Defamation Case: बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने CJP के सौरभ दास और नेताओं पर ठोका ₹2 करोड़ का मानहानि मुकदमा; AI जनरेटेड पोस्ट पर विवाद

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कॉकरोच जनता पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में ₹2 करोड़ का मानहानि का मुकदमा दायर किया है.

BJP leader Gaurav Bhatia and CJP founder Abhijeet Dipke (Photo Credits: X)

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में एक दीवानी मानहानि का मुकदमा दायर करते हुए ₹2 करोड़ के हर्जाने की मांग की है. यह मुकदमा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके प्रमुख नेताओं—सौरभ दास, आशुतोष रांका और अभिजीत दिपके—के खिलाफ दायर किया गया है.

मंगलवार, 8 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी देते हुए भाटिया ने कहा कि इस मामले पर दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई सूचीबद्ध की गई है. उन्होंने लिखा, "जब आरोप अपनी सीमा लांघते हैं, तब कानून अपनी लकीर खींचता है... ना कोई सोशल मीडिया ट्रायल, ना बयानों की जंग. सिर्फ तथ्य, सबूत और कानून का राज." यह भी पढ़ें: Jantar Mantar Assault Case: CJP नेताओं ने स्वतंत्र भारद्वाज पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज करने की मांग की (Video)

क्या है विवाद और AI जनरेटेड ग्राफिक का मामला?

यह पूरा विवाद सोशल मीडिया पर एक विवादित ग्राफिक पोस्ट किए जाने के बाद शुरू हुआ था:

गौरव भाटिया ने CJP नेताओं से मानहानि के लिए 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की

पोस्ट डिलीट, लेकिन सोशल मीडिया पर तकरार जारी

चेतावनी के बाद सौरभ दास ने मूल पोस्ट को हटा दिया, लेकिन उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर स्पष्ट किया कि सामग्री एआई-जनरेटेड थी. इसके साथ ही उन्होंने सवाल खड़ा किया कि क्या भाटिया उस बयान की मूल भावना से असहमत हैं.

दूसरी ओर, सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने दास के अकाउंट से उस ग्राफिक को री-पोस्ट करते हुए भाजपा नेतृत्व पर सवाल उठाए. कानूनी मामलों की रिपोर्टिंग करने वाले पोर्टल Bar and Bench के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित दुष्प्रचार मानते हुए भाटिया ने कानूनी कदम उठाने का निर्णय लिया.

दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका: मानहानि और स्थायी रोक की मांग

गौरव भाटिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय के साधारण मूल नागरिक क्षेत्राधिकार (Ordinary Original Civil Jurisdiction) के तहत यह याचिका दाखिल की है:

भाटिया ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर जुबानी जंग लड़ने के बजाय सच की परीक्षा अदालत के नियमों और साक्ष्यों के तहत कराई जाएगी. मामले की प्रारंभिक सुनवाई उच्च न्यायालय में जल्द शुरू होने जा रही है.

Share Now