Chamoli Tunnel Collapse: चमोली के टीएचडीसी प्रोजेक्ट टनल में घुसा मलबा और पानी; 7 मजदूरों की मौत, 14 घायल, बचाव अभियान जारी

उत्तराखंड के चमोली जिले में टीएचडीसी के निर्माणाधीन विष्णुगाड-पिपलगोठी जलविद्युत परियोजना की सुरंग में भूस्खलन और पानी भरने से 7 मजदूरों की मौत हो गई और 14 घायल हो गए. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं.

Chamoli Tunnel Collapse (Photo Credits: X/@KailashVashi)

गोपेश्वर/देहरादून: उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली जिले (Chamoli) में पीपलकोटी के पास मायापुर स्थित एक निर्माणाधीन जलविद्युत सुरंग में गुरुवार शाम अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी घुसने से भीषण हादसा हो गया। इस दुर्घटना में 7 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 14 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं.

टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) की 'विष्णुगाड-पिपलगोठी जलविद्युत परियोजना' की इस सुरंग में घटना के वक्त कुल 22 मजदूर कार्यरत थे. बहु-एजेंसी बचाव अभियान (Multi-Agency Rescue Operation) चलाकर 21 मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया है, जबकि बचे हुए फंसे कर्मचारी तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं. यह भी पढ़ें: Kurla Landslide Video: मुंबई के कुर्ला में भारी बारिश के बाद भूस्खलन, 2 की मौत, मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका

अचानक घुसा मलबा और पानी का तेज बहाव

अधिकारियों के अनुसार, यह घटना गुरुवार (13 अगस्त 2026) शाम करीब 6:30 से 7:00 बजे के बीच घटी, जब हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC) द्वारा बनाए जा रहे टेल-रेस टनल में मजदूर खुदाई का काम कर रहे थे.

अचानक तेज आवाज के साथ सुरंग में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ और भारी मात्रा में पानी व गाद (debris) भर गया। पानी के तेज बहाव के कारण कुछ मजदूर टनल के निकास द्वार की ओर बह गए, जबकि कई अन्य भीतर ही फंस गए.

युद्ध स्तर पर राहत व बचाव अभियान जारी

घटना की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ (NDRF) के 57 जवान, एसडीआरएफ (SDRF) के 42 जवान, आईटीबीपी (ITBP), भारतीय सेना, स्थानीय पुलिस और अग्निशमन दल के जवान मौके पर पहुंचे और संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया.

चमोली में THDC प्रोजेक्ट की सुरंग ढही

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कर रहे हैं स्थिति की निगरानी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राज्य आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष से राहत कार्यों की खुद कमान संभाली. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि टनल में फंसे हर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग युद्ध स्तर पर किया जाए.

चूंकि प्रभावित मजदूरों में झारखंड और छत्तीसगढ़ के निवासी भी शामिल हैं, इसलिए मुख्यमंत्री धामी ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से फोन पर बात कर उन्हें राहत कार्यों और घायलों के समुचित इलाज का भरोसा दिया है.

हिमालयी क्षेत्र में बुनियादी परियोजनाओं की चुनौतियां

अलकनंदा नदी पर बन रही 444 मेगावाट की विष्णुगाड-पिपलगोठी जलविद्युत परियोजना में हुए इस हादसे ने एक बार फिर संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी क्षेत्र में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

चमोली के ज़िलाधिकारी (DM) गौरव कुमार ने पुष्टि की है कि टनल को पूरी तरह खाली कराने और स्थिति सामान्य होने तक बचाव अभियान निर्बाध रूप से जारी रहेगा.

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