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Gyanvapi Mosque Case: वाराणसी जिला अदालत में आज होगी सुनवाई, इलाके में सुरक्षा चाकचौबंद

ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी विवाद की सुनवाई सोमवार को जिला अदालत में होनी है. जिला जज अजय कुमार विश्वेश की कोर्ट में पहली बार केस ओपन होगा और केस की रोजाना सुनवाई भी की जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालत को 8 हफ्ते में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है.

Gyanvapi Mosque Case: वाराणसी जिला अदालत में आज होगी सुनवाई, इलाके में सुरक्षा चाकचौबंद
ज्ञानवापी मस्जिद (Photo Credits: PTI)

वाराणसी: ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी विवाद की सुनवाई सोमवार को जिला अदालत में होनी है. जिला जज अजय कुमार विश्वेश की कोर्ट में पहली बार केस ओपन होगा और केस की रोजाना सुनवाई भी की जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालत को 8 हफ्ते में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है. हिंदू पक्ष की मांग है कि नंदी के सामने वाली दीवार को तोड़ा जाए जबकि मुस्लिम पक्ष की दलील है कि जिसे शिवलिंग बताया जा रहा है वो फव्वारा है.

हिंदू पक्ष की मांग है कि मस्जिद में मिले मंदिरों के प्रतीक चिह्नों की जांच आगे बढ़ाई जाए लेकिन मुस्लिम पक्ष की दलील है कि मस्जिद में किसी तरह की तोड़फोड़ या जांच नहीं होनी चाहिए.

जिला न्यायाधीश की अदालत सोमवार से ज्ञानवापी-श्रंगार गौरी मामले की सुनवाई शुरू करने के लिए तैयार है, जिसके चलते वाराणसी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सिविल जज (सीनियर डिवीजन) कोर्ट से मुकदमे को स्थानांतरित करने के सुप्रीम कोर्ट के 20 मई के आदेश के अनुपालन में सभी संबंधित फाइलें इसे स्थानांतरित कर दी गईं.

जिला सरकार के वकील (सिविल) महेंद्र प्रसाद पांडे ने कहा कि जिला जज कोर्ट सोमवार को उन बिंदुओं को स्पष्ट करेगा जिन पर सुनवाई शुरू होगी. इस बीच, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि मामले की सुनवाई में किसी पक्ष की ओर से कोई परेशानी न हो, इसके लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमने पर्याप्त बल तैनात किए हैं और एहतियात के तौर पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं. पांच महिला भक्तों, दिल्ली की राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक, ने वाराणसी की सिविल जज अदालत में 18 अप्रैल, 2021 को मस्जिद परिसर में देवी श्रृंगार गौरी की दैनिक पूजा की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी.

कोर्ट ने 8 अप्रैल को अजय कुमार मिश्रा को ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया था. प्रतिवादियों, अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी जिसमें अधिवक्ता आयुक्त के सर्वेक्षण और नियुक्ति के आदेश को चुनौती दी गई थी, लेकिन याचिका खारिज कर दी गई थी.

न्यायालय आयोग ने 6 मई को ज्ञानवापी का सर्वेक्षण शुरू किया था, लेकिन अगले दिन एआईएम के विरोध के कारण इसे रोक दिया गया था, जिसने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अदालत से मिश्रा को पक्षपाती बताते हुए एडवोकेट कमिश्नर को बदलने की मांग की थी.

अदालत ने मिश्रा को बदलने की याचिका को खारिज कर दिया लेकिन विशाल सिंह को विशेष अधिवक्ता आयुक्त और अजय प्रताप सिंह को सहायक अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त किया. याचिकाकर्ताओं द्वारा ज्ञानवापी के वुजू तालाब में एक 'शिवलिंग' पाए जाने के दावों के बीच अदालत आयोग ने 14 मई को सर्वेक्षण फिर से शुरू किया और 16 मई को इसे समाप्त कर दिया.

17 मई को अदालत ने सूचना लीक होने की शिकायतों के बाद मिश्रा को बर्खास्त कर दिया और विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह को 19 मई को सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश करने को कहा था.

20 मई को एआईएम कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले में पारित सर्वे आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया और हिंदू भक्तों द्वारा दायर दीवानी वाद सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से लेकर जिला जज वाराणसी को ट्रांसफर कर दिया. उन्होंने कहा कि मामले की जटिलताओं और संवेदनशीलता को देखते हुए, यह बेहतर है कि 25-30 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी इस मामले को संभालें.

(The above story first appeared on LatestLY on May 23, 2022 10:29 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).