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BBC का बड़ा खुलासा: भारत में बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक विज्ञापनों को बढ़ावा दे रहा था इंस्टाग्राम, मेटा ने दी सफाई

बीबीसी आई की एक खोजी रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इंस्टाग्राम भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी अवैध सामग्री को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापन चला रहा था. इन विज्ञापनों के जरिए उपयोगकर्ताओं को टेलीग्राम के उन चैनलों पर भेजा जा रहा था जहां यह सामग्री महज 99 रुपये में बिक रही थी. मूल कंपनी मेटा ने इस पर आधिकारिक बयान जारी किया है.

BBC का बड़ा खुलासा: भारत में बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक विज्ञापनों को बढ़ावा दे रहा था इंस्टाग्राम, मेटा ने दी सफाई
इंस्टाग्राम (Photo Credits: Wikimedia Commons)

नई दिल्ली: सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा (Meta) एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है. ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) की खोजी शाखा 'BBC Eye' की एक नवीनतम जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इंस्टाग्राम (Instagram) भारत में बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) को बढ़ावा देने वाले सशुल्क (Paid) विज्ञापनों को प्रसारित कर रहा था. इन विज्ञापनों में खुलेआम कूटनीतिक रूप से बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा था और इनके जरिए यूजर्स को सीधे मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम (Telegram) के उन बाहरी लिंक्स पर भेजा जा रहा था, जहां बच्चों से जुड़े इन अवैध वीडियो को महज 99 रुपये (करीब 1 अमेरिकी डॉलर) में बेचा जा रहा था. इस खुलासे ने मेटा की विज्ञापन स्क्रीनिंग और ऑटोमेटेड मॉडरेशन नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह भी पढ़ें: WhatsApp का नया 'यूजरनेम' फीचर सुरक्षा के लिए खतरा? भारत सरकार ने मेटा को भेजा नोटिस, मनीष सिसोदिया ने भी उठाए सवाल

ऑटोमेटेड ऑटो-सिस्टम पूरी तरह विफल

मेटा की आधिकारिक नीतियों के अनुसार, किसी भी साधारण पोस्ट की समीक्षा तो पब्लिश होने के बाद होती है, लेकिन किसी भी 'पेड विज्ञापन' (Paid Advertisement) को लाइव करने से पहले उसके टेक्स्ट, वीडियो और लिंक की जांच मेटा के ऑटोमेटेड एआई (AI) सिस्टम द्वारा अनिवार्य रूप से की जाती है। इसके बावजूद यह रैकेट धड़ल्ले से विज्ञापन चला रहा था।

जांच के दौरान जब बीबीसी के शोधकर्ताओं ने भारत आधारित एक डमी अकाउंट बनाया और कुछ सामान्य अकाउंट्स को फॉलो किया, तो महज एक हफ्ते के भीतर इंस्टाग्राम फीड पर एडल्ट पोर्नोग्राफी के विज्ञापन आने लगे। इसके बाद यह एल्गोरिदम आगे बढ़ते हुए बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक विज्ञापनों को परोसने लगा। परीक्षण के दौरान इस डमी अकाउंट पर बाल शोषण को बढ़ावा देने वाले लगभग 30 अनोखे विज्ञापन दिखाए गए।

बीबीसी की शिकायत को एआई ने किया खारिज

हैरानी की बात यह है कि जब बीबीसी ने पहली बार इंस्टाग्राम के इन-ऐप टूल के जरिए एक पीड़ित बच्ची वाले विज्ञापन की रिपोर्ट की, तो 24 घंटे बाद इंस्टाग्राम के ऑटोमेटेड सिस्टम ने जवाब दिया कि "यह पोस्ट हमारी कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन नहीं करती है."

बाद में जब बीबीसी ने सीधे मेटा के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क कर सवाल दागे, तब जाकर कंपनी ने उन विज्ञापनों को हटाया, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड किया और बाहरी टेलीग्राम यूआरएल (URLs) को ब्लॉक किया.

पूर्व उपाध्यक्ष का आरोप: 'रेवेन्यू के आगे सुरक्षा की अनदेखी'

मेटा के लिए विज्ञापन ही कमाई का मुख्य जरिया है, जो साल 2025 में उसके कुल 200 अरब डॉलर के राजस्व का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा था. फेसबुक के पूर्व उपाध्यक्ष ब्रायन बोलैंड (जो 2020 तक विज्ञापन व्यवसाय संभालते थे) ने इस खुलासे पर कहा कि वे इस रिपोर्ट से "स्तब्ध हैं लेकिन हैरान नहीं."

