देश

Income Tax Act: 'आयकर छूट का आधार शादी या खून का रिश्ता, लिंग नहीं'; समलैंगिक जोड़े की याचिका का केंद्र सरकार ने कर्नाटक हाईकोर्ट में किया विरोध

कर्नाटक उच्च न्यायालय में एक समलैंगिक जोड़े की याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि आयकर कानून में टैक्स छूट के लिए 'रिश्तेदार' और 'जीवनसाथी' (Spouse) की परिभाषा विवाह या रक्त संबंधों के कानूनी आधार पर तय की गई है, न कि व्यक्तियों के लिंग के आधार पर.

Income Tax Act: 'आयकर छूट का आधार शादी या खून का रिश्ता, लिंग नहीं'; समलैंगिक जोड़े की याचिका का केंद्र सरकार ने कर्नाटक हाईकोर्ट में किया विरोध
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

बेंगलुरु: आयकर अधिनियम (Income Tax Act) के तहत उपहारों पर मिलने वाली कर छूट को समलैंगिक जोड़ों (Same-Sex Couples) तक बढ़ाने की मांग का केंद्र सरकार ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में विरोध किया है.

कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) में याचिका दायर करने वाले समलैंगिक जोड़े ने कानून में इस्तेमाल शब्द 'जीवनसाथी' (Spouse) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी. मामले की सुनवाई के दौरान बुधवार को केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आयकर छूट का वर्गीकरण लिंग (Sex) के आधार पर नहीं, बल्कि विवाह और रक्त संबंध जैसे कानूनी रूप से सत्यापित रिश्तों के आधार पर किया जाता है. यह भी पढ़ें: इनकम टैक्स छूट पर बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई: कानूनी मान्यता के बिना समलैंगिक जोड़ों को नहीं मिल सकता 'पति-पत्नी' वाला टैक्स लाभ

'रिश्तेदार' की परिभाषा का केंद्र सरकार ने किया बचाव

केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अरविंद कामथ ने अदालत में दलील दी कि याचिकाकर्ताओं द्वारा यह गलतफहमी बनाई जा रही है कि टैक्स कानून में वर्गीकरण लिंग के आधार पर किया गया है.

आयकर अधिनियम की धारा 56(2)(x) के तहत 50,000 रुपये से अधिक का उपहार मिलने पर उसे 'अन्य स्रोतों से आय' मानकर टैक्स लगाया जाता है. हालांकि, किसी 'रिश्तेदार' (जिसमें जीवनसाथी भी शामिल है) से मिला उपहार पूरी तरह कर-मुक्त (Exempt) होता है.

ASG कामथ ने कहा:

"संसद ने यह व्यवस्था इसलिए बनाई है ताकि कर अधिकारी विवाद की स्थिति में विवाह या रक्त संबंध जैसे कानूनी दस्तावेजों से रिश्ते की सत्यता की जांच आसानी से कर सकें, बिना किसी की निजी जिंदगी में अत्यधिक हस्तक्षेप किए."

उन्होंने याचिकाकर्ता अनुराग कालिया और अखिलेश गोडी (दोनों आईआईटी पासआउट और सॉफ्टवेयर इंजीनियर) के "स्थिर रिश्ते" (Stable Relationship) के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोई कर निर्धारण अधिकारी (Assessing Officer) यह जांच कैसे कर सकता है कि कौन सा रिश्ता स्थिर है या नहीं.

हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बी. एम. श्याम प्रसाद ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि संसद ने अपनी समझ से यह अपवाद (Exemption) इसलिए बनाया है ताकि कोई इसका दुरुपयोग न कर सके और रिश्तों की कानूनी स्थिति स्पष्ट रहे. उन्होंने कहा कि यदि अदालत इस प्रावधान की व्याख्या बदलने लगेगी, तो इससे अनिश्चितता पैदा हो जाएगी.

वहीं, याचिकाकर्ता जोड़े के वकील ध्रुव जानसन-संघवी ने स्पष्ट किया कि वे 'Spouse' शब्द की संवैधानिकता को चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि उनका तर्क यह है कि इस शब्द के वर्तमान प्रयोग से समलैंगिक जोड़ों के साथ अप्रत्यक्ष भेदभाव (Indirect Discrimination) हो रहा है.

विवाद की शुरुआत: 1.15 लाख रुपये का गोल्ड ब्रेसलेट

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वे बीते सात वर्षों से एक साथ हैं और 2019 से बेंगलुरु में एक ही घर में रह रहे हैं. विवाद की शुरुआत एक 22 कैरेट सोने के ब्रेसलेट (वजन 14.41 ग्राम) को लेकर हुई, जिसे अखिलेश को अपने पिता से विरासत में मिला था और उन्होंने इसे अपने रिश्ते की वर्षगांठ पर अनुराग को उपहार में दिया था.

यदि वे एक कानूनी रूप से विवाहित जोड़ा होते, तो यह ब्रेसलेट पूरी तरह कर-मुक्त होता. लेकिन आयकर नियमों के अनुसार, अनुराग को वित्त वर्ष 2025-26 का रिटर्न भरते समय इस ब्रेसलेट का बाजार मूल्य (लगभग 1,15,500 रुपये) घोषित कर उस पर 25% टैक्स, 15% सरचार्ज और 4% सेस चुकाने की सलाह दी गई.

जोड़े का तर्क है कि उनसे केवल लिंग के आधार पर यह टैक्स वसूला जा रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन है. कर्नाटक हाईकोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 4 अगस्त को करेगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 23, 2026 02:45 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).