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झारखंड में दोस्तों ने पेश की मिसाल, साथी की मौत के बाद 40 दोस्तों ने उठाया परिवार का बीड़ा, गुजारे के लिए हर महीने देते हैं पैसे

दोस्ती का रिश्ता बेहद खूबसूरत होता है, जो भले ही खून का रिश्ता न हो, लेकिन यह हर जाति-धर्म से परे होता है. दोस्ती एक ऐसा रिश्ता होता है, जिसे बिना किसी शर्त के पूरे दिल से निभाया जा सकता है. यही वजह है जब एक दोस्त मुसीबत में होता है तो दूसरा दोस्त उसकी मदद करता है. कुछ ऐसा ही झारखंड में कुछ दोस्तों ने अपने एक साथी के लिए मिसाल पेश किया है.

झारखंड में दोस्तों ने पेश की मिसाल, साथी की मौत के बाद 40 दोस्तों ने उठाया परिवार का बीड़ा, गुजारे के लिए हर महीने देते हैं पैसे
प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credits Pixabay)

रांची: दोस्ती का रिश्ता बेहद खूबसूरत होता है, जो भले ही खून का रिश्ता न हो, लेकिन यह हर जाति-धर्म से परे होता है. जिसे बिना किसी शर्त के पूरे दिल से निभाया जा सकता है. यही वजह है जब एक दोस्त मुसीबत में होता है तो दूसरा दोस्त उसकी मदद के लिए आगे आ जाता है. ताकि उसके दोस्त की मुसीबत दूर हो सके. कुछ ऐसा ही झारखंड में कुछ दोस्तों ने अपने एक साथी के लिए मिसाल पेश किया है. जिसका हर कोई मिसाल देते हुए तारीफ कर रहा है.

बात कुछ इस तरह हैं. झारखंड के गोड्डा में रहने वाले वीरेंद्र कुमार (Virendra Kumar) की सड़क हादसे में मौत हो गई. दोस्त की मौत के बाद सभी दोस्त काफी दुखी हुए हैं. उन्होंने फैसला किया कि वे अपने दोस्त के परिवार की मदद करेंगे. फिर क्या था. वीरेंद्र के करीब चालीस दोस्तों ने करीब सात लाख रुपये जमा किये. इसके बाद वीरेंद्र के पास घर नहीं था. इस पैसों से उसका घर बनवाये. यह भी पढ़े: Friendship Day 2021 Greetings: दोस्तों संग मनाएं फ्रेंडशिप डे, शेयर करें ये प्यारे हिंदी Quotes, Facebook Messages, WhatsApp Wishes, GIF Images और वॉलपेपर्स

इसके साथ ही वीरेंद्र के घर में  खाने पीने के लिए दिक्कत ना हो सभी दोस्त मिलकर हर महीने मदद के लिए करीब 15 हजार रुपये भी पैसे भी भेजते हैं. वीरेंद्र कुमार के परिवार में उसकी बूढी मां, पत्नी, दो बच्चे हैं.

दरअसल पेशे से फाेटाेग्राफर वीरेंद्र की 22 दिसंबर 2019 को शहर के कारगिल चाैक पर एक्सीडेंट के बाद मौत हो गई थी. जिसके बाद वीरेंद्र के परिवार में दुख का पहाड़ टूट पड़ा था. वीरेंद्र की पत्नी और उसकी मां को चिंता सता रही थी कि आगे उनका और इन बच्चों का गुजारा कैसे होगा. लेकिन वीरेंद्र के बचपन के दोस्त इनके लिए देवदूत बनकर सामने आए हैं. जिनकी मदद से वीरेंद्र के परिवार में फिलहाल खाने पीने की दिक्कत नहीं हैं और घर अच्छे से चल रहा है. वीरेंद्र के बच्चे भी स्कूल जा रहे हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 01, 2021 10:13 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).