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Chandipura Virus Alert: बच्चों की मौतों के बीच बढ़ी चिंता, जानें क्या है चांदीपुरा वायरस, कैसे फैलता है और बचाव के तरीके

चांदीपुरा वायरस कोई नई बीमारी नहीं है. इससे पहले भी गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और आसपास के कई राज्यों में इसके मामले सामने आ चुके हैं. हालांकि, हर बार इसका प्रकोप इस बात की याद दिलाता है कि यह संक्रमण खासकर बच्चों में बेहद तेजी से गंभीर रूप ले सकता है.

Chandipura Virus Alert: बच्चों की मौतों के बीच बढ़ी चिंता, जानें क्या है चांदीपुरा वायरस, कैसे फैलता है और बचाव के तरीके
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

Chandipura Virus Alert: किसी बीमारी से बच्चों की मौत की खबर सामने आती है तो स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में डर और कई सवाल पैदा होते हैं. गुजरात में हाल ही में चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) से जुड़े एक्यूट एन्सेफलाइटिस (Acute Encephalitis) के ताजा मामलों और 22 संदिग्ध बच्चों की मौत के बाद यही स्थिति देखने को मिल रही है. राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, कई अन्य संदिग्ध मामलों की भी जांच की जा रही है. Chandipura Virus Alert: बच्चों में तेजी से फैल रहा चांदीपुरा वायरस, जानें लक्षण, बचाव और संक्रमण होते ही क्या करें?

चांदीपुरा वायरस कोई नई बीमारी नहीं है. इससे पहले भी गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और आसपास के कई राज्यों में इसके मामले सामने आ चुके हैं. हालांकि, हर बार इसका प्रकोप इस बात की याद दिलाता है कि यह संक्रमण खासकर बच्चों में बेहद तेजी से गंभीर रूप ले सकता है.

सामान्य वायरल संक्रमण की तुलना में चांदीपुरा वायरस कुछ ही घंटों या एक-दो दिनों के भीतर मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है. ऐसे में समय पर पहचान और इलाज मरीज की जान बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं. आइए जानते हैं कि यह वायरस क्या है, कैसे फैलता है, बच्चों को इससे ज्यादा खतरा क्यों होता है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है.

क्या है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस Rhabdoviridae परिवार का RNA वायरस है. इसी परिवार में रेबीज (Rabies) वायरस भी शामिल है, हालांकि दोनों बीमारियां पूरी तरह अलग हैं. इस वायरस की पहचान पहली बार 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी, जिसके नाम पर इसका नाम रखा गया. तब से भारत में समय-समय पर इसके प्रकोप देखने को मिले हैं, जिनमें ज्यादातर बच्चे प्रभावित हुए हैं.

ICMR और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) की जांच में पाया गया है कि यह संक्रमण मध्य और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मानसून और उसके बाद के मौसम में अधिक देखने को मिलता है. इस दौरान कीटों की संख्या बढ़ने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है.

चांदीपुरा वायरस का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह एक्यूट एन्सेफलाइटिस (Acute Encephalitis) यानी मस्तिष्क में सूजन का कारण बन सकता है. यह स्थिति मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है.

शुरुआत में सामान्य बुखार जैसा लगता है संक्रमण

चांदीपुरा वायरस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई देते हैं. फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग, नई दिल्ली के पीडियाट्रिक्स विभाग के सीनियर डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. विवेक जैन के अनुसार, संक्रमण की शुरुआत अचानक होती है. मरीज को तेज बुखार, तेज सिरदर्द, उल्टी और अत्यधिक कमजोरी महसूस हो सकती है. बच्चों में अत्यधिक नींद आना, चिड़चिड़ापन या भ्रम जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.

बारिश के मौसम में वायरल बुखार आम होने के कारण लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन चांदीपुरा वायरस का संक्रमण तेजी से गंभीर हो सकता है. डॉ. जैन के मुताबिक, कई मामलों में संक्रमण 24 से 48 घंटे के भीतर मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है. इसके बाद मरीज को दौरे पड़ना, बेहोशी या होश खोने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.

डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी बच्चे को तेज बुखार के साथ बार-बार उल्टी, अत्यधिक सुस्ती, भ्रम, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे घर पर इलाज करने की बजाय तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए.

कैसे फैलता है चांदीपुरा वायरस?

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई (Sandfly) के काटने से फैलता है. सैंडफ्लाई आकार में मच्छर से काफी छोटी होती है. कुछ शोधों में कुछ प्रजाति के मच्छरों की भूमिका की भी संभावना जताई गई है, लेकिन प्रमुख वाहक सैंडफ्लाई ही मानी जाती है.

डॉ. विवेक जैन के अनुसार, चांदीपुरा वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलता. संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई के काटने से होता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, सैंडफ्लाई अक्सर कच्ची दीवारों की दरारों, नम जगहों, पशुओं के बाड़ों और गंदगी वाले इलाकों में पनपती हैं.

बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा क्यों होता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली पूरी तरह विकसित नहीं होती. इसलिए वायरस उनके शरीर में तेजी से फैल सकता है.

इसके अलावा

बच्चों में इस वायरस के खिलाफ पहले से प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती.

वायरल एन्सेफलाइटिस बच्चों में अधिक गंभीर रूप ले सकता है.

बच्चे बाहर ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे संक्रमित कीटों के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है.

कुपोषण और खराब स्वच्छता भी जोखिम बढ़ा सकती है.

बचाव ही सबसे बड़ा उपाय

फिलहाल चांदीपुरा वायरस के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा या व्यापक रूप से उपलब्ध वैक्सीन नहीं है. इसलिए बचाव सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है.

डॉ. विवेक जैन के अनुसार:

कीड़ों के काटने से बचें.

मच्छरदानी या सैंडफ्लाई नेट का इस्तेमाल करें.

बच्चों को पूरे बाजू के कपड़े पहनाएं.

डॉक्टर की सलाह के अनुसार कीट-रोधी (Insect Repellent) का उपयोग करें.

घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखें.

दीवारों की दरारों और नम स्थानों की नियमित सफाई करें.

कीटों के पनपने वाली जगहों को खत्म करें.

इसके अलावा, यदि किसी बच्चे को अचानक तेज बुखार हो तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें. समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं और मौत के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 09, 2026 12:53 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).