Karnataka School Time Change: कर्नाटक सरकार का सराहनीय कदम, रमजान के महीने में उर्दू स्कूलों का समय बदला, अब सुबह 8 से दोपहर 12:45 बजे तक चलेंगी क्लासें
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 Karnataka School Time Change: कर्नाटक सरकार ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए रमजान के पवित्र महीने को देखते हुए राज्य के उर्दू और अन्य अल्पसंख्यक भाषा के स्कूलों के समय में अस्थायी बदलाव की घोषणा की है. सोमवार को जारी निर्देश के अनुसार, अब ये स्कूल सुबह 10:00 बजे के बजाय सुबह 8:00 बजे खुलेंगे और दोपहर 12:45 बजे बंद हो जाएंगे. यह आदेश सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त सभी उर्दू माध्यम के स्कूलों पर लागू होगा.

नई समय सारणी और अवधि

उर्दू और अन्य अल्पसंख्यक भाषा स्कूलों के निदेशालय द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, समय में यह बदलाव रमजान के शुरू होने की तारीख (संभावित 17 या 18 फरवरी) से लागू होगा और 20 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगा. इस दौरान छात्रों को सुबह 10:00 बजे से 10:15 बजे तक 15 मिनट का ब्रेक दिया जाएगा. यह भी पढ़े:  Shaban Moon Sighting 2026 in India: भारत में नहीं दिखा शाबान का चांद, पाक महिना 21 जनवरी से होगा शुरू

शिक्षा विभाग ने क्या कहा

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह एक पारंपरिक प्रशासनिक समायोजन है जो पिछले कई वर्षों से किया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य रमजान के दौरान रोजा रखने वाले छात्रों और शिक्षकों को सुविधा प्रदान करना है. विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि इस बदलाव के कारण पढ़ाई के घंटों में होने वाले नुकसान की भरपाई छुट्टियों या अन्य अतिरिक्त शैक्षणिक अवधियों के माध्यम से की जाएगी.

गैर-उर्दू स्कूलों के लिए निर्देश

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि जो छात्र या कर्मचारी गैर-उर्दू स्कूलों में पढ़ते या काम करते हैं और रोजा रख रहे हैं, उन्हें शाम को स्कूल खत्म होने के समय से आधा घंटा पहले घर जाने की अनुमति दी जा सकती है. हालांकि, यह रियायत उन कर्मचारियों पर लागू नहीं होगी जो वर्तमान में एसएसएलसी (SSLC) परीक्षा ड्यूटी पर तैनात हैं.

राजनीतिक प्रतिक्रिया

समय में इस बदलाव को लेकर राज्य में राजनीतिक चर्चा भी शुरू हो गई है. विपक्षी दल भाजपा ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है. भाजपा नेताओं ने सवाल किया है कि क्या इसी तरह की रियायतें अन्य प्रमुख त्योहारों जैसे नवरात्रि के दौरान भी दी जाएंगी. दूसरी ओर, सत्ताधारी कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे समावेशी शासन और पुरानी परंपरा का हिस्सा बताया है.