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Badrinath-Kedarnath Entry Ban: बद्रीनाथ-केदारनाथ सहित 45 मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर लगेगी रोक, BKTC बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पेश करने की तैयारी

उत्तराखंड में बदरीनाथ और केदारनाथ सहित 45 प्रमुख मंदिरों में अब गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की तैयारी है. बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) इस संबंध में आगामी बोर्ड बैठक में एक औपचारिक प्रस्ताव पेश करेगी.

Badrinath-Kedarnath Entry Ban: बद्रीनाथ-केदारनाथ सहित 45 मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर लगेगी रोक, BKTC बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पेश करने की तैयारी

Badrinath-Kedarnath Entry Ban: देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक अस्मिता और सदियों पुरानी परंपराओं को अक्षुण्ण रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है. बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने घोषणा की है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले बदरीनाथ, केदारनाथ और अन्य 45 मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव लाएगी. यह घोषणा सोमवार, 26 जनवरी को समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी द्वारा की गई.

बोर्ड बैठक में पारित होगा प्रस्ताव

बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि मंदिर समिति की आगामी बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी भेदभाव के लिए नहीं, बल्कि तीर्थस्थलों की पवित्रता और मान्यताओं को बनाए रखने के लिए लिया जा रहा है. द्विवेदी के अनुसार, केदारखंड और मानसखंड की मंदिर श्रृंखलाओं में पारंपरिक रूप से गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहा है, लेकिन पिछली गैर-भाजपा सरकारों के दौरान इन नियमों की अनदेखी की गई थी. यह भी पढ़े: Uttarakhand: केदारनाथ-बद्रीनाथ में बर्फबारी, चारों तरफ बिछी सफेद चादर; VIDEOS

गंगोत्री धाम में पहले ही लिया गया निर्णय

इस दिशा में कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी है. श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने रविवार को एक बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि गंगोत्री धाम और मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल 'मुखबा' में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा. इसके साथ ही हरिद्वार के 'हर की पैड़ी' क्षेत्र में भी 'गैर-हिंदू वर्जित क्षेत्र' के बोर्ड लगाए जाने की खबरें सामने आई हैं, जिसे 1916 के नगर पालिका उपनियमों का हिस्सा बताया जा रहा है.

सरकार और समिति का रुख

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस संबंध में कहा है कि राज्य सरकार तीर्थस्थलों का प्रबंधन करने वाली समितियों और संस्थाओं के सुझावों के अनुसार ही कार्रवाई करेगी. हेमंत द्विवेदी ने मुख्यमंत्री द्वारा राज्य में अवैध अतिक्रमण और मजारों को हटाने के अभियान की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि सरकार और मंदिर समिति के बीच समन्वय से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और कानून-व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी.

विपक्ष की प्रतिक्रिया

इस प्रस्तावित कदम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी शुरू हो गई हैं. कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने इसे जनता का ध्यान मूल मुद्दों से भटकाने की कोशिश करार दिया है. हालांकि, मंदिर समिति का तर्क है कि ये तीर्थस्थल केवल 'पर्यटन स्थल' नहीं, बल्कि सनातन धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र हैं, जहाँ धार्मिक नियमों का पालन अनिवार्य है.

उल्लेखनीय है कि बदरीनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे, जबकि केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि महाशिवरात्रि पर घोषित की जाएगी.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 26, 2026 02:48 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).