Delhi Pharmacies: दिल्ली में दवाओं पर 80% तक की छूट देने पर लगी रोक, जानें क्या है वजह
दिल्ली सरकार के ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने मेडिकल स्टोर्स को दवाओं पर 80 प्रतिशत तक की छूट का भ्रामक प्रचार करने से मना किया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि एमआरपी से कम कीमत पर बिक्री पर रोक नहीं है
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Delhi Pharmacies: दिल्ली सरकार के ड्रग्स कंट्रोल विभाग (DCD) ने राजधानी के सभी मेडिकल स्टोर्स और फार्मेसियों को दवाओं पर "अवास्तविक और अतिरंजित" डिस्काउंट के विज्ञापन हटाने का निर्देश दिया है. विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दवाओं पर 80 प्रतिशत तक की छूट का दावा उनके वास्तविक स्रोत (Sourcing) और गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.
हाल के दिनों में कई मेडिकल स्टोर चेन्स और फार्मेसियों द्वारा दवाओं पर 20 से 80 प्रतिशत तक डिस्काउंट के बड़े-बड़े बैनर और बोर्ड लगाने का रुझान बढ़ा था, जिस पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. यह भी पढ़े: कर्नाटक में पेरासिटामोल सहित 15 दवाइयों पर बैन, कई कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स पर भी प्रतिबंध
भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई की वजह
ड्रग्स कंट्रोल विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर्स को दवाओं की कीमतों या छूट के संबंध में भ्रामक, अनिश्चित या अतिरंजित दावे करने से बचने का निर्देश दिया गया है.
अधिकारियों का कहना है कि जब कोई मेडिकल स्टोर निर्माता या अधिकृत वितरक की खरीद दर से भी कम कीमत पर दवाएं बेचने का दावा करता है, तो यह संदेह पैदा होता है कि दवाएं कहां से खरीदी जा रही हैं. यदि दवाओं के स्रोत संदिग्ध होंगे, तो यह सीधे मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो सकता है.
कानूनी स्थिति और एमआरपी पर स्पष्टीकरण
विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से कम कीमत पर दवाएं बेचना कानूनन अपराध नहीं है. मुख्य आपत्ति केवल उन विज्ञापनों से है जो ग्राहकों को गुमराह करते हैं.
इस एडवाइजरी में केरल उच्च न्यायालय के 19 जून के एक फैसले ('फार्माड्यूड फार्मेसी वन्नाप्पुरम बनाम केरल राज्य') का संदर्भ दिया गया है. अदालत ने अपने निर्णय में कहा था कि एमआरपी से कम दर पर बिक्री की अनुमति के बावजूद, ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अस्पष्ट या भ्रामक डिस्काउंट बोर्ड लगाने के खिलाफ विनियामक कार्रवाई पूरी तरह वैध है.
नैतिक मानक और सत्यापन नियम
ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने इस बात पर जोर दिया कि दवाएं सामान्य उपभोक्ता वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि ये स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यक वस्तुएं हैं. इसलिए इनकी बिक्री और वितरण में अधिक जिम्मेदारी, पारदर्शिता और नैतिक आचरण की आवश्यकता होती है.
विभाग ने सभी मेडिकल स्टोर्स को निम्नलिखित नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है:
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दी जाने वाली कोई भी छूट वास्तविक और पारदर्शी होनी चाहिए, जिसका विवरण सेल बिल और खरीद रिकॉर्ड से सत्यापित किया जा सके.
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मेडिकल स्टोर्स केवल लाइसेंस प्राप्त आधिकारिक दवा वितरकों और थोक विक्रेताओं से ही स्टॉक खरीदेंगे.
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यदि कोई दवा दुकान 'Up to 80%' जैसे बोर्ड लगाती है, तो उसे ग्राहकों को वास्तव में वह लाभ देना होगा और जांच के समय बिल प्रस्तुत करने होंगे.
रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन केमिस्ट एलायंस (RDCA) ने भी अपने सदस्यों को एडवाइजरी का पालन करने और भ्रामक प्रचार बोर्डों को तुरंत हटाने की अपील की है.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 05, 2026 02:37 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

