Bhiwandi Stray Dog Attack: भिवंडी में आवारा कुत्तों का आतंक, कामतघर में कुछ ही घंटों में 32 लोगों को बनाया शिकार, 4 महीनों में 3,292 डॉग बाइट के मामले
भिवंडी के कामतघर इलाके में महज कुछ घंटों के भीतर 32 लोग आवारा कुत्तों के हमले का शिकार होकर अस्पताल पहुंचे. शहर में पिछले चार महीनों के दौरान कुत्तों के काटने के 3,292 मामले सामने आए हैं
Bhiwandi Stray Dog Attack: महाराष्ट्र के भिवंडी स्थित कामतघर इलाके में रविवार को आवारा कुत्तों के हमले की एक खौफनाक घटना सामने आई. यहां महज कुछ ही घंटों के भीतर करीब 32 लोगों को कुत्तों ने काट लिया, जिन्हें इलाज के लिए आईजीएम (IGM) उप-जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, घायलों में दो बच्चे भी शामिल हैं, जिन्हें गंभीर चोटें (कैटेगरी-III डॉग बाइट) आने के बाद बाल रोग वार्ड में भर्ती किया गया है.
आईजीएम अस्पताल की डॉक्टर माधवी पेढारे ने बताया कि बच्चों को गंभीर घाव होने के कारण त्वरित चिकित्सा देखभाल में रखा गया है. हालांकि स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि एक ही पागल कुत्ते ने इतने लोगों पर हमला किया, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
4 महीनों में दर्ज हुए 3,292 मामले
भिवंडी शहर में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जुलाई के बीच चार महीनों में कुल 3,292 डॉग-बाइट के मामले दर्ज किए गए हैं.
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अप्रैल: 1,087 मामले
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मई: 907 मामले
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जून: 656 मामले
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जुलाई: 642 मामले
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कुल: 3,292 मामले
आंकड़ों से स्पष्ट है कि अप्रैल महीने में सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे. इसके बाद भी हर महीने औसतन 600 से अधिक लोग कुत्तों के हमले का शिकार बन रहे हैं.
नसबंदी कार्यक्रम की धीमी गति पर उठे सवाल
इस घटना के बाद भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका (BNMC) के पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रम की कार्यप्रणाली पर फिर से सवाल खड़े होने लगे हैं. लगभग 12 वर्षों तक बंद रहने के बाद पालिका ने 11 नवंबर 2024 को अपना नसबंदी केंद्र फिर से शुरू किया था. इस काम का जिम्मा 'वेट्स सोसाइटी फॉर एनिमल वेलफेयर एंड रूरल डेवलपमेंट' को सौंपा गया है.
नागरिक प्रशासन के अनुमान के अनुसार, भिवंडी में आवारा कुत्तों की संख्या 24,000 से अधिक है. हालांकि, अब तक इनमें से केवल 7,000 से 8,000 कुत्तों की ही नसबंदी और टीकाकरण हो सका है. पालिका प्रति कुत्ता नसबंदी पर लगभग 1,440 रुपये खर्च करती है. हजारों कुत्तों की नसबंदी बाकी होने के कारण मौजूदा व्यवस्था और काम की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं.
पशु प्रेमी ने जताई सर्जरी के बाद की देखभाल पर चिंता
स्थानीय पशु प्रेमी दीप्ति देशमुख ने नसबंदी केंद्र की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि पहचान के लिए कान पर निशान (नॉचिंग) लगाने के बाद, कुत्तों के सर्जिकल घाव पूरी तरह भरे बिना ही उन्हें वापस सड़कों पर छोड़ दिया जाता है.
दीप्ति देशमुख का दावा है कि इससे जानवरों में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है और कुछ कुत्तों की मौत भी हुई है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र में कुत्तों को समय पर भोजन और उचित देखभाल नहीं मिलती तथा कई बार एक इलाके के कुत्ते को किसी दूसरे इलाके में छोड़ दिया जाता है. हालांकि, इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
प्रशासन का पक्ष: उसी इलाके में छोड़े जाते हैं कुत्ते
आरोपों और नगर निगम की तैयारियों पर बीएनएमसी स्वास्थ्य विभाग के सहायक आयुक्त फैसल तातली ने कहा कि पालिका के पास आवारा कुत्तों के दीर्घकालिक इलाज के लिए अलग से कोई स्वतंत्र सुविधा नहीं है.
फैसल तातली के अनुसार, नसबंदी के लिए लाए गए कुत्तों को चिकित्सा निगरानी में रखा जाता है. प्रक्रिया और आवश्यक रिकवरी के बाद, लगभग एक सप्ताह के भीतर उन्हें उसी स्थान पर वापस छोड़ दिया जाता है जहां से उन्हें उठाया गया था.
कामतघर की इस ताजा घटना ने भिवंडी में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी, धीमी नसबंदी प्रक्रिया और प्रशासनिक लापरवाही को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है.