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FD Rules: नॉमिनी नहीं होने पर एफडी का पैसा किसे मिलेगा? खाताधारक की मौत के बाद जानें RBI के नियम

खाताधारक की मृत्यु के बाद यदि एफडी में नॉमिनी दर्ज नहीं है, तो पैसा किसे मिलेगा? जानिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियम और कानूनी वारिसों के लिए पूरी दावा प्रक्रिया.

FD Rules: नॉमिनी नहीं होने पर एफडी का पैसा किसे मिलेगा? खाताधारक की मौत के बाद जानें RBI के नियम

 FD Rules:  बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराते समय नॉमिनी का नाम दर्ज करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. हालांकि, यदि किसी कारणवश खाताधारक एफडी में नॉमिनी नहीं जोड़ पाता है और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो जमा राशि फंसी नहीं रहती.   यह भी पढ़े:   EPF Balance Check: ऑनलाइन और ऑफलाइन कैसे देखें अपना पीएफ बैलेंस? जानें 4 आसान तरीके

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, नॉमिनी न होने की स्थिति में एफडी का पैसा खाताधारक के वैध कानूनी वारिसों (Legal Heirs) को दिया जाता है. हालांकि, नॉमिनी की अनुपस्थिति में पैसे का दावा करने की प्रक्रिया थोड़ी लंबी और अधिक दस्तावेजों वाली हो जाती है.

कानूनी वारिसों को कैसे मिलता है पैसा?

यदि खाताधारक ने कोई वसीयत (Will) छोड़ी है, तो उसमें निर्दिष्ट व्यक्तियों को उत्तराधिकार नियमों के तहत राशि प्राप्त होती है. यदि कोई वसीयत नहीं है, तो व्यक्तिगत उत्तराधिकार कानून (जैसे हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम या मुस्लिम पर्सनल लॉ) के तहत परिजनों में राशि का बंटवारा किया जाता है.

उदाहरण के लिए, हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत मृतक की पत्नी, बच्चे और मां प्रथम श्रेणी (Class-I) के कानूनी वारिस माने जाते हैं और वे जमा राशि पर समान अधिकार रखते हैं.

दावों के निपटारे के लिए आवश्यक दस्तावेज

नॉमिनी के बिना एफडी क्लेम करने के लिए बैंकों को निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:

  • मृत्यु प्रमाण पत्र: खाताधारक का मूल या सत्यापित मृत्यु प्रमाण पत्र.

  • दावा पत्र (Claim Form): बैंक द्वारा निर्धारित प्रारूप में भरा हुआ आवेदन.

  • कानूनी वारिस प्रमाण पत्र: स्थानीय राजस्व अधिकारी (जैसे तहसीलदार) द्वारा जारी लीगल हीयर सर्टिफिकेट.

  • अनापत्ति पत्र (NOC): यदि कोई एक वारिस पैसा प्राप्त कर रहा है, तो अन्य सभी कानूनी वारिसों का अनापत्ति पत्र और डिस्क्लेमर लेटर.

  • इंडम्निटी बॉन्ड (Indemnity Bond): बैंक को भविष्य के किसी भी विवाद से सुरक्षित रखने के लिए वारिसों द्वारा हस्ताक्षरित क्षतिपूर्ति बंधपत्र.

  • सक्सेशन सर्टिफिकेट: यदि राशि अधिक है या वारिसों के बीच विवाद की स्थिति है, तो सिविल कोर्ट से जारी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की आवश्यकता हो सकती है.

आरबीआई के निर्देश और निपटारे की समय-सीमा

आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंकों को प्रक्रिया को सरल बनाने और कम राशि वाले खातों के लिए सुगम व्यवस्था अपनाने का निर्देश दिया गया है. सभी आवश्यक और वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बाद, बैंक को 15 दिनों के भीतर क्लेम का निपटारा करना होता है.

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि नॉमिनी केवल एक कस्टोडियन (रक्षक) होता है, जबकि वास्तविक स्वामित्व हमेशा कानूनी वारिसों का ही होता है. बैंक में नॉमिनी दर्ज होने पर केवल प्रक्रिया आसान हो जाती है, लेकिन नॉमिनी न होने पर भी कागजी कार्रवाई पूरी करके राशि प्राप्त की जा सकती है.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 10, 2026 01:46 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).