Garba Muslim Entry Row: गरबा में मुस्लिमों की नो-एंट्री पर अमृता फडणवीस का बड़ा बयान; कहा- 'शांति से आनंद लेने में कुछ गलत नहीं'

महाराष्ट्र में आगामी शारदीय नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों में गैर-हिंदुओं और विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के प्रवेश पर रोक लगाने की दक्षिणपंथी संगठनों की मांग के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी और सामाजिक कार्यकर्ता अमृता फडणवीस ने समावेशी रुख का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति शांतिपूर्वक और नियमों का पालन करते हुए गरबा का आनंद लेने आता है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है.

Amruta Fadnavis (Photo Credit- Facebook)

Garba Muslim Entry Row: महाराष्ट्र में 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रहे नवरात्रि उत्सव से पहले गरबा और डांडिया पंडालों में मुस्लिमों के प्रवेश को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस छिड़ गई है. विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा आयोजनों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने और भाजपा नेता व राज्य के मंत्री नितेश राणे (Nitesh Rane) द्वारा इसका खुलकर समर्थन किए जाने के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) की पत्नी और सामाजिक कार्यकर्ता अमृता फडणवीस (Amrita Fadnavis) ने इस पर अपनी असहमति जताई है.

चंद्रपुर और मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अमृता फडणवीस ने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक त्योहार सामाजिक सौहार्द और एकजुटता को बढ़ावा देने वाले होते हैं, न कि लोगों को बांटने वाले. यह भी पढ़ें: Fadnavis Meets PM Modi: दिल्ली दौरे पर देवेंद्र फडणवीस, पत्नी-बेटी के साथ पीएम मोदी से की मुलाकात कहा- 'प्रधानमंत्री का आशीर्वाद सदा महाराष्ट्र के साथ रहा है और रहेगा'

'त्योहार समावेशी होते हैं, शांति से देखने में कुछ गलत नहीं'

नितेश राणे और विहिप के बयानों को लेकर पूछे गए सवाल पर अमृता फडणवीस ने सांस्कृतिक खुलेपन की वकालत की:

अमृता फडणवीस ने गरबा कार्यक्रमों में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाने की VHP की मांग को खारिज किया

VHP की 'नो-एंट्री' गाइडलाइन और नितेश राणे का कड़ा रुख

इस विवाद की शुरुआत विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के उस फैसले के बाद हुई, जिसमें महाराष्ट्र भर के गरबा आयोजकों के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए थे:

आयोजनों से पहले प्रशासनिक सतर्कता

अमृता फडणवीस के इस बयान के बाद सत्तारूढ़ दल और सांस्कृतिक हलकों में अलग-अलग दृष्टिकोण खुलकर सामने आए हैं. जहां कुछ रूढ़िवादी संगठन पहचान सत्यापन को सुरक्षा और धार्मिक परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं कई सामाजिक और सांस्कृतिक हस्तियों ने गरबा को लोक कला और सामूहिक उत्सव बताते हुए सभी वर्गों के लिए खुले रहने की बात कही है.

राज्य भर में आगामी 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले गरबा आयोजनों को देखते हुए गृह विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है, ताकि किसी भी पंडाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े और सुरक्षा व सौहार्द बना रहे.

Share Now