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UP: 54 साल बाद खुला Banke Bihari Mandir का खजाना, मिलीं सोने-चांदी की सिल्लियां; SC के आदेश पर सर्वेक्षण की हुई Videography

मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के तोशाखाने (कोषागार) में सोना, चाँदी, रत्न और प्राचीन सिक्के मिलने की खबर सामने आई है. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त एक पैनल के आदेश पर धनतेरस पर इन कमरों को खोला गया था.

UP: 54 साल बाद खुला Banke Bihari Mandir का खजाना, मिलीं सोने-चांदी की सिल्लियां; SC के आदेश पर सर्वेक्षण की हुई Videography
Banke Bihari Temple Treasure (Photo- @SuboSrivastava/X)

Banke Bihari Temple News: मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के तोशाखाने (कोषागार) में सोना, चांदी, रत्न और प्राचीन सिक्के मिलने की खबर सामने आई है. Supreme Court द्वारा नियुक्त एक पैनल के आदेश पर Dhanteras पर इन कमरों को खोला गया था. अब, मंदिर के पुजारियों ने एक सोने और तीन चांदी की सिल्लियां, कुछ लाल और हरे रत्न, पुराने सिक्के और धातु के बर्तन मिलने का दावा किया है. मंदिर के पुजारी Dinesh Goswami ने बताया कि ये सभी वस्तुएं गुलाल (सफेद पाउडर) से सने एक लंबे डिब्बे में मिलीं. उन्होंने बताया कि सोने और चांदी की सिल्लियां लगभग 3 से 4 फीट लंबी थीं.

इस बीच, मथुरा सदर के DSP Sandeep Singh ने बताया कि पूरे सर्वेक्षण की Videography की गई और प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस दल मौजूद थे.

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बांके बिहारी मंदिर के बंद खजाने में मिली सोने-चांदी की सिल्लियां

29 अक्टूबर को शुरू होगी बैठक

एडीएम (वित्त एवं राजस्व) पंकज कुमार वर्मा (ADM Pankaj Kumar Verma) ने बताया, "इन वस्तुओं को 'पीली धातु' और 'सफेद धातु' के रूप में दर्ज किया गया है. सभी वस्तुओं को पैनल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा. समिति द्वारा अपनी जांच पूरी होने तक कोई खुलासा नहीं किया जा सकता."

उन्होंने आगे बताया कि समिति की अगली बैठक 29 अक्टूबर को होगी, जहां यह तय किया जाएगा कि बरामद खजाने को कैसे और कहां सुरक्षित रखा जाए.

1864 में बनाया गया था मंदिर का खजाना

रिपोर्टों के अनुसार, ये कमरे 1971 से बंद हैं. उस समय, मंदिर के आभूषणों को एक बैंक लॉकर में स्थानांतरित कर दिया गया था. कहा जाता है कि इस खजाने में एक मोर के आकार का पन्ना हार, एक चांदी का शेषनाग, नौ रत्नों से जड़ा एक सोने का कलश और भरतपुर, करौली और ग्वालियर के राजघरानों से मिले उपहार शामिल हैं.

मंदिर का खजाना 1864 में बनाया गया था. ब्रिटिश शासन के दौरान, यहां  29 अक्टूबर को 2 बड़ी चोरियां हुईं. इसके बाद, मंदिर का मुख्य द्वार हमेशा के लिए बंद कर दिया गया.

'बांके बिहारी मंदिर में धन संचय की परंपरा नहीं'

हालांकि, कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि "प्राचीन खजाने" के दावे की बातें बढ़ा-चढ़ाकर कही जा रही हैं. पैनल के सदस्य Shailendra Goswami ने कहा, "यहां धन संचय की कोई परंपरा नहीं है. सभी चढ़ावे ठाकुरजी को समर्पित होते हैं. नकद चढ़ावा बैंक में जमा किया जाता है."

HC को एक साल में निर्णय देने का आदेश

बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने इस साल मंदिर की देखरेख के लिए एक समिति गठित की थी, जिसकी अध्यक्षता Allahabad High Court के रिटायर्ड जज Justice Ashok Kumar कर रहे हैं.

अदालत ने मंदिर प्रबंधन से जुड़ी विवादित उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी ट्रस्ट अध्यादेश 2025 पर रोक लगाते हुए इसकी वैधता पर हाईकोर्ट से एक साल में निर्णय देने को कहा है.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 20, 2025 04:32 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).