Shubh Vivah Muhurat 2026: देशभर में 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच गूंजेगी शहनाई, जानें विवाह की शुभ तिथियां
हिंदू पंचांग के अनुसार 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच विवाह के शुभ संयोग बन रहे हैं. देवउठनी एकादशी के साथ चातुर्मास समाप्त होगा और शहनाइयों की गूंज फिर से शुरू होगी. जानें नवंबर और दिसंबर की प्रमुख तिथियां और शुभ मुहूर्त.
Shubh Vivah Muhurat 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष के उत्तरार्ध में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ तिथियों का आगमन हो रहा है. आषाढ़ शुक्ल एकादशी से शुरू हुआ चातुर्मास समाप्त होते ही देश भर में वैवाहिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो जाएगी. 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर की अवधि के दौरान कई अत्यंत शुभ लग्न और योग बन रहे हैं. इस दौरान सनातन परंपरा में आस्था रखने वाले परिवारों में विवाह समारोह आयोजित किए जाएंगे.
चातुर्मास की समाप्ति और देवउठनी एकादशी का महत्व
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने की अवधि यानी चातुर्मास के दौरान विवाह संस्कार पूरी तरह वर्जित माने जाते हैं. देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागृत होने के साथ ही सभी प्रकार के मांगलिक और वैवाहिक कार्यों पर लगी रोक समाप्त हो जाती है. यह भी पढ़े: मुंबई में सचिन के बेटे Arjun Tendulkar-Saaniya की शादी को लेकर मेहंदी सेरेमनी, संगीत में सजा सितारों का जमावड़ा, तेंदुलकर परिवार का दिखा रॉयल अंदाज; देखें VIDEO
देवउठनी एकादशी को 'अबूझ मुहूर्त' भी माना जाता है. इस तिथि पर बिना किसी विशेष पंचांग गणना के भी शुभ कार्य संपन्न किए जा सकते हैं.
नवंबर और दिसंबर में विवाह की प्रमुख तिथियां
चातुर्मास की समाप्ति के बाद नवंबर और दिसंबर के महीनों में विवाह के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे. पंचांग गणना के अनुसार इन महीनों में ग्रहों और नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति बन रही है.
-
नवंबर माह की शुभ तिथियां: नवंबर में 21, 24, 25 और 26 तारीख को विवाह के उत्तम योग बन रहे हैं.
-
दिसंबर माह की शुभ तिथियां: दिसंबर के पहले पखवाड़े में 2, 3, 4, 5, 6, 11 और 12 तारीख को शहनाइयां बजेंगी.
15 दिसंबर के बाद सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही धनु खरमास की शुरुआत हो जाएगी. इसके चलते दिसंबर के उत्तरार्ध में पुनः मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा.
विवाह मुहूर्त तय करते समय ध्यान देने योग्य बातें
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार विवाह का मुहूर्त तय करते समय केवल तिथि देखना पर्याप्त नहीं होता. इसके लिए वर और वधू की जन्म कुंडली का मिलान, गुरु (बृहस्पति) और शुक्र ग्रह की स्थिति तथा नक्षत्रों का आकलन किया जाता है.
सनातन परंपरा में माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ विवाह दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि और आपसी सामंजस्य लाता है. यही कारण है कि लोग पंचांग के आधार पर शुभ लग्न तय करने को प्राथमिकता देते हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 07, 2026 02:47 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

