Indian Railway: 11 साल में ट्रेनों से सफर हुआ आसान और सुरक्षित, 2026–27 में 7,900 किलोमीटर ट्रैक नवीनीकरण की योजना

रेलगाड़ियों की सुचारू आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण टर्नआउट नवीनीकरण में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है. 2024–25 में 7,161 थिक वेब स्विच और 1,704 वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग लगाए गए थे. 2025–26 में इससे भी ज्यादा 8,000 से ज्यादा थिक वेब स्विच और 3,000 से ज्यादा वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग लगाए जा रहे हैं. ये ट्रेनों के सुचारू संचालन के लिए बहुत जरूरी हैं.

इंडियन रेलवे (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली, 18 जनवरी: भारतीय रेलवे ने पिछले ग्यारह साल में अपनी ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में काफी प्रगति की है. लगातार निवेश और फोकस्ड काम के चलते ट्रेन संचालन अब देशभर में ज्यादा सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद हो गया है. वित्तीय वर्ष 2024–25 में रेलवे ने 6,851 किलोमीटर, वहीं 2025–26 में 7,500 किलोमीटर से ज्यादा ट्रैक का नवीनीकरण किया गया. साल 2026–27 में 7,900 किलोमीटर ट्रैक नवीनीकरण की योजना है. इसका मतलब है कि रेलवे लगातार ट्रैक की गुणवत्ता और सुरक्षा पर जोर दे रहा है. Railway Fare Hike: देशभर में रेलवे किराया 26 दिसंबर से बढ़ेगा; इन यात्रियों पर बढ़ोतरी का असर नहीं पड़ेगा

रेलगाड़ियों की सुचारू आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण टर्नआउट नवीनीकरण में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है. 2024–25 में 7,161 थिक वेब स्विच और 1,704 वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग लगाए गए थे. 2025–26 में इससे भी ज्यादा 8,000 से ज्यादा थिक वेब स्विच और 3,000 से ज्यादा वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग लगाए जा रहे हैं. ये ट्रेनों के सुचारू संचालन के लिए बहुत जरूरी हैं.

ट्रैक की स्थिरता बनाए रखने और सवारी की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक गिट्टी की मशीनीकृत गहन स्क्रीनिंग लगातार की जा रही है. 2024–25 में 7,442 किलोमीटर ट्रैक की डीप स्क्रीनिंग हुई और 2025–26 में 7,500 किलोमीटर से ज्यादा डीप स्क्रीनिंग का काम जारी है.

ट्रैक मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ाकर मेंटेनेंस की क्षमता भी बढ़ाई गई है. 2014 के बाद से 1,100 से ज्यादा ट्रैक मशीनें खरीदी गई हैं, जिससे रेलवे जल्दी और कुशलता से ट्रैक की मरम्मत कर पा रहा है.

रेलवे ट्रैक के किनारे सुरक्षा बाड़ लगाने का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है ताकि मवेशियों के कुचले जाने और पटरियों पर अनधिकृत प्रवेश की घटनाओं को कम किया जा सके और समग्र सुरक्षा को बढ़ाया जा सके. अब तक लगभग 15,000 किलोमीटर की बाड़ लगाई जा चुकी है, जिससे उन खंडों पर सुरक्षा में सुधार हुआ है जहां ट्रेनें 110 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से चलती हैं.

इन निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप, भारतीय रेलवे ने पटरियों के उन्नयन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है. 110 किमी प्रति घंटे और उससे अधिक की गति की अनुमति देने वाली पटरियों की लंबाई 2014 में 31,445 किलोमीटर (नेटवर्क का लगभग 40 प्रतिशत) से बढ़कर वर्तमान में 84,244 किलोमीटर (नेटवर्क का लगभग 80 प्रतिशत) हो गई है, जिससे ट्रेनों का संचालन तेज और अधिक कुशल हो गया है.

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