Kerala Brain Eating Amoeba Cases: केरल में 'ब्रेन ईटिंग अमीबा' यानी नेग्लेरिया फॉवलेरी (Naegleria fowleri) के संक्रमण ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है. इस साल अब तक इसके 72 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 19 लोगों की मौत हो चुकी है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि अकेले सितंबर में ही 24 मामले सामने आए और नौ लोगों की जान चली गई. पिछले साल, केरल (Kerala Amoeba News) में ऐसे 36 मामले सामने आए थे, जिनमें नौ मौतें हुई थीं. हालांकि, इस साल संक्रमण की संख्या दोगुनी हो गई है.
राज्य के स्वास्थ्य विभाग (Kerala Health Department) के अनुसार, इस बार संक्रमण किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है; विभिन्न जिलों से मामले सामने आ रहे हैं.
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'ब्रेन ईटिंग अमीबा' क्या है?
यह संक्रमण 'नेगलेरिया फाउलेरी' नामक एक दुर्लभ जीवाणु के कारण होता है. यह झीलों, तालाबों और नदियों जैसे गर्म पानी में पनपता है. जब दूषित पानी नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है, तो यह सीधे मस्तिष्क तक पहुंच सकता है और मस्तिष्क के ऊतकों को नष्ट कर सकता है. इसीलिए इसे 'ब्रेन ईटिंग अमीबा' कहा जाता है.
'ब्रेन ईटिंग अमीबा' के लक्षण
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इस संक्रमण के शुरुआती लक्षणों में तेज सिरदर्द, बुखार और उल्टी शामिल हैं. धीरे-धीरे, यह और गंभीर हो जाता है और मरीज को दौरे पड़ने लगते हैं, मानसिक स्थिति बिगड़ने लगती है, मतिभ्रम होने लगता है और यहाँ तक कि कोमा भी हो सकता है. अमेरिकी सीडीसी के अनुसार, यह संक्रमण बेहद दुर्लभ है, लेकिन 95% से ज़्यादा मौतों का कारण यही है।
सरकारी तैयारियां
राज्य सरकार ने दावा किया है कि संक्रमण की शुरुआती अवस्था में पहचान करने और इलाज शुरू करने के लिए बड़े पैमाने पर जांच की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज (Health Minister Veena George) ने कहा है कि इस साल कोई क्लस्टर प्रकोप नहीं हुआ है और स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
वैश्विक स्थिति
1962 से अब तक दुनिया भर में इसके लगभग 500 मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से ज्यादातर मामले संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया में दर्ज किए गए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को गर्म पानी से नहाते या तैरते समय सावधानी बरतनी चाहिए. खासकर, नाक में पानी जाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह संक्रमण का सबसे आम रास्ता है.












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