HC on Stray Dogs: बॉम्बे हाईकोर्ट का कड़ा रुख, महाराष्ट्र सरकार से आवारा कुत्तों की गणना, नसबंदी और रेबीज टीकाकरण का मांगा पूरा ब्योरा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से राज्य में आवारा कुत्तों की कुल संख्या, उनके नसबंदी (स्टेरिलाइजेशन) के आंकड़ों और एंटी-रेबीज टीकों की उपलब्धता पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. अदालत ने यह निर्देश आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज की घटनाओं से जुड़े एक स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) मामले की सुनवाई के दौरान दिए.
Bombay HC on Stray Dogs: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी, उनके नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे कदमों और मेडिकल सुविधाओं की असल स्थिति पर गहरी चिंता जताई है. अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह आवारा कुत्तों की कुल संख्या, नसबंदी के आंकड़े और अस्पतालों में एंटी-रेबीज टीकों की उपलब्धता से जुड़ा अपडेटेड डेटा जल्द से जल्द पेश करे.
यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज के मामलों से संबंधित एक सुओ मोटो (स्वतः संज्ञान) याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद देश के उच्च न्यायालय अपने-अपने राज्यों में इस गंभीर मुद्दे की निगरानी कर रहे हैं. यह भी पढ़े: Supreme Court on Street Dogs: आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में न भेंजे', सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर एनिमल केयर सोसायटी ने जताई आपत्ति
नसबंदी और टीकाकरण की मौजूदा स्थिति पर सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य के पशुपालन विभाग द्वारा उठाए गए कदमों, आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए आवंटित फंड और बिना नसबंदी वाले कुत्तों के ब्योरे पर जानकारी मांगी. अदालत द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई ने अदालत को बताया कि नसबंदी कार्यक्रमों के प्रभाव का आकलन करने के लिए आवारा कुत्तों की कुल संख्या का सटीक डेटा होना बेहद जरूरी है.
पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह महीनों में शहरी स्थानीय निकायों द्वारा 150,594 कुत्तों की नसबंदी की गई थी. हालांकि, इसके बावजूद राज्य के 831 सरकारी अस्पतालों में से 128 अस्पतालों में एंटी-रेबीज के टीके उपलब्ध नहीं थे, जबकि 381 अस्पतालों में रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (Rabies Immunoglobulin) का अभाव पाया गया.
शेल्टर्स और हेल्पलाइन को लेकर चिंताएं
सुनवाई के दौरान आवारा कुत्तों के प्रबंधन और शेल्टर्स की स्थिति पर भी चर्चा हुई. एमिकस क्यूरी ने यह भी रेखांकित किया कि डॉग-बाइट (कुत्ते के काटने) की घटनाओं की त्वरित सूचना के लिए कोई समर्पित हेल्पलाइन शुरू नहीं की गई है.
इसके अलावा, राज्य में आधिकारिक पशु कल्याण बोर्ड (Animal Welfare Board) के न होने पर भी चिंता जताई गई. आंकड़ों के मुताबिक, शहरी संस्थानों के परिसरों में पाए गए 19,694 कुत्तों में से केवल 1,479 (लगभग 7.5 प्रतिशत) कुत्तों को ही शेल्टर्स में स्थानांतरित किया गया था, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के मामलों में यह डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया.
सरकार का पक्ष और आगामी सुनवाई की तारीख
सरकारी अभियोजक ने अदालत को बताया कि नगर निगमों, परिषदों और ग्रामीण क्षेत्रों के नसबंदी आंकड़ों को मिलाकर एक समेकित चार्ट तैयार किया गया है, जिसमें अकेले सितंबर 2026 के दौरान 13,382 नसबंदी प्रक्रियाएं पूरी किए जाने की बात शामिल है. वहीं, एक अन्य पशु कल्याण संगठन के वकील ने बताया कि मुंबई में स्थानीय स्तर पर हुए सर्वे के अनुसार शहर के लगभग 75 प्रतिशत आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है.
अदालत ने स्पष्ट किया कि पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रम को और अधिक आक्रामक और प्रभावी तरीके से लागू करने की आवश्यकता है. इस मामले में बेंच ने राज्य सरकार को आगामी 2 नवंबर तक सभी संशोधित और अद्यतन आंकड़े (Updated Figures) अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 10, 2026 12:27 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

