Amravati Ghost Rumours: अमरावती के आदिवासी स्कूल में 'भूत' की अफवाह से मचा हड़कंप, 610 छात्रावास छोड़कर भागे; कलेक्टर-SP ने कैंपस में बिताई रात
इस घटना ने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया. प्रशासन ने छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि स्कूल परिसर पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी तरह की अलौकिक घटना का कोई प्रमाण नहीं मिला है.
Amravati Ghost Rumours: महाराष्ट्र के अमरावती जिले के डोमा गांव स्थित एक आदिवासी आवासीय स्कूल में 'भूत' की अफवाह फैलने के बाद हालात इतने बिगड़ गए कि छात्रावास में रहने वाले करीब 610 छात्र-छात्राएं डर के कारण अपने घर लौट गए. छात्रों के मन से डर निकालने और भरोसा बहाल करने के लिए अमरावती के कलेक्टर आशीष येरेकर, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्यम गांधी, पुलिस अधीक्षक निकेतन कदम समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार की रात स्कूल परिसर में ही बिताई. अधिकारियों ने छात्रों के साथ भोजन किया, बातचीत की और अंधविश्वास से दूर रहकर वैज्ञानिक सोच अपनाने की अपील की.
इस घटना ने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया. प्रशासन ने छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि स्कूल परिसर पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी तरह की अलौकिक घटना का कोई प्रमाण नहीं मिला है.
कैसे शुरू हुई 'भूत' की अफवाह?
जानकारी के मुताबिक, कुछ छात्राओं के 'भूत के साये' में आने की अफवाह फैलने के बाद छात्रावास में डर का माहौल बन गया. इसके चलते करीब 850 छात्रों में से 610 छात्र-छात्राएं अपने घर चले गए. बाद में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच की, जिसमें किसी भी तरह की अलौकिक घटना की पुष्टि नहीं हुई. रिपोर्ट में बताया गया कि प्रभावित छात्राओं में मानसिक तनाव और डर की वजह से डिसोसिएटिव या कन्वर्जन सिंड्रोम जैसे लक्षण दिखाई दिए.
प्रशासन के अनुसार, कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी करीब 350 छात्र-छात्राएं स्कूल नहीं लौटे हैं. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि त्योहारों और छुट्टियों की वजह से भी कुछ छात्र अभी वापस नहीं आए हैं.
अधिकारियों ने स्कूल में बिताई रात, नए छात्रावास का किया उद्घाटन
अमरावती के कलेक्टर आशीष येरेकर, एसपी निकेतन कदम और अन्य अधिकारियों ने स्कूल परिसर में नव-निर्मित छात्रावास का निरीक्षण किया और उसका उद्घाटन भी किया. यह छात्रावास छात्राओं के लिए बेहतर आवास सुविधा उपलब्ध कराने और भीड़भाड़ कम करने के उद्देश्य से बनाया गया है.
एसपी निकेतन कदम ने कहा कि स्कूल में 'भूत' होने की अफवाह से छात्र काफी भयभीत हो गए थे. इसलिए अधिकारियों ने खुद स्कूल में रात बिताने का फैसला किया ताकि छात्रों का डर दूर किया जा सके और उनमें आत्मविश्वास पैदा हो.
छात्रों से की बातचीत, अंधविश्वास से दूर रहने की दी सलाह
रात के दौरान अधिकारियों ने छात्रों के साथ भोजन किया और उनसे खुलकर बातचीत की. उन्होंने अपने करियर और सिविल सेवा के अनुभव भी साझा किए. इस दौरान छात्रों ने अपनी आशंकाएं और डर अधिकारियों के सामने रखे.
कलेक्टर आशीष येरेकर ने छात्रों से बिरसा मुंडा और तांत्या भील जैसे आदिवासी नायकों से प्रेरणा लेने और अंधविश्वास से दूर रहने की अपील की. उन्होंने छात्रों को भविष्य में IAS और IPS अधिकारी बनने का लक्ष्य रखने के लिए भी प्रेरित किया.
कक्षा 11वीं की विज्ञान की छात्रा कल्याणी गोपीचंद जावरकर ने कहा कि अधिकारियों के स्कूल में आने और रात बिताने से छात्रों के मन का डर काफी हद तक खत्म हो गया और उनमें आत्मविश्वास लौटा है.
जांच में क्या सामने आया?
स्वास्थ्य विभाग की जांच में प्रभावित छात्राओं में रोने के दौरे पड़ना, डर महसूस होना, उदासी, शारीरिक परेशानी, भूख कम लगना, भूलने की समस्या और याददाश्त कमजोर होने जैसे लक्षण सामने आए. विशेषज्ञों ने इसे मानसिक तनाव और भय से जुड़ी 'सेलेक्टिव हिस्टीरिया' जैसी स्थिति बताया. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मामले में किसी भी तरह की अलौकिक या भूत-प्रेत जैसी घटना का कोई प्रमाण नहीं मिला है.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 03, 2026 07:34 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

