुप में संदेश: सितंबर 2023 में एचआरटीसी कंडक्टरों ने आपस में बातचीत के लिए 'हिमाचल परिचालक एकता' नाम से एक अनौपचारिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था.
  • 4 सितंबर 2023 को सुनील कुमार ने ग्रुप में दो संदेश साझा किए, जिनमें निगम के नए नियमों के वित्तीय प्रभाव की समीक्षा करने और पुराने व नए राजस्व की तुलना से संबंधित सामान्य विचार व्यक्त किए गए थे.
  • बर्खास्तगी की कार्रवाई: एचआरटीसी प्रबंधन ने इसे सोशल मीडिया आचार संहिता और अनुबंध की शर्तों का घोर उल्लंघन मानते हुए पहले कारण बताओ नोटिस थमाया और बाद में 10 अक्टूबर 2023 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं.

निजी व्हाट्सएप ग्रुप और खुले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में अंतर

न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ ने फैसले में निजी मैसेजिंग ग्रुप और सार्वजनिक सोशल मीडिया के बीच अंतर को रेखांकित किया:

  • गोपनीयता का दायरा: अदालत ने स्पष्ट किया कि व्हाट्सएप एक एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड संचार माध्यम है। किसी निजी समूह में की गई बातचीत केवल उसके सदस्यों तक ही सीमित रहती है और वह सामान्य जनता के लिए सुलभ नहीं होती.
  • प्रबंधन को पसंद न आना अपराध नहीं: पीठ ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी का विचार नियोक्ता (प्रबंधन) को रास नहीं आता, तो केवल इस आधार पर उसे सेवा से नहीं हटाया जा सकता.
  • अदालत ने पाया कि निगम ने संदेशों के संदर्भ और सार की उचित समीक्षा नहीं की थी और न ही यह साबित किया जा सका कि वे नियम विरुद्ध आलोचना के दायरे में आते हैं.

कर्मचारियों को है शिकायतें साझा करने का अधिकार ('Right to Vent')

फैसले में अदालत ने कार्यस्थल पर कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:

  • अदालत ने कहा कि किसी भी संगठन में काम करने वाले कर्मचारियों के मन में प्रबंधन के फैसलों को लेकर असंतोष या शिकायतें होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है.
  • कर्मचारियों को अपनी असहमति या चिंताएं व्यक्त करने की अनुमति देना संगठन के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि यह एक सुधारात्मक और राहतकारी (कैथार्टिक) प्रभाव डालता है.
  • पीठ ने रेखांकित किया कि जब तक किसी कर्मचारी के बयान से संस्थान की सार्वजनिक प्रतिष्ठा को सीधा और वास्तविक नुकसान न पहुंचे, तब तक प्रबंधन को आंतरिक संवाद में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

अनुशासनात्मक प्रक्रिया में मिलीं गंभीर खामियां

हाईकोर्ट ने एचआरटीसी द्वारा अपनाई गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी कड़ा रुख अपनाया:

  • अदालत ने पाया कि एचआरटीसी ने कारण बताओ नोटिस जारी करते समय ही यह तय कर लिया था कि याचिकाकर्ता "सेवा में बने रहने के योग्य नहीं है".
  • पीठ ने कहा कि जवाब आने से पहले ही निष्कर्ष निकाल लेना यह साबित करता है कि बाद में की गई सुनवाई केवल एक "खोखली औपचारिकता" (Empty formality) थी.

इस यांत्रिक और पूर्व-निर्धारित प्रक्रिया को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कंडक्टर की तत्काल बहाली का मार्ग प्रशस्त कर दिया. यह निर्णय उन सभी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी नजीर माना जा रहा है, जिन्हें अक्सर आंतरिक मैसेजिंग ग्रुपों में की गई बातचीत के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर दिखाया जाता है.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 23, 2026 01:46 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).