ब्रायन बोलैंड का बयान: "कंपनी के एंगेजमेंट-ड्रिवन एल्गोरिदम केवल वॉच-टाइम, क्लिक और रेवेन्यू बढ़ाने के लिए डिजाइन किए गए हैं. जब तक आप इन प्रणालियों को आक्रामक रूप से नियंत्रित नहीं करते, तब तक ये अधिक चरम (Extreme) और आपत्तिजनक सामग्री को बढ़ावा देती रहेंगी. समय के साथ कंपनी के भीतर यूजर सेफ्टी और रेवेन्यू के बीच के तालमेल में कमाई को ही ज्यादा तवज्जो दी जाने लगी."

मेटा ने हाल ही में मार्च में इंसानी मॉडरेटर्स (Human Reviewers) पर निर्भरता कम करके पूरी तरह उन्नत एआई सिस्टम को लागू करने की घोषणा की थी, जो इस मामले में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ.

कानूनी चिंताएं और भारत का रुख

मुंबई स्थित एनजीओ 'रति फाउंडेशन' के सह-संस्थापक सिद्धार्थ पिल्लई ने बताया कि अपराधी इंस्टाग्राम के सहज नेविगेशन का फायदा उठाकर मॉडरेटर्स से बच निकलते हैं और ट्रैफिक को टेलीग्राम पर शिफ्ट कर देते हैं. भारत के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस मदन लोकुर ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सीधे तौर पर "एक आपराधिक गतिविधि में भागीदारी करके पैसे कमा रहा है." उन्होंने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट को इस पर स्वतः संज्ञान (Suo Moto Cognisance) लेकर सरकारी हस्तक्षेप तय करना चाहिए.

अमेरिकी तकनीकी फर्मों के लिए संदिग्ध सीएसएएम गतिविधियों को 'नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन' (NCMEC) साइबर टिपलाइन को रिपोर्ट करना अनिवार्य है. साल 2025 में, भारत को इस टिपलाइन से 19 लाख (1.9 मिलियन) रेफ़रल मिले, जो वैश्विक स्तर पर अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है. तेलंगाना के साइबर सुरक्षा ब्यूरो की निदेशक शिखा गोयल ने पुष्टि की कि मेटा प्लेटफॉर्म्स से सबसे अधिक रिपोर्ट आती हैं, हालांकि इसका एक कारण उनका सक्रिय इंटरनल डिटेक्शन टूल भी है.

मेटा और टेलीग्राम की आधिकारिक सफाई

मेटा ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है कि उसकी प्रणालियां जानबूझकर ऐसे अपराधियों को निशाना बनाती हैं. मेटा ने कहा, "बाल शोषण एक भयानक अपराध है और मेटा अपने ऐप्स पर इससे आक्रामक रूप से लड़ता है। यह दावा पूरी तरह से गलत है कि हम सुरक्षा से ऊपर मुनाफे को रखते हैं. हमने अकेले 2025 में 40 लाख से अधिक संदिग्ध खातों को ऑटो-टर्मिनेट (बंद) किया है. कोई भी सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता, लेकिन हमारी एक्सपर्ट टीमें कमियों को सुधारने के लिए लगातार काम कर रही हैं."

दूसरी ओर, इस मामले में इस्तेमाल हुए मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम (Telegram) ने बताया कि उसने वर्ष 2026 के दौरान बाल शोषण से जुड़े 2,74,000 से अधिक ग्रुप्स और चैनलों को स्थायी रूप से बंद कर दिया है. दुबई स्थित इस प्लेटफॉर्म ने दावा किया कि उसके हाइब्रिड सिस्टम (ह्यूमन + एआई) ने सार्वजनिक रूप से सीएसएएम के प्रसार को लगभग समाप्त कर दिया है. हालांकि, बीबीसी ने नोट किया कि टेलीग्राम द्वारा एक चैनल बंद किए जाने के बाद भी उसी नाम का दूसरा वैकल्पिक चैनल सक्रिय रहा और अवैध सामग्री बेचता रहा.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 03, 2026 01:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).