What Is Khushishala? क्या है 'खुशीशाला', राजस्थान सरकार ने प्राथमिक स्कूलों के बच्चों के लिए शुरू किया मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम
राजस्थान प्राथमिक स्कूली छात्रों के लिए एक संरचित मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण कार्यक्रम शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. 'खुशीशाला' नामक इस पहल को वर्तमान में लगभग 1,500 सरकारी स्कूलों में लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य गतिविधि-आधारित शिक्षा के माध्यम से बच्चों के भावनात्मक विकास को मजबूत करना है.
What Is Khushishala? राजस्थान ने प्राथमिक विद्यालय के छात्रों के लिए एक संरचित मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण कार्यक्रम की शुरुआत की है. 'खुशीशाला' नाम की इस अनूठी पहल को लागू करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है. वर्तमान शैक्षणिक सत्र में इसे राज्य के लगभग 1,500 सरकारी स्कूलों में शुरू किया गया है. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य खेल-कूद और गतिविधि-आधारित शिक्षा (activity-based learning) के माध्यम से कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के भावनात्मक स्वास्थ्य, सामाजिक कौशल और मानसिक लचीलेपन (resilience) में सुधार करना है.
क्या है 'खुशीशाला' कार्यक्रम?
खुशीशाला स्कूल स्तर पर तैयार किया गया एक मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम है. यह बच्चों को उनके सामाजिक-भावनात्मक सीखने की क्षमता को बढ़ाने और तनाव को स्वस्थ तरीकों से प्रबंधित करने में मदद करता है. पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ यह कार्यक्रम ऐसी गतिविधियों और खेलों को शामिल करता है जो बच्चों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने, बेहतर रिश्ते बनाने और समस्याओं को सुलझाने के कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं. इसके अतिरिक्त, यह शिक्षकों को छात्रों की भावनात्मक जरूरतों को पहचानने और उन्हें सही ढंग से समझने के लिए आवश्यक संसाधन और प्रशिक्षण प्रदान करता है.
स्कूली स्तर पर क्यों है मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की जरूरत?
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बचपन के दौरान भावनात्मक विकास पर ध्यान देना बेहद महत्वपूर्ण होता है. वैश्विक शोध के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में लगभग 13 प्रतिशत बच्चे और किशोर किसी न किसी स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करते हैं. इनमें से कई स्थितियां 25 वर्ष की आयु से पहले ही शुरू हो जाती हैं. चूंकि बच्चे अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा स्कूलों में बिताते हैं, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल ही वह सबसे सही जगह हैं जहां बच्चों की भावनात्मक चुनौतियों की पहचान शुरुआती स्तर पर करके उन्हें सही समय पर सहयोग दिया जा सकता है.
शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण और संसाधन
इस कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (RSCERT) ने शिक्षकों के विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की है. इसके तहत शिक्षकों को तीन दिवसीय क्लासरूम ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके बाद 21 दिनों का ऑडियो-आधारित लर्निंग कोर्स पूरा करना होता है. इस प्रशिक्षण में भावनात्मक जागरूकता, तनाव की पहचान और संबंध बनाने जैसे विषय शामिल हैं. शिक्षकों को आयु-अनुकूल कक्षा गतिविधियां संचालित करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन की गई हैंडबुक और मोबाइल-आधारित शिक्षण संसाधन भी दिए जा रहे हैं.
पायलट प्रोजेक्ट के उत्साहजनक परिणाम
राज्य भर में इस कार्यक्रम को लागू करने से पहले राजस्थान के सिरोही और बांसवाड़ा जिलों में एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था. आरएससीईआरटी (RSCERT) की निदेशक श्वेता फगेड़िया के अनुसार, इस पायलट प्रोजेक्ट में 120 शिक्षकों को शामिल किया गया था, जिसके बाद छात्रों के सामाजिक-भावनात्मक कौशल में 53 प्रतिशत का सुधार दर्ज किया गया. विशेष रूप से छात्राओं में यह सुधार 69 प्रतिशत तक देखा गया. अधिकारियों ने पाया कि इससे शिक्षक-छात्र संबंधों में मजबूती आई और बच्चों में शैक्षणिक तनाव कम हुआ.
आगे के विस्तार की योजना
पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए इस कार्यक्रम का दायरा बढ़ाया जा रहा है. जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) के 1,300 से अधिक शिक्षकों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है और सरकार की योजना पंचायत स्तर पर 11,305 शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की है. इसके अलावा, इस कार्यक्रम को 649 'पीएम श्री' (PM SHRI) स्कूलों में भी विस्तारित किया जाएगा. इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद, राजस्थान के 12,000 से अधिक स्कूलों में कम से कम एक ऐसा शिक्षक उपलब्ध होगा जो खुशीशाला गतिविधियों का संचालन करने में सक्षम होगा.