India LPG Crisis: जंग के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत में गहराया रसोई गैस संकट, रोजाना 4 लाख बैरल एलपीजी की कमी
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) के बंद होने से भारत में प्रति दिन 4 लाख बैरल एलपीजी (रसोई गैस) की भारी किल्लत हो गई है. आपूर्ति प्रभावित होने से जहां ब्लैक मार्केट में घरेलू सिलेंडरों के दाम तीन गुना बढ़ गए हैं,
India LPG Shortage: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) के बंद होने के कारण भारत इस समय एक गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है. देश में युद्ध-पूर्व स्तर की तुलना में प्रति दिन लगभग 4,000,000 (4 लाख) बैरल एलपीजी की भारी कमी हो गई है. भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक एलपीजी आयात इसी समुद्री मार्ग के जरिए करता था. दुनिया के तीसरे सबसे बड़े एलपीजी उपभोक्ता देश भारत के लिए यह संकट इसलिए बड़ा हो गया है क्योंकि आपूर्ति घटने से घरेलू और कमर्शियल गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं.
कैसे पैदा हुआ आपूर्ति का यह संकट?
कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केपलर (Kpler) के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में जब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला था, तब भारत का एलपीजी आयात 851,870 बैरल प्रति दिन था. अप्रैल तक यह आंकड़ा महज 377,620 बैरल प्रति दिन रह गया. यानी केवल दो महीनों में आयात में 55 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई. यह भी पढ़े: Maharashtra LPG Crisis: महाराष्ट्र में गैस संकट पर बोले सीएम फडणवीस, प्रदेश में एलपीजी की कोई किल्लत नहीं, कांग्रेस सिर्फ अफवाह फैला रही है; VIDEO
इस कमी को पूरा करने के लिए घरेलू रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर 530,000 बैरल प्रति दिन (लगभग 75,000 बैरल की वृद्धि) जरूर किया है, लेकिन यह आयात में आई भारी गिरावट की भरपाई के लिए नाकाफी है. चिंता की बात यह भी है कि भारत के पास एलपीजी का कोई दीर्घकालिक रणनीतिक भंडार (स्ट्रैटेजिक रिजर्व) नहीं है. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, देश के पास केवल 45 दिनों का रोलिंग स्टॉक उपलब्ध है.
आम जनता और कारोबारियों पर महंगाई की मार
आपूर्ति संकट का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है. मार्च की शुरुआत में सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी की थी. इसके बाद खुदरा बिक्री में भारी गिरावट देखी गई. मार्च में सिलेंडरों की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले 13 प्रतिशत और अप्रैल में 12.7 प्रतिशत की कमी आई.
कारोबारी क्षेत्र इससे भी अधिक प्रभावित हुआ है. कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई है, जिससे दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में इसकी कीमत 3,000 रुपये के पार चली गई है. वहीं, अनियंत्रित या ब्लैक मार्केट में घरेलू सिलेंडर सरकार द्वारा तय 915 रुपये की कीमत के मुकाबले तीन गुना अधिक यानी 3,000 रुपये से ऊपर बेचे जा रहे हैं.
मध्य पूर्व से इतर नए विकल्पों की तलाश
यूएई, कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे भारत के चार मुख्य मध्य-पूर्वी आपूर्तिकर्ताओं से आने वाली खेप में अप्रैल के दौरान 75 प्रतिशत की गिरावट आई है. इसके समाधान के लिए भारत ने अब ईरान, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, चिली और अमेरिका से एलपीजी का आयात शुरू किया है. अकेले अमेरिका ने अप्रैल में भारत को 149,000 बैरल प्रति दिन एलपीजी की आपूर्ति की है.
हालांकि, इस विविधीकरण (डाइवर्सिफिकेशन) के साथ एक बड़ी व्यावहारिक चुनौती दूरी की है. मध्य पूर्व से भारत तक जहाज आने में जहां सिर्फ 5 से 6 दिन लगते थे, वहीं ऑस्ट्रेलिया से आपूर्ति पहुंचने में 20 दिन और अमेरिका या अर्जेंटीना से माल आने में 35 से 45 दिन का लंबा समय लग रहा है.
क्या है दीर्घकालिक समाधान?
इस संकट के बीच सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शनों के विस्तार में तेजी ला रही है, जिसके तहत मार्च में पांच लाख से अधिक नए घरों को जोड़ा गया है. हालांकि, एलपीजी पर निर्भर 33 करोड़ परिवारों के मुकाबले वर्तमान में केवल 1.6 करोड़ परिवारों के पास ही पीएनजी की सुविधा है, जिससे यह अंतर बहुत बड़ा हो जाता है. वर्तमान स्थितियों को देखते हुए बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की 4 लाख बैरल प्रति दिन की इस भारी कमी को इतनी जल्दी दूर करना आसान नहीं होगा.