26 मार्च की बड़ी खबरें और अपडेट्स

भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.- ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अपनी शर्तें बताईं

- चीनी विदेश मंत्री बोले, भारत और चीन एक दूसरे के लिए खतरा नहीं

- उत्तर कोरिया पहुंचे बेलारूस के राष्ट्रपति, किम जोंग के साथ की दोस्ती की संधि

- यूक्रेन के ड्रोन हमलों में रूस के अहम पेट्रोलियम निर्यात केंद्र को नुकसान

- नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश

चीनी विदेश मंत्री बोले, भारत और चीन एक दूसरे के लिए खतरा नहीं

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि भारत और चीन एक दूसरे के लिए खतरा नहीं हैं और “दोनों देश प्रतिस्पर्धियों की बजाय साझेदार हैं.” न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, वांग यी ने चीन में भारत के राजदूत प्रदीप कुमार रावत से कहा कि दोनों देशों के संबंध सही रास्ते पर हैं. और, बीजिंग पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को बढ़ाने के लिए नई दिल्ली के साथ काम करने को तैयार है. वांग यी ने भारत-चीन संबंधों के विकास में प्रदीप कुमार रावत के प्रयासों और योगदान की भी सराहना की.

चीन में भारतीय राजदूत के तौर पर प्रदीप कुमार रावत का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. चीनी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान चीन के मजबूत समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों का स्थिर विकास, दोनों पक्षों के हित में है और वैश्विक महत्व भी रखता है. उन्होंने आगे कहा कि भारत भी चीन के साथ सहयोग और समन्वय बढ़ाने का इच्छुक है.

भारत ने वरिष्ठ राजनयिक विक्रम दुरईस्वामी को चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया है. दुरईस्वामी 1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी हैं. वे वर्तमान में ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त के पद पर कार्यरत हैं. विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रेस रिलीज में बताया है कि वे जल्द ही अपना नया पद संभालेंगे. हालांकि, इसकी कोई तारीख नहीं बताई गई है.

उत्तर कोरिया पहुंचे बेलारूस के राष्ट्रपति, किम जोंग के साथ की दोस्ती की संधि

उत्तर कोरिया और बेलारूस में "दोस्ती और सहयोग" नाम की एक संधि हुई है. 25 मार्च को दोनों देशों के नेताओं, उत्तर कोरिया के किम जोंग उन और बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जांडर लुकाशेंको ने इस संधि पर दस्तखत किए. 24 मार्च को लुकाशेंको पहली बार उत्तर कोरिया पहुंचे, जहां किम जोंग उन ने उनका भव्य स्वागत किया.

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इन दोनों देशों में कई समानताएं हैं. दोनों रूस के छेड़े गए यूक्रेन युद्ध में मॉस्को का समर्थन करते हैं. माना जाता है कि जंग में उत्तर कोरिया के करीब 2,000 सैनिक मारे जा चुके हैं. यूक्रेन युद्ध में समान स्टैंड के अलावा दोनों ही देशों पर पश्चिमी देशों ने आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं और दोनों पर ही मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का आरोप है.

संधि के मौके पर दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के लिए समर्थन जताया. राष्ट्रपति लुकाशेंको ने कहा, "वैश्विक बदलाव की इस आधुनिक सच्चाई के बीच, ऐसे समय में जब दुनिया की मुख्य शक्तियां अंतरराष्ट्रीय कानून के मानकों की खुलेआम अनदेखी करती हैं और उनका उल्लंघन करती हैं, स्वतंत्र देशों को अपनी संप्रभुता की रक्षा और अपने नागरिकों की बेहतरी के प्रयासों को मजबूती देने के लिए ज्यादा करीबी सहयोग करना चाहिए." वहीं, किम ने कहा, "हम बेलारूस पर पश्चिमी देशों के अवैध दबाव का विरोध करते हैं और बेलारूस के नेतृत्व द्वारा अपनी सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता व आर्थिक विकास के लिए उठाए जा रहे कदमों का समर्थन करते हैं."

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इस पर बेलारूस के विदेश मंत्री माक्सिम रायशेंकोव ने बताया कि "दोस्ती और सहयोग" संधि के अलावा दोनों पक्ष खेती और सूचना समेत कई क्षेत्रों में परस्पर सहयोग करने पर सहमत हुए हैं. बेलारूस की सरकारी समाचार एजेंसी बेल्टा से बातचीत में उन्होंने कहा, "हमारी सबसे ज्यादा दिलचस्पी मित्रवत और सहयोगपूर्ण रिश्ते मजबूत करने में है. यहां हमारे दोस्त हैं और वे हमारा इंतजार कर रहे हैं. उसी तरह, जैसे हम बेलारूस में उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं."

नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश

नेपाल में पिछले साल सितंबर में हुए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित एक पैनल ने अनुशंसा की है कि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ “लापरवाही” का मुकदमा चलाया जाए, क्योंकि वे दर्जनों मौतों को रोकने में नाकाम रहे. पैनल ने माना है कि ओली ने प्रदर्शनों के पहले दिन कई घंटे तक हुई गोलीबारी को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया. इस गोलीबारी में कम-से-कम 19 युवा प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी.

