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पाकिस्तान जिससे कर रहा है दोस्ती की उम्मीद भारत ने की उसकी मेजबानी, रूस के प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा से इमरान खान की उड़ेगी नींद

सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत हो रही है. रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलई पात्रुशेव और भारत के सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बीच बैठक हो रही है. बैठक में दो शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अफगान स्थिति पर चर्चा कर सकते हैं.

पाकिस्तान जिससे कर रहा है दोस्ती की उम्मीद भारत ने की उसकी मेजबानी, रूस के प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा से इमरान खान की उड़ेगी नींद

नई दिल्ली: भारत और रूस (India and Russia) के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक चल रही है. सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत हो रही है. रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलई पात्रुशेव और भारत के सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बीच बैठक हो रही है. बैठक में दो शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अफगान स्थिति पर चर्चा कर सकते हैं. रूस के सुरक्षा परिषद के सचिव जनरल निकोलाई पात्रुशेव भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के निमंत्रण पर भारत आए हैं. चीन, पाकिस्तान और रूस यह समझ नहीं पा रहे हैं कि अब तालिबान के साथ उन्हें क्या करना है: बाइडन.

दरअसल अफगानिस्तान में तालिबान के शासन को लेकर भारत और रूस का नजरिया काफी हद तक एक जैसा लग रहा है. रूस और भारत अफगानिस्तान से उभर रही आतंकवादी विचारधारा, नशीली दवाओं और हथियारों के खतरे को लेकर चिंतित हैं.

भारत और रूस के बीच बैठक

वहीं भारत की चिंता केवल तालिबान के साथ-साथ यहां पर तैयार हो रहे चीन-पाकिस्‍तान और तालिबान के गठजोड़ की भी है जो कई मोर्चों पर भारत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इन मुश्किल हालातों से निपटने के लिए भारत अपने पुराने और भरोसेमंद सहयोगी रूस से हाथ मिलाकर चीन और पाकिस्तान की चाल को नाकाम करने की दिशा में बढ़ रहा है.

इससे पहले 24 अगस्‍त को पीएम नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के साथ अफगानिस्‍तान के मुद्दे पर बात की थी. दोनों ही देश नहीं चाहते हैं कि अफगानिस्‍तान आतंकियों का अड्डा न बन जाए, नहीं तो भविष्य में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

वहीं पाकिस्तान भी रूस से दोस्ती की आस लगाए बैठा है. पाकिस्तान चाहता है कि तालिबान के मुद्दे पर उसे चीन के साथ-साथ अब रूस का भी सहयोग मिले. वहीं भारत चाहता है कि हर हाल में शांति और स्थिरता कायम रहे और आतंक को पनाह न मिले. भारत ऐसा इसलिए चाहता है क्यों कि वह चीन और पाकिस्तान की मंशा से वाकिफ है कि दोनों पड़ोसी देश तालिबान को समर्थन देकर उसे किसी ने किसी भारत के खिलाफ इस्तेमाल करेंगे.

अफगानिस्‍तान में अगर चीन और पाकिस्‍तान को मजबूती मिलती है तो यह भारत के लिए खतरा बन सकती है. भारत ये भी चाहता है कि अफगानिस्‍तान में किए गए उसके निवेश की रक्षा की जाए, साथ ही वहां पर रहने वाले अल्‍पसंख्‍यंकों को किसी तरह की मुश्किलों से न गुजरना पड़े.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 08, 2021 12:32 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).