भारतीय शेयर बाजार, जो एक समय वैश्विक बाजारों में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वालों में शामिल था, 2025 की शुरुआत में कमजोर स्थिति में नजर आ रहा है. Nifty 50 इंडेक्स, जो भारत की शीर्ष 50 कंपनियों को ट्रैक करता है, इस साल अब तक अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में 6% गिर चुका है.
एशियाई बाजारों में तीसरा सबसे खराब प्रदर्शन
2025 में अब तक का यह नुकसान उभरते बाजारों में तीसरा सबसे बड़ा गिरावट वाला प्रदर्शन रहा है. Nifty से अधिक गिरावट केवल थाईलैंड और फिलीपींस के बेंचमार्क इंडेक्स में दर्ज की गई है.
- थाईलैंड का शेयर बाजार: लगभग 10% की गिरावट.
- फिलीपींस का PSEi इंडेक्स: 6.7% की गिरावट.
- इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट: 5.7% की गिरावट.
विदेशी निवेशकों का घटता भरोसा
भारतीय शेयरों में घटती रुचि का संकेत हाल ही में बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के एक सर्वेक्षण से मिला, जिसमें यह बताया गया कि भारतीय बाजार को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले फंड मैनेजरों की संख्या में गिरावट आई है. रिपोर्ट के अनुसार:
- जनवरी में जहां केवल 10% फंड मैनेजर भारतीय शेयरों को कम महत्व दे रहे थे, अब यह संख्या बढ़कर 19% हो गई है.
एशियाई बाजारों में हांगकांग और दक्षिण कोरिया का दबदबा
जबकि जापान आर्थिक और बाजार के उच्चतम रिकॉर्ड की वजह से शीर्ष स्थान पर बना हुआ है, वहीं ताइवान दूसरे स्थान पर है.
- हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स: 16.4% की बढ़त के साथ एशिया में सबसे बेहतर प्रदर्शन कर रहा है.
- दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स: 14% की वृद्धि.
- महंगे वैल्यूएशन के चलते विदेशी निवेशकों की बिकवाली
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, जबकि चीनी शेयर बाजार में 25% की उछाल के बावजूद शंघाई कंपोजिट इंडेक्स का एक साल आगे का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) अनुपात 12.3 गुना और कोस्पी का 9.3 गुना है, Nifty 50 अभी भी 18.7 गुना के साथ अधिक महंगा बना हुआ है.
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयरों की बिकवाली का सिलसिला अक्टूबर 2024 से शुरू किया था, जो अभी भी जारी है.
- शुक्रवार, 21 फरवरी 2025 को विदेशी निवेशकों ने $400 मिलियन के भारतीय शेयरों की बिक्री की.
- सितंबर 2024 के अंत से अब तक कुल $24 बिलियन के भारतीय शेयरों की बिकवाली की जा चुकी है.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कमजोर रुपये का प्रभाव
विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली की प्रमुख वजहों में उच्च वैल्यूएशन, धीमी आर्थिक वृद्धि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और भारतीय रुपये का कमजोर होना शामिल हैं.
- अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड: 4.4% के स्तर पर बनी हुई है.
- भारतीय रुपया: पिछले छह महीनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3.2% गिर चुका है.
2025 की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद कमजोर रही है, और वैश्विक बाजारों में इसकी स्थिति थाईलैंड और फिलीपींस के शेयर बाजारों के साथ सबसे खराब प्रदर्शन करने वालों में शामिल हो गई है. बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और महंगे वैल्यूएशन के कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा घट रहा है, जिससे बाजार में और गिरावट की संभावना बनी हुई है.










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