8th Pay Commission Latest News: आठवें वेतन आयोग के लिए मेमोरेंडम की समयसीमा समाप्त; जानें पहली से सातवीं CPC तक 'फिटमेंट फैक्टर' ने कैसे बदला देश का पे-स्केल ढांचा

8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारियों और पेंशनभोगियों द्वारा अपनी मांगें व मेमोरेंडम सौंपने की अंतिम समयसीमा 15 जून को समाप्त हो गई है. इस बीच, विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाए जाने की मांगों के बीच आइए जानते हैं कि आजादी के बाद से अब तक फिटमेंट फैक्टर ने किस तरह सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे को बदला है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली, 17 जून: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों (Central Government Employees and Pensioners) के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे में बड़े सुधार के लिए गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) (8th CPC) के समक्ष सुझाव और मेमोरेंडम (Memorandum) सौंपने की औपचारिक समयसीमा 15 जून को समाप्त हो गई है. इस अंतिम समयसीमा के बीतने के बाद अब देश के लगभग 1.1 करोड़ सक्रिय लोक सेवकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों का ध्यान आयोग की आगामी क्षेत्रीय बैठकों और अंतिम रिपोर्ट पर टिक गया है. वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) ₹18,000 और अधिकतम वेतन ₹2,50,000 प्रति माह तय है. अब आठवें वेतन आयोग के मूल्यांकन चरण में प्रवेश करने के साथ ही, कर्मचारी यूनियनें महंगाई के अनुपात में क्रय शक्ति को बनाए रखने के लिए एक उच्च 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) की मांग कर रही हैं. यह भी पढ़ें: 8वां वेतन आयोग: जानिए पहले से 7वें वेतन आयोग तक 'फिटमेंट फैक्टर' ने कैसे बदला देश का सैलरी स्ट्रक्चर

8वें वेतन आयोग का संभावित दृष्टिकोण और मांगें

हालांकि नए वेतन आयोग का अंतिम खाका केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में नए मूल वेतन की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाले गणितीय गुणक यानी 'फिटमेंट फैक्टर' को लेकर बहस तेज है. कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि सरकार 2.15 का रूढ़िवादी बेसलाइन फिटमेंट फैक्टर रख सकती है, जबकि कुछ अन्य मॉडल 7वें वेतन आयोग के 2.57 के बेंचमार्क को ही बनाए रखने का सुझाव देते हैं.

दूसरी तरफ, केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और रक्षा संघों ने न्यूनतम मजदूरी को नए सिरे से तय करने के लिए 3.00 से लेकर 3.83 तक के फिटमेंट फैक्टर की आक्रामक मांग रखी है. आयोग अब देश के विभिन्न राज्यों का दौरा कर रहा है, जिसके तहत 22-23 जून को लखनऊ, इसके बाद जुलाई में भुवनेश्वर और कोलकाता में हितधारकों के साथ बैठकें की जाएंगी. आयोग की अंतिम रिपोर्ट 2027 के मध्य तक आने की उम्मीद है, जिसमें बदलावों को 1 जनवरी 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू किया जा सकता है.

ऐतिहासिक विकासक्रम: पहली से चौथी वेतन आयोग की यात्रा

भारत में सरकारी कर्मचारियों के वेतन संशोधन का एक दशक पुराना चक्र रहा है, जिसका उद्देश्य आर्थिक बदलावों के अनुसार सामंजस्य बिठाना है। शुरुआती वेतन आयोगों का मुख्य फोकस जीवन स्तर को सुव्यवस्थित करने पर था:

आधुनिक युग के संशोधन: 5वीं से 7वीं वेतन आयोग में 'फिटमेंट फैक्टर' का आगमन

इसके बाद के वेतन आयोगों में एक निश्चित गुणांक (Fitment Factor) की शुरुआत की गई, जिसने वेतन वृद्धि को सीधे प्रतिशत-आधारित स्केलिंग से जोड़ दिया:

 

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