Pangong Lake Off-Roading: लद्दाख में हुड़दंग मचाने वाले पर्यटकों पर बड़ी कार्रवाई; पैंगोंग झील में स्टंट और तिब्बती चिंकारा को दौड़ाने पर ₹2 लाख का जुर्माना, गाड़ियां जब्त
लद्दाख ने पैंगोंग झील पर गैर-कानूनी ऑफ-रोडिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की (Photo Credits: X\@ANI)

लेह: अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वादियों के लिए मशहूर केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख (Ladakh) में हुड़दंग मचाने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले पर्यटकों पर प्रशासन ने पहली बार बड़ा क्रैकडाउन किया है. सुरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों और संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों (Ecologically Sensitive Zones) में अवैध ऑफ-रोडिंग और स्टंट करने के आरोप में चार पर्यटकों पर कुल ₹2 लाख का भारी जुर्माना लगाया गया है, साथ ही उनकी एसयूवी (SUV) कारों को भी जब्त कर लिया गया है. इनमें से एक बेहद गंभीर मामले में एक पर्यटक अपनी थार गाड़ी से वन्यजीव अभयारण्य के भीतर एक लुप्तप्राय तिब्बती चिंकारा (Tibetan Gazelle) को बेरहमी से दौड़ाता हुआ कैमरे में कैद हुआ था. लद्दाख के इतिहास में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पर्यटकों पर की गई यह अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई है. यह भी पढ़ें: Heatwave In Kashmir: कश्मीर घाटी में भीषण गर्मी का प्रकोप, सामान्य से 8 डिग्री ऊपर पहुंचा पारा; जानें कब मिलेगी राहत

प्रशासन ने क्यों लगाया पर्यटकों पर भारी जुर्माना?

यह पूरी कार्रवाई लेह वन्यजीव प्रभाग (Leh Wildlife Division) द्वारा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act) के तहत की गई है. वन्यजीव विभाग के अधिकारियों ने नियमित गश्त और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो की मदद से इन नियमों का उल्लंघन करने वाले चार वाहनों को चिन्हित किया था.

प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रत्येक दोषी पर्यटक पर ₹50,000 का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है. इसके साथ ही, जब तक दोषियों ने जुर्माने की पूरी राशि जमा नहीं कर दी, तब तक उनके वाहनों को रिलीज नहीं किया गया. वन्यजीव विभाग के अनुसार, नियमों का यह उल्लंघन पैंगोंग झील के पास स्थित मेराक और लुकुंग, हानले के नुरबू ला और नुब्रा घाटी के सुमुर जैसे अत्यधिक संवेदनशील इलाकों में किया गया था.

जब चांगथांग अभयारण्य में तिब्बती चिंकारा को दौड़ाया

प्रशासन के सामने आई सबसे गंभीर घटना चांगथांग शीत मरुस्थल वन्यजीव अभयारण्य (Changthang Cold Desert Wildlife Sanctuary) के भीतर नुरबू ला के पास की है. सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक ऑफ-रोड एसयूवी कार को इस क्षेत्र के बेहद दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीव, तिब्बती चिंकारा (Tibetan Gazelle) का पीछा करते हुए देखा गया था.

इस वीडियो का संज्ञान लेते हुए वन्यजीव अधिकारियों और स्थानीय पुलिस ने हानले इलाके में पूरी रात तलाशी अभियान चलाया. आखिरकार पुलिस ने गाड़ी को एक होमस्टे के बाहर ट्रैक कर लिया, जिसके बाद वाहन को तुरंत सील कर चालक के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया.

लद्दाख ने पैंगोंग झील में गाड़ी ले जाने वाले पर्यटकों पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

पैंगोंग झील और बरसाती नालों में उतारीं गाड़ियां

एक अन्य घटना में, कुछ पर्यटक अपनी एसयूवी को पैंगोंग झील के भीतर मेराक के पास पानी में उतारकर स्टंट ड्राइविंग और रील्स बना रहे थे. इससे न केवल झील का पानी प्रदूषित हुआ, बल्कि वहां के नाजुक जलीय इकोसिस्टम को भी भारी नुकसान पहुंचा. इसी तरह, लुकुंग क्षेत्र के पास भी एक गाड़ी चांगथांग अभयारण्य की सीमा को तोड़कर भीतर रेंगती पाई गई.

इसके अलावा, काराकोरम (नुब्रा-शायोक) वन्यजीव अभयारण्य के भीतर एक अन्य एसयूवी को प्राकृतिक पहाड़ी नदी और बरसाती नाले के बीचो-बीच दौड़ते हुए पकड़ा गया, जिससे वहां की वनस्पतियों और छोटे जीवों के पर्यावास को गंभीर नुकसान पहुंचा था.

उपराज्यपाल वीके सक्सेना की सख्त चेतावनी

लद्दाख प्रशासन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में पर्यावरण से खिलवाड़ करने वाले किसी भी रोमांचक खेल या अवैध एडवेंचर एक्टिविटी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) वीके सक्सेना ने पर्यटकों से बेहद जिम्मेदार व्यवहार करने की अपील की है.

प्रशासनिक चेतावनी: लद्दाख की पारिस्थितिकी अत्यंत संवेदनशील (Fragile Ecosystem) है. संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों के भीतर या उनके आसपास किसी भी प्रकार की ऑफ-रोडिंग, कचरा फैलाना या लुप्तप्राय प्रजातियों को परेशान करना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत एक गंभीर और दंडनीय अपराध है. नियमों का उल्लंघन करने वालों को जेल की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है.