GST Reforms: देश के टैक्स सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है. सरकार जल्द ही हेल्थ (Health) और इंश्योरेंस प्रीमियम (Insurance Premium) पर लगने वाले 18% जीएसटी (GST) को खत्म करने पर विचार कर रही है. अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अभी तक हेल्थ और फैमिली इंश्योरेंस पॉलिसी (Family Insurance Policy) पर हर साल भारी टैक्स देना पड़ता था.
दिल्ली में हुई बैठक में 13 राज्यों के मंत्रियों की समिति (GoM) ने सहमति जताई है, कि व्यक्तिगत और पारिवारिक इंश्योरेंस पॉलिसी पर जीएसटी पूरी तरह खत्म कर दिया जाए. यह फैसला केंद्र सरकार की पहल के अनुसार है. बिहार के उपमुख्यमंत्री और समिति के प्रमुख सम्राट चौधरी ने कहा है, कि ‘मंत्री समूह की रिपोर्ट जीएसटी काउंसिल को भेजी जाएगी, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा. उम्मीद है, कि जीएसटी काउंसिल की बैठक सितंबर महीने में होगी.’
तेलंगाना के डिप्टी सीएम (Deputy CM) और वित्त मंत्री (Finance Minister) मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने कहा है, कि ‘अगर टैक्स पूरी तरह खत्म किया गया तो सरकार को लगभग 9,700 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा (Revenue Loss) झेलना पड़ सकता है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया है, कि ऐसा सिस्टम बनाया जाए, जिससे टैक्स छूट का सीधा लाभ पॉलिसीधारकों (Policyholders) तक पहुंचे.’
इस मंत्री समूह में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, गोवा, गुजरात, मेघालय, पंजाब, तमिलनाडु और तेलंगाना के मंत्री शामिल किए गए हैं.
इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी मौजूद रहीं. उन्होंने कहा, कि यह प्रस्ताव सरकार के अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार (Next Generation GST Reforms) की दिशा में एक अहम कदम है. वित्त मंत्रालय के अनुसार, आने वाले समय में जीएसटी सुधार तीन प्रमुख स्तंभों जैसे संरचनात्मक बदलाव (Structural Changes), रेट में सुधार (Rate Rationalisation) लोगों की सुविधा (Ease of Living) पर आधारित होंगे.
इसके साथ ही, जीएसटी सिस्टम को और सरल और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीक आधारित तेज़ और समयबद्ध रजिस्ट्रेशन, प्री-फिल्ड रिटर्न (Pre-Filled Returns) ताकि गलतियां कम हों और तेज़ व ऑटोमेटेड रिफंड सिस्टम (Automated Refund System) जैसी सुविधाएं लागू की जाएंगी.
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो आम जनता को हेल्थ और इंश्योरेंस प्रीमियम पर लगने वाले 18% टैक्स से राहत मिलेगी. इससे न केवल हेल्थ पॉलिसी सस्ती होगी, बल्कि लोगों की जेब पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ भी काफी हद तक कम हो जाएगा.













QuickLY