Gudi Padwa 2023: किस दिन मनाया जाएगा गुड़ी पड़वा? जानें गुड़ी पड़वा की तिथि, पूजा मुहूर्त एवं गुड़ी सजाने की विधि?

हिंदू नववर्ष की शुरुआत गुड़ी पड़वा से ही होती है, तथा चैत्र नवरात्रि भी इसी दिन से प्रारंभ होता है, इस तरह इस पर्व का हिंदू धर्म में विशेष महत्व वर्णित है. आइये जानें गुड़ी पड़वा की तिथि, पूजा मुहूर्त, महत्व एवं पूजा-विधि के बारे में विस्तार से...

गुड़ी पड़वा 2023 (Photo Credits: File Image)

महाराष्ट्र,20 मार्च: कोंकड़ और दक्षिण के कई राज्यों में गुड़ी पड़वा का पर्व बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है. चूंकि हिंदू नववर्ष की शुरुआत गुड़ी पड़वा से ही होती है, तथा चैत्र नवरात्रि भी इसी दिन से प्रारंभ होता है, इस तरह इस पर्व का हिंदू धर्म में विशेष महत्व वर्णित है. आइये जानें गुड़ी पड़वा की तिथि, पूजा मुहूर्त, महत्व एवं पूजा-विधि के बारे में विस्तार से..

गुड़ी पड़वा का महत्व यह

गुड़ी पड़वा मनाने का अत्यंत महत्व है जिसके पीछे 4 मुख्य कारण हैं: पहला कारण तो यह कि इस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया था और इस दिन को ब्रह्म पूजा के लिए समर्पित माना गया है. दूसरा कारण यह कि इस दिन से नवरात्रि का शुभारंभ होता है और मां दुर्गा घर-घर में विराजती हैं. तीसरा कारण यह कि इस दिन किसान नई फसल उगाते हैं. हिंदू धर्म में गुड़ी पड़वा का विशेष स्थान होता है. मान्यता अनुसार इस दिन घर के मुख्य द्वार या बालकनी में गुड़ी फहराने से घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करने पाती, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है, भाग्य रेखा प्रबल रहती है.

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गुड़ी पड़वा का पर्व विभिन्न प्रदेशों में संवत्सर, उगादी, चेती, नवरेह, साजिबू नोंगमा, पानबा एवं चीरोबा आदि नामों से जाना और मनाया जाता है. ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार इस दिन स्वर्ण एवं नई कार, नया घर खरीदना शुभ माना जाता है. बहुत सी जगहों पर यह दिवस वसंत की शुरुआत का भी प्रतीक और फसल के त्योहार के रूप में भी मनाया जाता है.

गुड़ी पड़वा तिथि एवं पूजा का मुहूर्त

चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा प्रारंभ: 09.22 PM (21 मार्च 2023 मंगलवार) से

चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा समाप्त: 06.50 PM (22 मार्च 2023 बुधवार) से

उदय तिथि के अनुसार 22 मार्च 2023 को गुड़ी पड़वा मनाया जायेगा.

गुड़ी पड़वा पूजा मुहूर्तः 06.29 AM से 07.39 AM तक (22 मार्च 2023)

कैसे मनाते हैं गुड़ी पड़वा?

गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र के दिन स्नान-ध्यान करने के पश्चात घर के मुख्य द्वार पर सर्वप्रथम रंगोली बनाते हैं और द्वार पर तोरण सजाते हैं. एक पीले रंग के रेशमी कपड़े का ध्वज बनाकर इसे फूल, आम की पत्ती आदि से सजाया जाता है. इस पर सिंदूर, हल्दी अथवा कुमकुम से स्वास्तिक का शुभ चिह्न बनाया जाता है. अब इस ध्वज को एक डंडे में लगाकर इसके शिखर पर पीतल का लोटा उल्टा रखकर घर के मुख्य द्वार अथवा बालकनी में लगाकर फहराया जाता है. यह ध्वजा शुभता का प्रतीक माना जाता है, इससे घर में किसी तरह की बाधाएं अथवा अभाव नहीं आता. इस दिन ज़रूरतमंद लोगों को पानी के साथ और भी अन्य वस्तुएं देनी चाहिए.

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