Chandipura Virus Alert: बच्चों में तेजी से फैल रहा चांदीपुरा वायरस, जानें लक्षण, बचाव और संक्रमण होते ही क्या करें?
चांदीपुरा वायरस तेजी से मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है और गंभीर मामलों में 24 से 48 घंटे के भीतर मरीज की हालत बिगड़ सकती है. ऐसे में बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखने पर बिल्कुल भी लापरवाही न करें. समय पर अस्पताल पहुंचना और शुरुआती इलाज ही इस खतरनाक संक्रमण से जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है.
Chandipura Virus Alert: देश के कई राज्यों में चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. हाल के महीनों में गुजरात समेत कई राज्यों में बच्चों की मौत के मामलों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वायरस मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है और गंभीर मामलों में मस्तिष्क में सूजन (Encephalitis) पैदा कर सकता है. समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. Chandipura Virus Outbreak: गुजरात और राजस्थान में चांदीपुरा वायरस का कहर; जानें इसके लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के उपाय
क्या है चांदीपुरा वायरस?
चांदीपुरा वायरस Rhabdoviridae परिवार का एक RNA वायरस है. इसकी पहचान पहली बार 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गांव में हुई थी, जिसके नाम पर इसका नाम रखा गया. यह वायरस Acute Encephalitis Syndrome (AES) यानी दिमाग में सूजन का कारण बन सकता है.
कैसे फैलता है चांदीपुरा वायरस?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (Sand Fly) के काटने से फैलता है. बारिश के मौसम में नमी और गंदगी बढ़ने से सैंडफ्लाई तेजी से पनपती हैं, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. यह वायरस सामान्य संपर्क, हाथ मिलाने या साथ बैठने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता.
बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा क्यों होता है?
डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए वायरस उनके शरीर में तेजी से असर करता है.
इसके अलावा.
बच्चे अधिक समय बाहर खेलते हैं, जिससे सैंडफ्लाई के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है.
कुपोषण और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण को गंभीर बना सकती है.
ग्रामीण और भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहने वाले बच्चों में जोखिम अधिक होता है.
घर के आसपास गंदगी, दीवारों में दरारें और पशुओं का बाड़ा भी संक्रमण का खतरा बढ़ाते हैं.
चांदीपुरा वायरस के लक्षण क्या हैं?
शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ घंटों के भीतर मरीज की हालत गंभीर हो सकती है.
मुख्य लक्षण
तेज बुखार.
सिरदर्द.
बार-बार उल्टी.
कमजोरी और सुस्ती.
दौरे (Seizures).
बेहोशी.
भ्रम या अत्यधिक नींद आना.
गर्दन या शरीर में अकड़न.
मस्तिष्क में सूजन (Encephalitis).
संक्रमण हो जाए तो तुरंत क्या करें?
अगर किसी बच्चे में तेज बुखार के साथ बार-बार उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज न करें.
मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज लेकर जाएं.
घर पर इलाज या केवल बुखार की दवा देकर इंतजार न करें.
डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न दें.
मरीज की सांस, ब्लड प्रेशर और न्यूरोलॉजिकल स्थिति की अस्पताल में लगातार निगरानी जरूरी होती है.
समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं और मौत का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है.
क्या इसका इलाज या वैक्सीन है?
फिलहाल चांदीपुरा वायरस की कोई वैक्सीन या विशेष एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है. डॉक्टर मरीज के लक्षणों के आधार पर इलाज (Supportive Treatment) करते हैं. इसलिए समय पर अस्पताल पहुंचना ही सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है.
कैसे करें बचाव?
बच्चों को सैंडफ्लाई और अन्य कीटों के काटने से बचाएं.
मच्छरदानी और कीट-रोधी (Insect Repellent) का इस्तेमाल करें.
बच्चों को पूरे बाजू के कपड़े पहनाएं.
घर और आसपास साफ-सफाई रखें.
कचरा और गंदा पानी जमा न होने दें.
दीवारों की दरारों और नम जगहों की नियमित सफाई करें.
तेज बुखार या न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
अब तक कितने लोगों की हुई मौत?
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, गुजरात में चांदीपुरा वायरस के संक्रमण से करीब 22 बच्चों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा राजस्थान सहित अन्य राज्यों में भी संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहा है.
क्यों जरूरी है सतर्क रहना?
चांदीपुरा वायरस तेजी से मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है और गंभीर मामलों में 24 से 48 घंटे के भीतर मरीज की हालत बिगड़ सकती है. ऐसे में बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखने पर बिल्कुल भी लापरवाही न करें. समय पर अस्पताल पहुंचना और शुरुआती इलाज ही इस खतरनाक संक्रमण से जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 08, 2026 09:49 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

