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Nepal Flood: बाढ़ की तबाही के 13वें दिन नेपाल में राष्ट्रीय शोक, मृतकों को दी गई श्रद्धांजलि; 5,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता

नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के 13वें दिन देशभर में राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है. इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1,340 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं.

Nepal Flood: बाढ़ की तबाही के 13वें दिन नेपाल में राष्ट्रीय शोक, मृतकों को दी गई श्रद्धांजलि; 5,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता
Nepal Flood

Nepal Flood:  नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) के 13वें दिन पूरे देश में राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है. इस त्रासदी में जान गंवाने वालों के सम्मान में देशभर के सरकारी कार्यालयों और विदेशों में स्थित नेपाली दूतावासों पर राष्ट्रध्वज आधा झुका दिया गया है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 1,340 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि मलबे और हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लगभग 5,000 लापता लोगों की तलाश अब भी जारी है.

13वें दिन श्रद्धांजलि और राष्ट्रीय शोक का आयोजन

नेपाल सरकार ने आपदा के 13वें दिन राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है. हिंदू परंपराओं में किसी के निधन के बाद 13वां दिन शोक और श्रद्धांजलि व्यक्त करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने त्रासदी का शिकार हुए नागरिकों को याद करने और श्रद्धांजलि देने का निर्णय लिया.  यह भी पढ़े:  Nepal Flood News: नेपाल में बाढ़ से मची तबाही, 538 लोगों की मौत; 977 अब भी लापता, 28 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

यह तबाही 26 अगस्त को चीन की सीमा से सटे रसुवा जिले के ऊंचे हिमाचली क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से शुरू हुई थी. इसके बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई प्रचंड बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत कई जिलों को अपनी चपेट में ले लिया.

5,000 लोग अब भी लापता, सुरंगों में जारी है तलाश

बाढ़ और भूस्खलन के कारण कम से कम 32,000 परिवार विस्थापित हुए हैं और लगभग 7,500 मकान पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं. सबसे बड़ी चुनौती लापता 5,000 लोगों को खोजना है, जिनमें 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.

सुरक्षा बलों और बचाव टीमों का ध्यान इस समय नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों के अलावा जलविद्युत परियोजनाओं (हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स) की सुरंगों पर केंद्रित है. नेपाली सेना और सशस्त्र बलों के साथ-साथ भारत से पहुंची विशेष बचाव टीमें भी दुर्गम स्थानों पर राहत और खोज अभियान चला रही हैं.

एक साथ कई जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन

भारत के उत्तराखंड स्थित सिल्क्यारा सुरंग हादसे में 41 मजदूरों को बचाने वाले अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ प्रोफेसर अर्नोल्ड डिक्स ने नेपाल के इस बचाव अभियान की जटिलता को रेखांकित किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि नेपाल में इस समय एक ही स्थान पर नहीं, बल्कि अलग-अलग दुर्गम इलाकों में कई खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन एक साथ चल रहे हैं.

डिक्स के अनुसार, हर प्रभावित क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और खतरे अलग हैं. उन्होंने सिल्क्यारा अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी विषम परिस्थितियों में उम्मीद को लगातार काम में बदलना ही जिंदगियां बचाने का एकमात्र रास्ता है.

8 सितंबर को रहेगा 'जेन जी शहीद दिवस' का सार्वजनिक अवकाश

राष्ट्रीय शोक के अगले दिन, यानी 8 सितंबर को नेपाल में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है. यह छुट्टी 'जेन जी शहीद दिवस' (Gen Z Martyrs' Day) के अवसर पर दी गई है.

दरअसल, पिछले साल इसी तारीख को काठमांडू में युवाओं द्वारा भ्रष्टाचार और सरकारी फैसलों के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन शुरू किए गए थे. उस आंदोलन के दौरान हुई सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 72 लोगों की जान गई थी. इसके बाद तत्कालीन सरकार का पतन हो गया था. इस तरह नेपाल एक ओर जहां भीषण प्राकृतिक आपदा के पीड़ितों का शोक मना रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के राजनीतिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ को भी याद कर रहा है.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 07, 2026 12:31 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).