एक महत्वपूर्ण विकास में इटली ने भारतीय छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 12 महीने तक अतिरिक्त समय तक रहने की अनुमति देने का फैसला किया है. यह कदम भारत और इटली के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन (MoU) का हिस्सा है, जिससे दोनों देशों के बीच शिक्षा, संस्कृति और श्रम के क्षेत्र में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है.
छात्रों के लिए सुनहरा अवसर:
यह नई नीति भारतीय छात्रों के लिए एक सुनहरा अवसर है जो इटली में पढ़ाई करना चाहते हैं. अतिरिक्त 12 महीने का समय उन्हें इंटर्नशिप करने, नौकरी की तलाश करने या इटली की संस्कृति और भाषा को बेहतर तरीके से समझने का मौका देगा. इससे इटली में भारतीय प्रतिभाओं का प्रवाह बढ़ने की भी उम्मीद है.
कामगारों के लिए भी खुशखबरी:
इसी समझौता ज्ञापन के तहत इटली ने 12,000 गैर-मौसमी और 8,000 मौसमी भारतीय कामगारों को भी अपने देश में काम करने की अनुमति देने का फैसला किया है. यह कदम इटली में कुशल श्रमिकों की कमी को दूर करने में मदद करेगा और साथ ही भारतीय कामगारों को विदेश में बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान करेगा.
दोनों देशों के लिए फायदेमंद:
यह समझौता ज्ञापन दोनों देशों के लिए फायदेमंद है. इससे भारत और इटली के बीच शिक्षा, संस्कृति और श्रम के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा और दोनों देशों के लोगों को लाभ होगा. भारतीय छात्रों और कामगारों के लिए इटली में नए अवसर खुलेंगे और इटली को कुशल श्रमिकों और प्रतिभाओं का एक नया स्रोत मिलेगा.
🚨 Italy to allow Indian students to stay 12 months extra after education. Also, Italy to take 12,000 non seasonal & 8000 seasonal Indian workers. MoU signed. pic.twitter.com/0Ts6Q0l3Pz
— Indian Tech & Infra (@IndianTechGuide) December 27, 2023
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर:
इस महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर भारत के विदेश सचिव विनय क्वात्रा और इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने हस्ताक्षर किए. दोनों नेताओं ने इस समझौते को भारत और इटली के बीच संबंधों को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण कदम बताया.
भारत-इटली संबंधों का नया अध्याय:
यह समझौता ज्ञापन भारत और इटली के बीच संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत है. इससे दोनों देशों के बीच सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में और भी मजबूत संबंध बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा.
कुल मिलाकर, इटली द्वारा भारतीय छात्रों और कामगारों के लिए अपने दरवाजे खोलना एक सकारात्मक कदम है. इससे दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा और दोनों देशों के लोगों को लाभ होगा.













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