Allahabad HC: 'विवाह की पवित्र संस्था को हल्के में न लें'; आपसी तलाक के बाद दोबारा शादी करने वाले 2 बच्चों के माता-पिता पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो टूक

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने विवाह संस्था के महत्व पर जोर देते हुए एक अहम टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि शादी एक पवित्र संस्था है और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। दो बच्चों के माता-पिता द्वारा मामूली घरेलू विवादों पर पहले आपसी सहमति से तलाक लेना और फिर बाद में दोबारा शादी रचाना वास्तव में एक 'खेदजनक स्थिति' है.

Marriage. Representational picture (Photo Credits: Pixabay)

प्रयागराज/लखनऊ: वैवाहिक रिश्तों में बढ़ रहे मतभेदों और कानूनी अलगाव के मामलों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक महत्वपूर्ण मौखिक और न्यायिक टिप्पणी सामने आई है. अदालत ने रेखांकित किया है कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का कानूनी अनुबंध नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और पवित्र जिम्मेदारी है, विशेष रूप से तब जब रिश्ते से बच्चे जुड़े हों.

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने रूपा रानी और उनके पति द्वारा दायर सुरक्षा याचिका की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. यह भी पढ़ें: Wife Drinking Alcohol Divorce Case: पत्नी का शराब पीना क्रूरता नहीं है, जब तक कि वह अनुचित और असभ्य व्यवहार न करे, HC ने तलाक को दी मंजूरी

क्या था मामला? आपसी तलाक के बाद आर्य समाज मंदिर में दोबारा शादी

याचिका के रिकॉर्ड और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार मामले की पृष्ठभूमि इस प्रकार थी:

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: "विवाह की पवित्र संस्था को खिलवाड़ न बनाएं"

मामले के सभी तथ्यों और विवाह प्रमाणपत्र का अवलोकन करने के बाद पीठ ने दंपत्ति के इस रवैये पर चिंता व्यक्त की:

लता सिंह फैसले का हवाला: बालिगों को शांतिपूर्ण जीवन का पूर्ण अधिकार

शुरुआती अलगाव पर नाराजगी जताने के बावजूद, हाईकोर्ट ने कानून के स्थापित सिद्धांतों का पालन करते हुए दंपत्ति को सुरक्षा देने का आदेश दिया:

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