Citizenship New Rules: केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने देश में नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है. मंत्रालय ने 'नागरिकता नियम, 2009' में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए एक नई अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी की है. इस नए आदेश के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए उन प्रवासियों के लिए अपने मूल देश के पासपोर्ट से जुड़े विवरण साझा करना अनिवार्य कर दिया गया है जो भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर रहे हैं. यह नया प्रावधान सुरक्षा और दस्तावेजों की जांच को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया है.
पासपोर्ट की स्थिति और नंबर बताना होगा जरूरी
गृह मंत्रालय द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, नागरिकता नियम, 2009 में एक नया पैराग्राफ जोड़ा गया है. इसके मुताबिक, यदि आवेदक के पास अपने मूल देश (पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश) की सरकार द्वारा जारी किया गया कोई भी सक्रिय (एक्टिव) पासपोर्ट है, तो उसे आवेदन के समय उसका पूरा विवरण देना होगा. आवेदकों को पासपोर्ट नंबर, जारी होने की तारीख, जारी होने का स्थान और उसके एक्सपायर होने की तिथि की सटीक जानकारी देनी होगी. यह भी पढ़े: पहली बार CAA के तहत 14 लोगों को मिली भारतीय नागरिकता, मोदी सरकार ने जारी किया प्रमाण पत्र
गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला
गृह मंत्रालय (MHA) ने एक अधिसूचना जारी कर 'नागरिकता नियम, 2009' में संशोधनों की घोषणा की है, जिसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के आवेदकों के लिए पासपोर्ट संबंधी जानकारी देने से जुड़े नए प्रावधान लागू किए गए हैं। pic.twitter.com/QXKILnue6T
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 19, 2026
नागरिकता मिलने के 15 दिनों के भीतर सरेंडर करने का नियम
संशोधित नियमों में यह भी साफ किया गया है कि यदि आवेदक के पास नागरिकता की मंजूरी के समय कोई वैध या एक्सपायर हो चुका पासपोर्ट है, तो उसे तय प्रक्रिया का पालन करना होगा. भारतीय नागरिकता का आवेदन मंजूर होने के 15 दिनों के भीतर आवेदक को अपना वह पासपोर्ट संबंधित डाक विभाग के वरिष्ठ अधीक्षक या डाक अधीक्षक के पास सरेंडर (जमा) करना होगा. इसके बाद इस सरेंडर की आधिकारिक जानकारी भी संबंधित अधिकारियों को देनी होगी.
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 से जुड़ा संदर्भ
यह नया प्रावधान नियमों की अनुसूची IC (Schedule IC) के बाद जोड़ा जाएगा. यह अनुसूची मुख्य रूप से उन अफगान, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी नागरिकों के लिए है जो गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) से ताल्लुक रखते हैं और भारत की नागरिकता हासिल करने के इच्छुक हैं.
विदित हो कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) के तहत इन तीन पड़ोसी देशों से 31 दिसंबर 2014 से पहले बिना वैध दस्तावेजों के भारत आए प्रवासियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया था. अब इस नए संशोधन के जरिए सरकार ने इन आवेदकों के पुराने या वर्तमान पासपोर्ट के रिकॉर्ड को भी प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा बना दिया है.













QuickLY