Bihar Horror: बिहार में चौंकाने वाला खुलासा, श्मशान की चिता से निकला कोयला होटल-रेस्तरां में इस्तेमाल, स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा
कोयले पर बने खाने से कैंसर, फेफड़ों की बीमारी, किडनी और लीवर को नुकसान जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. विशेषज्ञों ने लोगों से ऐसे खाद्य पदार्थों से बचने की सलाह दी है. जांच में यह भी सामने आया है कि यह अवैध कारोबार नया नहीं है, बल्कि कई सालों से चल रहा है और हालिया ऊर्जा संकट के कारण इसमें तेजी आई है. यह नेटवर्क पटना के अलावा फतुहा, दानापुर और दीघा जैसे इलाकों तक फैला हुआ बताया जा रहा है.
Funeral Pyre Charcoal Being Sold to Hotels And Restaurants In Patna Amid LPG Crisis: बिहार की राजधानी पटना से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जहां श्मशान घाटों की चिताओं से निकला कोयला कथित तौर पर होटल, रेस्तरां और ठेलों पर खाना बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है. एक जांच रिपोर्ट में इस अवैध कारोबार का खुलासा हुआ है, जिसमें बांस घाट और गुलबी घाट जैसे प्रमुख श्मशान घाटों से अधजली लकड़ी निकालकर उसे सस्ते ईंधन के रूप में बेचा जा रहा है.
दैनिक भास्कर रिपोर्ट के मुताबिक, एलपीजी सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण छोटे होटल और ढाबा संचालक सस्ते विकल्प की तलाश में इस तरह के कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं. एजेंट श्मशान घाटों पर चिता पूरी तरह जलने से पहले ही आग बुझाकर अधजली लकड़ी निकाल लेते हैं और उसे छांटकर बोरी में भरकर सप्लाई करते हैं.
बताया जा रहा है कि बाजार में लकड़ी का कोयला जहां करीब 25 रुपये प्रति किलो मिलता है, वहीं यह "श्मशान कोयला" 6 से 9 रुपये प्रति किलो तक में बेचा जा रहा है. एक बोरी की कीमत करीब 600 रुपये से शुरू होकर 1000 रुपये तक जाती है. मांग इतनी बढ़ गई है कि रोजाना सैकड़ों बोरी कोयला सप्लाई किया जा रहा है.
पटना के होटलों और रेस्तरांओं को बेचा जा रहा है अंतिम संस्कार के लिए चिता का कोयला
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एजेंट्स का दावा है कि कोयले को साफ किया जाता है, लेकिन इसमें छोटे हड्डियों के टुकड़े भी मिले होने की बात सामने आई है. उनका कहना है कि तंदूर की तेज आंच में सब जल जाता है और खाने में किसी तरह की गंध नहीं आती.
हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे बेहद खतरनाक बताया है. डॉक्टरों के अनुसार इस तरह के कोयले में कैंसर पैदा करने वाले तत्व जैसे पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAHs) मौजूद हो सकते हैं. इसके अलावा इसमें आर्सेनिक, सीसा और पारा जैसे भारी धातुओं के अंश भी हो सकते हैं.
ऐसे कोयले पर बने खाने से कैंसर, फेफड़ों की बीमारी, किडनी और लीवर को नुकसान जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. विशेषज्ञों ने लोगों से ऐसे खाद्य पदार्थों से बचने की सलाह दी है. जांच में यह भी सामने आया है कि यह अवैध कारोबार नया नहीं है, बल्कि कई सालों से चल रहा है और हालिया ऊर्जा संकट के कारण इसमें तेजी आई है. यह नेटवर्क पटना के अलावा फतुहा, दानापुर और दीघा जैसे इलाकों तक फैला हुआ बताया जा रहा है.