भारत को मिली बड़ी उपलब्धि! पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक ‘Naphthromycin’ हुई तैयार, कैंसर और डायबिटीज मरीजों के लिए राहत
भारत ने अपना पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक 'नैफिथ्रोमाइसिन' विकसित कर लिया है. यह दवा श्वसन संक्रमण (Respiratory Infection) के रोगियों के लिए विशेष रूप से प्रभावी है.
Naphthromycin Antibiotic India: भारत ने अपना पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक 'नैफिथ्रोमाइसिन' विकसित कर लिया है. यह दवा श्वसन संक्रमण (Respiratory Infection) के रोगियों के लिए विशेष रूप से प्रभावी है. इसके अलावा Cancer और Diabetes रोगियों में यह दवा कारगर साबित होगी. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Dr. Jitendra Singh ने बताया कि यह पहली दवा है, जिसकी संपूर्ण अवधारणा, विकास और नैदानिक परीक्षण भारत में किए गए हैं.
इस शोध की रिपोर्ट प्रतिष्ठित चिकित्सा पत्रिका 'New England Journal of Medicine' में प्रकाशित हुई है, जो भारत की अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान क्षमताओं को और भी अधिक मान्यता प्रदान करती है.
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पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक ‘नाफिथ्रोमाइसिन’ तैयार
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि दवा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है. भारत ने अब तक 10,000 से अधिक मानव जीनोम अनुक्रमित (Human Genome Sequenced) किए हैं और अगले चरण में इस संख्या को दस लाख तक बढ़ाने का लक्ष्य है.
उन्होंने कहा कि भारत के जीन थेरेपी परीक्षणों (Gene Therapy Trials) ने 60 से 70 प्रतिशत सफलता दर हासिल की है, और किसी भी रोगी को रक्तस्राव (Bleeding) का अनुभव नहीं हुआ है, जो चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
सरकार ने ANRF की स्थापना की
डॉ. सिंह ने बताया कि देश में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) की स्थापना की है, जिसके अंतर्गत अगले पांच सालों में कुल ₹50,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे. इसमें से ₹36,000 करोड़ प्राइवेट सेक्टर से आएंगे.
स्वदेशी जीन थेरेपी का सफल परीक्षण
डॉ. सिंह ने यह भी घोषणा की है कि भारत ने हीमोफीलिया के उपचार (Treatment of Hemophilia) के लिए अपना पहला स्वदेशी जीन थेरेपी परीक्षण सफलतापूर्वक किया है. यह परीक्षण सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से Christian Medical College, Vellore में किया गया था.
उन्होंने आगे कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब स्वास्थ्य सेवा, शासन और निर्णय लेने की प्रक्रिया में बदलाव लाने वाला एक महत्वपूर्ण उपकरण बन गया है. डॉ. सिंह ने AI, Biotechnology और Genomics को एकीकृत करके स्वास्थ्य सेवा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए Sir Ganga Ram Hospital जैसे संस्थानों की सराहना की.