नेपाल में हुए इन भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों को जेन-जी आंदोलन भी कहा गया था, क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में युवा शामिल थे. इन प्रदर्शनों के दौरान, दो दिन तक हिंसा हुई थी. पैनल के मुताबिक, हिंसा में कुल 76 लोग मारे गए थे और 2,500 से ज्यादा लोग घायल हुए. पैनल ने 25 मार्च की रात को जारी की गई 970 पन्नों की रिपोर्ट में कहा, "कार्यकारी प्रमुख होने के नाते...ओली को किसी भी अच्छी या बुरी बात के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए."

पैनल ने नेपाल के तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक और पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खपुंग को भी जिम्मेदार ठहराया है और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अगर पैनल की अनुशंसा को मानते हुए इनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाता है और कोर्ट इन्हें दोषी मान लेता है तो इन तीनों को 10 साल कैद तक की सजा हो सकती है. हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि मुकदमा चलाने से पहले सरकार को इसकी आपराधिक जांच करवानी होगी.

यूक्रेनी ड्रोन हमलों में रूस की तेल निर्यात क्षमता को बड़ा नुकसान

यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रूस की तेल निर्यात क्षमता पर बड़ा असर पड़ा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ड्रोन हमलों की चपेट में आकर रूसी निर्यात का कम-से-कम 40 फीसदी हिस्सा प्रभावित हुआ है. अलेक्सांदर ड्रोजदेंको, लेनिनग्राद ओब्लास्ट के गवर्नर हैं. उन्होंने टेलिग्राम चैनल पर बताया कि उत्तरी लेनिनग्राद क्षेत्र के ऊपर 20 से ज्यादा ड्रोन गिराए गए. गवर्नर ड्रोजदेंको ने कहा, "कीरिशी जिले पर हमले को नाकाम किया जा रहा है. औद्योगिक क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है."

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गवर्नर ने यह साफ नहीं किया कि इंडस्ट्रियल एरिया का कौन सा हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है. मगर लेनिनग्राद ओब्लास्ट के कीरिशी शहर में केआईएनईएफ नाम का प्लांट है. यह रूस की सबसे विशाल और सबसे अहम तेल रिफाइनरियों में है. रॉयटर्स ने उद्योग से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया कि साल 2024 में इस रिफाइनरी ने प्रति दिन 350,000 बैरल तेल प्रॉसेस किया. इसमें करीब 20 लाख टन पेट्रोल, लगभग 70 लाख टन डीजल, 60 लाख टन से ज्यादा फ्यूल ऑयल और 6 लाख टन तारकोल का उत्पादन शामिल था. रूस की कुल तेल रिफाइनिंग मात्रा में इसकी हिस्सेदारी 6.6 प्रतिशत थी. पिछले साल भी यूक्रेन ने इस प्लांट को कई बार निशाना बनाया था.

इससे पहले 25 मार्च को रूसी अधिकारियों ने बताया था कि यूक्रेनी ड्रोन हमले के कारण रूस के ऊस्ट-लूगा में आग लगी. खबरों के मुताबिक, बाल्टिक सागर के बंदरगाह ऊस्ट-लूगा और प्रिमोर्स्क से भी तेल और तेल उत्पादों की लोडिंग बंद करनी पड़ी है. ये दोनों भी लेनिनग्राद ओब्लास्ट में हैं और रूस के पेट्रोलियम निर्यात का बड़ा केंद्र हैं. मॉस्को टाइम्स ने गवर्नर ड्रोजदेंको के हवाले से बताया कि अकेले प्रिमोर्स्क बंदरगाह ही प्रति दिन 10 लाख बैरल से ज्यादा तेल का निर्यात कर सकता है. वहीं, ऊस्ट-लूगा पोर्ट की निर्यात क्षमता करीब 7 लाख बैरल तेल प्रति दिन है. ईरान युद्ध के कारण पहले ही वैश्विक ऊर्जा बाजार बेहद दबाव में है.

अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव को ईरान ने किया नामंजूर, अपनी शर्तें बताईं

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बुधवार, 25 मार्च को कहा कि ईरान युद्ध खत्म करने के लिए समझौता करीब है. उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि ईरानी नेताओं के साथ बातचीत जारी है और "वे समझौता करना तो चाहते हैं, लेकिन यह कहने से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें अपने ही लोगों द्वारा मार दिया जाएगा." खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को एक 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव भेजा था.

न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, तेहरान ने इस प्रस्ताव को नकार दिया है और युद्ध खत्म करने के लिए अपनी शर्तें बताई हैं. ईरानी सरकारी टीवी पर प्रसारित शर्तों के मुताबिक, युद्ध तभी खत्म होगा जब ईरान के अधिकारियों की हत्या रुक जाएगी, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उसके खिलाफ फिर कोई युद्ध नहीं होगा, युद्ध के लिए हर्जाना दिया जाएगा और होरमुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता को स्वीकार किया जाएगा.

न्यूज एजेंसी एपी ने दो पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि अमेरिका के प्रस्ताव में ईरान को प्रतिबंधों से छूट देने, उसका परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन बंद करने, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर अंकुश लगाने, क्षेत्रीय सहयोगियों के लिए फंडिंग बंद करने और होरमुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खोलने जैसी शर्तों थीं.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा है कि तेहरान अमेरिका के प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है लेकिन युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत करने की उसकी कोई मंशा नहीं है. अरागची ने कहा, "मित्र देशों के जरिए हमें संदेश मिले हैं और जवाब में हमने अपना स्टैंड बताया है और जरूरी चेतावनियां दी हैं. इसे बातचीत या संवाद नहीं कहा जाता है."

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